Go To Mantra

अ॒भि त्वा॒ पाजो॑ र॒क्षसो॒ वि त॑स्थे॒ महि॑ जज्ञा॒नम॒भि तत्सु ति॑ष्ठ। तव॑ प्र॒त्नेन॒ युज्ये॑न॒ सख्या॒ वज्रे॑ण धृष्णो॒ अप॒ ता नु॑दस्व ॥७॥

English Transliteration

abhi tvā pājo rakṣaso vi tasthe mahi jajñānam abhi tat su tiṣṭha | tava pratnena yujyena sakhyā vajreṇa dhṛṣṇo apa tā nudasva ||

Mantra Audio
Pad Path

अ॒भि। त्वा॒। पाजः॑। र॒क्षसः॑। वि। त॒स्थे॒। महि॑। ज॒ज्ञा॒नम्। अ॒भि। तत्। सु। ति॒ष्ठ॒। तव॑। प्र॒त्नेन॑। युज्ये॑न। सख्या॑। वज्रे॑ण। धृ॒ष्णो॒ इति॑। अप॑। ता। नु॒द॒स्व॒ ॥७॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:21» Mantra:7 | Ashtak:4» Adhyay:6» Varga:12» Mantra:2 | Mandal:6» Anuvak:2» Mantra:7


Reads 386 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (धृष्णो) दृढ़ राजन् ! (तव) आपका जो (महि) बड़ा (जज्ञानम्) सुखजनक (पाजः) बल (रक्षसः) दुष्ट मनुष्यों के (अभि, वि, तस्थे) सम्मुख विशेषकर स्थित होता है (तत्) वह (त्वा) आपको प्राप्त होवे और आप उसके (अभि, सु तिष्ठ) सम्मुख स्थित हूजिये उस (प्रत्नेन) प्राचीन (युज्यते) युक्त करने के योग्य (सख्या) मित्र और (वज्रेण) शस्त्र और अस्त्रों के समूह से आप (ता) उन शत्रुसेनाओं को (अप, नुदस्व) दूर करिये ॥७॥
Connotation: - हे राजजन ! जो राजपुरुष दुष्टों के लिये दण्ड देते और श्रेष्ठों को पालन करते हैं, उनका आप सत्कार करिये ॥७॥
Reads 386 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रत्न सखा 'वज्र'

Word-Meaning: - [१] प्रभु जीव से कहते हैं कि (त्वा अभि) = तेरी ओर तेरे सामने (रक्षसः पाजः) = यह राक्षसीभावों का सेनारूप बल (वितस्थे) = विशेषरूप से स्थित हुआ है, तेरे पर आक्रमण के लिए यह तैयार है (महि जज्ञानम्) = महान् प्रादुर्भूत होते हुए (तत्) = उस सैन्य को (अभि सुतिष्ठः) = लक्ष्य करके सम्यक् स्थित हो, उस पर आक्रमण के लिए सावधान होकर स्थित हो। [२] हे (धृष्णो) = धर्षणशील शत्रुओं का पराभव करनेवाले जीव ! (तव) = तेरे (प्रत्नेन) = सनातन, सदा के (युज्येन सख्या) = साथ रहनेवाले मित्र (वज्रेण) = क्रियाशीलतारूप वज्र से (ता) = उनको (अपनुदस्व) = परे धकेल दे । क्रियाशीलतारूप वज्र द्वारा इनका तू निराकरण करनेवाला हो ।
Connotation: - भावार्थ- क्रियाशीलता रूप वज्र से हम निरन्तर आक्रमण करनेवाले राक्षसी भावों को अपने से दूर करें ।
Reads 386 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे धृष्णो राजँस्तव यन्महि जज्ञानं पाजो रक्षसोऽभि वि तस्थे तत्त्वा प्राप्नोतु तत्वमभि सु तिष्ठ तेन प्रत्नेन युज्येन सख्या वज्रेण त्वं ता अप नुदस्व ॥७॥

Word-Meaning: - (अभि) आभिमुख्ये (त्वा) त्वाम् (पाजः) बलम् (रक्षसः) दुष्टान् मनुष्यान् (वि) (तस्थे) वितिष्ठते (महि) महत् (जज्ञानम्) सुखजनकम् (अभि) (तत्) (सु) (तिष्ठ) (तव) (प्रत्नेन) प्राचीनेन (युज्येन) योक्तुमर्हेण (सख्या) मित्रेण (वज्रेण) शस्त्रास्त्रसमूहेन (धृष्णो) दृढ (अप) (ता) तानि शत्रूणां सैन्यानि (नुदस्व) दूरीकुरु ॥७॥
Connotation: - हे राजजन ! ये राजपुरुषा दुष्टेभ्यो दण्डं ददति श्रेष्ठानां पालनं कुर्वन्ति तांस्त्वं सत्कुर्याः ॥७॥
Reads 386 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Against you stands the force of evil powers, O potent lord of courage and valour, face that firmly and, with your age old ally and friendly thunderbolt of justice and punishment, crush those forces and wipe them out before they rise to dangerous proportions.
Reads 386 times

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject of people's duties is continued.

Anvay:

O brave champion-king! you who attain that your great strength against the force of the wicked people which manifests happiness. Uphold or maintain it firmly. Drive away the armies of the enemies with that your eternal friend and close companion, the hoard of thunderbolt-like powerful arms and missiles.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O king! honor those officers or workers of the State who punish the wicked persons and cherish good men.
Reads 386 times

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे राजजनांनो ! जे राजपुरुष दुष्टांना दंड देतात, श्रेष्ठांचे पालन करतात त्यांचा तुम्ही सत्कार करा. ॥ ७ ॥