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स हि विश्वाति॒ पार्थि॑वा र॒यिं दाश॑न्महित्व॒ना। व॒न्वन्नवा॑तो॒ अस्तृ॑तः ॥२०॥

English Transliteration

sa hi viśvāti pārthivā rayiṁ dāśan mahitvanā | vanvann avāto astṛtaḥ ||

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Pad Path

सः। हि। विश्वा॑। अति॑। पार्थि॑वा। र॒यिम्। दाश॑त्। म॒हि॒ऽत्व॒ना। व॒न्वन्। अवा॑तः। अस्तृ॑तः ॥२०॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:16» Mantra:20 | Ashtak:4» Adhyay:5» Varga:24» Mantra:5 | Mandal:6» Anuvak:2» Mantra:20


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! जो (अस्तृतः) नहीं हिंसित (अवातः) पवन से वर्जित (महित्वना) महत्त्व से (वन्वन्) सेवन करता हुआ अग्नि (विश्वा) सम्पूर्ण (पार्थिवा) पृथिवी में विदित वस्तुओं और (रयिम्) धन को (अति, दाशत्) अत्यन्त देता है (सः, हि) वह सब लोगों से जानने योग्य है ॥२० ॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जो अग्नि बहुत सुख को देता है, उसका क्यों नहीं सेवन किया जावे ॥२० ॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

धन प्राप्ति व वासना विनाश

Word-Meaning: - [१] (सः) = वे प्रभु (हि) = निश्चय से (विश्वा) = सब (पार्थिवा) = इस पृथिवी सम्बन्धी (रयिम्) = धनों को (अतिदाशत्) = अतिशयेन दें, पार्थिव धनों को वे प्रभु हमें जीवनयात्रा की पूर्ति के लिये प्राप्त कराएँ । [२] ये प्रभु (महित्वना) = अपनी महिमा से (वन्वन्) = हमारे शत्रुओं का हिंसन करें। प्रभु कृपा से मैं (अवातः) = शत्रुओं से अनाक्रान्त होऊँ और (अस्तृतः) = अहिंसित होऊँ । शत्रुओं से अनाक्रान्त हुआ-हुआ ही तो मैं जीवनयात्रा में आगे बढ़ सकूँगा ।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु हमें जीवनयात्रा के लिए आवश्यक धनों को प्राप्त कराएँ और हमारे काम है। क्रोध आदि शत्रुओं का हिंसन करें जिससे जीवनयात्रा ठीक से पूर्ण हो सके।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे मनुष्या ! योऽस्तृतोऽवातो महित्वना वन्वन्नग्निर्विश्वा पार्थिवा रयिमति दाशत्स हि सर्वैर्वेदितव्योऽस्ति ॥२० ॥

Word-Meaning: - (सः) (हि) (विश्वा) सर्वाणि (अति) (पार्थिवा) पृथिव्यां विदितानि वस्तूनि (रयिम्) धनम् (दाशत्) (महित्वना) महत्त्वेन (वन्वन्) सम्भजन् (अवातः) वायुवर्जितः (अस्तृतः) अहिंसितः ॥२० ॥
Connotation: - हे मनुष्या ! योऽग्निर्बहु सुखं ददाति सः कथन्न सेव्येत ॥२० ॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - That Agni, light of the world, all loving, destroying all evil, unassailable, unshaken, bestows upon us all the wealth, honour and excellence of the world solely by his greatness and power.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The character of Agni is further developed.

Anvay:

The fire without wind and un- assailed bestows all earthly (material) riches by its greatness when utilized properly.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O men! why should not you serve or utilize that Agni (fire or electricity) which gives much happiness?
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे माणसांनो ! जो अग्नी अत्यंत सुख देतो त्याचा स्वीकार का केला जाऊ नये? ॥ २० ॥