Go To Mantra

आ यं हस्ते॒ न खा॒दिनं॒ शिशुं॑ जा॒तं न बिभ्र॑ति। वि॒शाम॒ग्निं स्व॑ध्व॒रम् ॥४०॥

English Transliteration

ā yaṁ haste na khādinaṁ śiśuṁ jātaṁ na bibhrati | viśām agniṁ svadhvaram ||

Mantra Audio
Pad Path

आ। यम्। हस्ते॑। न। खा॒दिन॑म्। शिशु॑म्। जा॒तम्। न। बिभ्र॑ति। वि॒शाम्। अ॒ग्निम्। सु॒ऽअ॒ध्व॒रम् ॥४०॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:16» Mantra:40 | Ashtak:4» Adhyay:5» Varga:28» Mantra:5 | Mandal:6» Anuvak:2» Mantra:40


Reads 413 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - जो (यम्) जिसको (हस्ते) हाथ में (खादिनम्) भक्षण करनेवाले के (न) समान और (जातम्) उत्पन्न हुए (शिशुम्) बालक के (न) समान (विशाम्) मनुष्यादि प्रजाओं के (स्वध्वरम्) सुन्दर यज्ञ जिससे हों उस (अग्निम्) प्रकाशमान अग्नि को (आ, बिभ्रति) सब ओर से धारण करते हैं, वे उससे कृतकृत्य होते हैं ॥४०॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जो हाथ में आँवले को जैसे वैसे, गोदी में लड़के को जैसे वैसे अग्निविद्या को जानते हैं, वे प्रजा के स्वामी होते हैं ॥४०॥
Reads 413 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

खादिनं-अग्निं-स्वध्वरम्

Word-Meaning: - [१] [न=संप्रति] (यम्) = जिस प्रभु को (न) = अब (जातं शिशुं न) = उत्पन्न हुए - हुए बालक की तरह (हस्ते) = हाथ में (बिभ्रति) = धारण करते हैं। अर्थात् जिस प्रकार बालक को प्रेम से धारण करते हैं, इसी प्रकार प्रभु को भी आदरयुक्त प्रीति से धारण करने का प्रयत्न करते हैं । [२] उस प्रभु को धारण करते हैं जो कि (खादिनम्) = [भक्षकं] सब शत्रुओं को खा जानेवाले हैं। (विशां अग्निम्) = सब प्रजाओं को, शत्रु विनाश द्वारा, आगे ले चलनेवाले हैं। (स्वध्वरम्) = और हमारे जीवनों में उत्तम हिंसारहित कर्मों को सिद्ध करनेवाले हैं। प्रभु कृपा से ही जीवन में सब यज्ञ चलते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु को हृदयों में आदरपूर्वक इस प्रकार धारण करें, जैसे कि उत्पन्न बालक को प्रीतिपूर्वक हाथ में उठाते हैं। वे प्रभु शत्रुओं का हिंसन करनेवाले हैं। शत्रुओं के हिंसन के द्वारा हमें आगे ले चलनेवाले हैं और उत्तम हिंसा रहित यज्ञों को सिद्ध करते हैं।
Reads 413 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

ये यं हस्ते खादिनं न जातं शिशुं न विशां स्वध्वरमग्निमाऽऽबिभ्रति ते तेन कृतकृत्या जायन्ते ॥४०॥

Word-Meaning: - (आ) समन्तात् (यम्) (हस्ते) (न) इव (खादिनम्) खादितुं भक्षयितुं शीलम् (शिशुम्) बालम् (जातम्) उत्पन्नम् (न) इव (बिभ्रति) भरन्ति (विशाम्) मनुष्यादिप्रजानाम् (अग्निम्) प्रकाशमानम् (स्वध्वरम्) शोभना अध्वरा यस्मात्तम् ॥४०॥
Connotation: - अत्रोपमालङ्कारः । हे मनुष्या ! ये हस्तामलकवत् क्रोडे शिशुमिवाग्निविद्यां जानन्ति ते प्रजापतयो भवन्ति ॥४०॥
Reads 413 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Like the darling new bom baby held in the hand, like a beautiful bracelet worn on the wrist, the yajakas place the fire in the vedi, light and raise it, since it is the blessed source giver of wealth and joy for the people.
Reads 413 times

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What same subject is continued.

Anvay:

Those who bear Agni (fire) protector of men, in which good non-violent sacrifices are performed, as they bear some eatable in their hands or a new born infant is borne in the arms, become blessed by them, as their noble desires are fulfilled by its proper and methodical use.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Those persons who know the science of fire, thoroughly, like the infant in the lap, become the protectors and nourishers of the people.
Reads 413 times

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात उपमालंकार आहे. हे माणसांनो ! जे हस्तमलकावत (हातातील आवळ्याप्रमाणे) व कुशीतील बाळाप्रमाणे अग्निविद्या जाणतात ते प्रजेचे स्वामी बनतात. ॥ ४० ॥