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उप॑च्छा॒यामि॑व॒ घृणे॒रग॑न्म॒ शर्म॑ ते व॒यम्। अग्ने॒ हिर॑ण्यसंदृशः ॥३८॥

English Transliteration

upa cchāyām iva ghṛṇer aganma śarma te vayam | agne hiraṇyasaṁdṛśaḥ ||

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Pad Path

उप॑। छा॒याम्ऽइ॑व। घृणेः॑। अग॑न्म। शर्म॑। ते॒। व॒यम्। अग्ने॑। हिर॑ण्यऽसन्दृशः ॥३८॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:16» Mantra:38 | Ashtak:4» Adhyay:5» Varga:28» Mantra:3 | Mandal:6» Anuvak:2» Mantra:38


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्यों को क्या प्राप्त करने योग्य है, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (अग्ने) विद्वन् ! (ते) आपके (घृणेः) प्रदीप्त सूर्य्य से (छायामिव) छाया को जैसे वैसे (शर्म) गृह को (हिरण्यसन्दृशः) तेज के सदृश समान दर्शन जिनका ऐसे (वयम्) हम लोग (उप) समीप (अगन्म) प्राप्त होवें ॥३८॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे विद्वन् ! हम लोग सब ऋतुओं में हुए सूर्य्य को जैसे वैसे प्रकाशमान आपके गृह को प्राप्त होकर छाया के सदृश सेवन करें ॥३८॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

उपासना से शान्ति की प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = प्रकाशस्वरूप, सब बुराइयों को दग्ध करनेवाले प्रभो! (वयम्) = हम (हिरण्यसंदृशः) = हितरमणीय तेजवाले अथवा हिरण्य [स्वर्ण] की तरह रोचमान तेजवाले (धृणे:) = दीप्त ते आपके (शर्म) = शरण को (उप अगन्म) = समीपता से इस प्रकार प्राप्त हों, (इव) = जैसे कि गर्मी से पीड़ित मनुष्य (छायाम्) = छाया को प्राप्त होते हैं। [२] प्रभु की उपासना हमारे लिये इसी प्रकार शान्ति को देनेवाली हो, जैसे कि गर्मी से पीड़ित पुरुष को वृक्ष की छाया शान्ति को देनेवाली होती है। उपासना का सर्वमहान् लाभ यह व्याकुलता का न होना ही है।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु की शरण क्लेश सन्तप्त पुरुषों के लिये शान्ति को देनेवाली होती है।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्यैः किं प्राप्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

हे अग्ने ! ते तव घृणेश्छायामिव शर्म हिरण्यसन्दृशो वयमुपाऽगन्म ॥३८॥

Word-Meaning: - (उप) (छायामिव) (घृणेः) प्रदीप्तात्सूर्य्यात् (अगन्म) प्राप्नुयाम (शर्म) गृहम् (ते) तव (वयम्) (अग्ने) विद्वन् (हिरण्यसन्दृशः) हिरण्यं तेज इव सन्दृक् समानं दर्शनं येषान्ते ॥३८॥
Connotation: - अत्रोपमालङ्कारः। हे विद्वन् ! वयं सर्वर्त्तुकं सूर्य्यमिव प्रकाशमानं तव गृहं प्राप्य छायामिव सेवेमहि ॥३८॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, lord of bliss and eternal protection, just as a person runs to the shade for relief from the blazing sun, so may we, shining as pure gold, rise and come to your presence, the blissful shade of divinity, our ultimate haven and home.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should men attain is told.

Anvay:

O enlightened person! you are shining with knowledge like the fire, you being endowed with splendor or glittering like gold, we come to your home for shelter as we come to the shade to escape heat of the sun.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O highly learned person! we come to your home, as from the heat of the sun to the shade, as your home is suitable and pleasant in all seasons.
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात उपमालंकार आहे. हे विद्वाना! आम्ही सर्व ऋतूत प्रकाशमान असलेल्या सूर्याच्या तुझे घर सावलीप्रमाणे समजावे. ॥ ३८ ॥