Go To Mantra
Viewed 344 times

स वह्नि॑भि॒र्ऋक्व॑भि॒र्गोषु॒ शश्व॑न्मि॒तज्ञु॑भिः पुरु॒कृत्वा॑ जिगाय। पुरः॑ पुरो॒हा सखि॑भिः सखी॒यन्दृ॒ळ्हा रु॑रोज क॒विभिः॑ क॒विः सन् ॥३॥

English Transliteration

sa vahnibhir ṛkvabhir goṣu śaśvan mitajñubhiḥ purukṛtvā jigāya | puraḥ purohā sakhibhiḥ sakhīyan dṛḻhā ruroja kavibhiḥ kaviḥ san ||

Mantra Audio
Pad Path

सः। वह्नि॑ऽभिः। ऋक्व॑ऽभिः। गोषु॑। शश्व॑त्। मि॒तज्ञु॑ऽभिः। पु॒रु॒ऽकृत्वा॑। जि॒गा॒य॒। पुरः॑। पु॒रः॒ऽहा। सखि॑ऽभिः। स॒खि॒ऽयन्। दृ॒ळ्हा। रु॒रो॒ज॒। क॒विऽभिः॑। क॒विः। सन् ॥३॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:32» Mantra:3 | Ashtak:4» Adhyay:7» Varga:4» Mantra:3 | Mandal:6» Anuvak:3» Mantra:3


SWAMI DAYANAND SARSWATI

राजा कैसे जनों के साथ मित्रता करे, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे सज्जनो ! जो (मितज्ञुभिः) सङ्कुचित जाँघवाले बैठे हुए विद्वानों और (ऋक्वभिः) प्रशंसित (वह्निभिः) धारण करनेवाले (कविभिः) विद्वानों से (कविः) विद्वान् (सन्) हुआ और (सखिभिः) मित्रों से (सखीयन्) मित्र के सदृश आचरण करता हुआ (पुरोहा) नगरों का नाश करनेवाला (दृळ्हाः) कम्पन क्रिया से रहित (पुरः) शत्रुओं के नगरों का (रुरोज) भङ्ग करता है और (गोषु) उत्तम प्रकार शिक्षित वाणियों में (शश्वत्) निरन्तर (पुरुकृत्वा) बहुत करके शत्रुओं को (जिगाय) जीतता है (सः) वही आप लोगों से मानने योग्य है ॥३॥
Connotation: - जो मनुष्य प्रशंसित, बलिष्ठ, थोड़े बोलनेवाले, विद्वान् मित्रों के साथ मित्रता कर राज्य को प्राप्त होकर दुष्टों का नाश करके धार्मिकों की रक्षा करते हैं, वे कृतकृत्य होते हैं ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वह्नि, ऋक्व, मितजु'

Word-Meaning: - [१] (सः) = वे (पुरुकृत्वा) = सब पालक व पूरक कर्मों को करनेवाले प्रभु (वह्निभिः) = यज्ञ आदि कर्मों का वहन करनेवाले (ऋक्वभिः) = [ऋच स्तुतौ] स्तुति को करनेवाले (गोषु) = ज्ञान की वाणियों के निमित्त (मितजुभिः) = संकुचित जानु होकर आचार्यों के समीप बैठनेवाले इन पुरुषों से (शश्वत्) = सदा (जिगाय) = काम-क्रोध-लोभ आदि आसुर भावनाओं को जीतते हैं। विजय सब प्रभु ही करते हैं, इन 'वह्नि, ऋक्व व मितञ्जु' पुरुषों को वे अपना निमित्त बनाते हैं। [२] वे (पुरोहा) = आसुर पुरियों वे का विध्वंस करनेवाले प्रभु (दृढाः पुरः) = दृढ़ भी असुर नगरियों को (रुरोज) = भग्न कर देते हैं। इस प्रकार वे प्रभु (सखिभिः) = सखा भूत जीवों के साथ (सखीयन्) = सखित्व का आचरण करते हैं और (कविभिः कविः सन्) = इन तत्त्वद्रष्टा पुरुषों के साथ तत्त्वदर्शी होते हैं। वस्तुतः प्रभु ही इन सखाओं को तत्त्वद्रष्टा बनाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- अध्यात्म संग्राम में विजयी बनने के लिये हम 'यज्ञादि कर्मों का वहन करनेवाले, स्तोता व ज्ञान की वाणियों के निमित्त आचार्यों के समीप संकुचित जानु होकर बैठनेवाले' बनें। प्रभु हमारे सब आसुरभावों को विनष्ट करेंगे।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

राजा कीदृशैः सह मित्रतां कुर्य्यादित्याह ॥

Anvay:

हे सज्जना ! यो मितज्ञुभिर्ऋक्वभिर्वह्निभिः कविभिः कविः सन् सखिभिः सखीयन् सन् पुरोहा दृळ्हाः पुरो रुरोज गोषु शश्वत् पुरुकृत्वा शत्रून् जिगाय स एव युष्माभिर्मन्तव्यः ॥३॥

Word-Meaning: - (सः) (वह्निभिः) वोढृभिः (ऋक्वभिः) प्रशंसितैः (गोषु) सुशिक्षितासु वाक्षु (शश्वत्) निरन्तरम् (मितज्ञुभिः) सङ्कुचितजानुभिरासीनैर्विद्वद्भिः (पुरुकृत्वा) (जिगाय) जयति (पुरः) शत्रूणां नगराणि (पुरोहा) पुराणां हन्ता (सखिभिः) मित्रैः (सखीयन्) सखेवाचरन् (दृळ्हाः) निष्कम्पाः (रुरोज) रुजति भनक्ति (कविभिः) विपश्चिद्भिः (कविः) विद्वान् (सन्) ॥३॥
Connotation: - ये मनुष्याः प्रशंसितैर्बलिष्ठैर्मितभाषिभिर्विद्वद्भिर्मित्रैस्सह मैत्रीं कृत्वा राज्यं प्राप्य दुष्टान् हत्वा धार्मिकान् रक्षन्ति ते कृतकृत्या भवन्ति ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - He is the ruler, himself a visionary, friend of friends, relentless hero of abundant action, breaker of the strongholds of darkness, and with the company and support of assisting partners, celebrants and poetic creators sitting in meditative posture, he breaks the adamantine rigidities of dead wood and wins the battles for the development of lands and cows and the advancement of knowledge, arts and enlightenment.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

With whom should a king form friendship-is told.

Anvay:

O good men ! you should regard him as a good ruler who being a destroyer of the cities of the enemies, breaks even the firm cities or forts of the foes being assisted by his friends by farsighted wise men who are seated on their contracted knees (thighs) bearers of great responsibilities or conveyors of happiness and admired by all, he himself being a highly learned person and a true friend. He conquers his enemies by his constant inspiring and spirited speeches among his warriors.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Those men are successful who having cultivated friendship with admired, mighty, highly learned persons who speak measured words, attaining kingdom destroy the wicked and protect the righteous.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जी माणसे प्रशंसित, बलवान, मितभाषी, विद्वान मित्रांबरोबर मैत्री करून राज्य प्राप्त करून दुष्टांचा नाश करून धार्मिकांचे रक्षण करतात ती कृतकृत्य होतात. ॥ ३ ॥