या त॑ ऊ॒तिर॑व॒मा या प॑र॒मा या म॑ध्य॒मेन्द्र॑ शुष्मि॒न्नस्ति॑। ताभि॑रू॒ षु वृ॑त्र॒हत्ये॑ऽवीर्न ए॒भिश्च॒ वाजै॑र्म॒हान्न॑ उग्र ॥१॥
yā ta ūtir avamā yā paramā yā madhyamendra śuṣminn asti | tābhir ū ṣu vṛtrahatye vīr na ebhiś ca vājair mahān na ugra ||
या। ते॒। ऊ॒तिः। अ॒व॒मा। या। प॒र॒मा। या। म॒ध्य॒मा। इ॒न्द्र॒। शु॒ष्मि॒न्। अस्ति॑। ताभिः॑। ऊँ॒ इति॑। सु। वृ॒त्र॒ऽहत्ये॑। अ॒वीः॒। नः॒। ए॒भिः। च॒। वाजैः॑। म॒हान्। नः॒। उ॒ग्र॒ ॥१॥
SWAMI DAYANAND SARSWATI
अब नव ऋचावाले पच्चीसवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में अब राजा क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
'अवम परम मध्यम' रक्षण
SWAMI DAYANAND SARSWATI
अथ राजा किं कुर्यादित्याह ॥
हे शुष्मिन्नुग्रेन्द्र ! ते याऽवमा या मध्यमा या परमोतिरस्ति ताभिर्वृत्रहत्ये नः स्ववीरू एभिर्वाजैश्च महान्त्सन्नोऽवीः ॥१॥
DR. TULSI RAM
ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA
What should a king do-is told.
O king ! you are administrator of justice and endowed with admirable strength and splendor, with your protections whether they are the least, the midmost or the highest support us well in battles. You being great with speediness and other good qualities, protect us well.
MATA SAVITA JOSHI
या सूक्तात इंद्र, शूरवीर, सेनापती व राजा यांच्या कृत्याचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची पूर्व सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.
