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ता वृ॒धन्ता॒वनु॒ द्यून्मर्ता॑य दे॒वाव॒दभा॑। अर्ह॑न्ता चित्पु॒रो द॒धेंऽशे॑व दे॒वावर्व॑ते ॥५॥

English Transliteration

tā vṛdhantāv anu dyūn martāya devāv adabhā | arhantā cit puro dadhe ṁśeva devāv arvate ||

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Pad Path

ता। वृ॒धन्तौ॑। अनु॑। द्यून्। मर्ता॑य। दे॒वौ। अ॒दभा॑। अर्ह॑न्ता। चि॒त्। पु॒रः। द॒धे॒। अंशा॑ऽइव। दे॒वौ। अर्व॑ते ॥५॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:86» Mantra:5 | Ashtak:4» Adhyay:4» Varga:32» Mantra:5 | Mandal:5» Anuvak:6» Mantra:5


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! जो (अंशेव) भाग के सदृश सत्कार करने योग्य (मर्त्ताय) मनुष्य के लिये (अनु, द्यून्) प्रतिदिन (वृधन्तौ) बढ़ते वा बढ़ाते हुए (अदभा) नहीं हिंसा करनेवाले (अर्हन्ता) आदर करने योग्य (देवौ) देनेवाले को मैं (पुरः) आगे (दधे) धारण करता हूँ और जो (देवौ) प्रकाशमान दोनों (चित्) भी (अर्वते) विज्ञान के लिये वर्त्तमान हैं (ता) उन दोनों का आप लोग सत्कार करें ॥५॥
Connotation: - जो मनुष्य दिनरात्रि मनुष्यों के हित के लिये प्रयत्न करते हैं, वे ही सब से आदर करने योग्य हैं ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अदभा-अर्हन्ता-अंशा इव

Word-Meaning: - [१] (ता) = वे दोनों (देवौ) = जीवन को दिव्यता प्राप्त करानेवाले इन्द्र और अग्नि - बल व प्रकाश के देव, (अनुद्यून्) = प्रतिदिन (वृधन्तौ) = वृद्धि को प्राप्त करते हुए (मर्ताय) = मनुष्य के लिये (अदभा) = न हिंसित होने देनेवाले हैं। इन्द्र यदि उसे रोगों से आक्रान्त नहीं होने देता तो अग्नि उसकी सब वासनाओं को भस्म कर देता है। [२] (अर्हन्ता चित्) = जो सचमुच पूजा के योग्य हैं उन इन्द्र और अग्नि को मैं (पुरः दधे) = सदा अपने सामने रखता हूँ। मेरे जीवन का लक्ष्य इन्द्र व अग्नि का आराधन होता है। ये (देवौ) = इन्द्र और अग्नि, बल व प्रकाश के देव (अर्वते) = [अर्व् to kill] शत्रुसंहार करनेवाले पुरुष के लिये (अंशौ इव) = दो कन्धों [shoulder] के समान हैं। जैसे कन्धे भार का वहन करते हैं, उसी प्रकार इसके जीवन के भार को इन्द्र और अग्नि वहन करनेवाले होते हैं । ज्ञानेन्द्रियों में 'अग्नि' देव काम करता है, तो कर्मेन्द्रियों में 'इन्द्र' देव । इस प्रकार इसकी जीवनयात्रा बड़ी उत्तमता से पूर्ण होती है।
Connotation: - भावार्थ - बल व प्रकाश हमें हिंसित नहीं होने देते। ये पूजा के योग्य हैं। जीवन के भार का वहन करनेवाले हैं ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे मनुष्या ! यावंशेव सत्कर्त्तव्यौ मर्त्तायाऽनु द्यून् वृधन्तावदभाऽर्हन्ता देवावहं पुरो दधे यौ देवौ चिदर्वते वर्त्तेते ता यूयं सत्कुरुत ॥५॥

Word-Meaning: - (ता) तौ (वृधन्तौ) वर्धमानौ वर्धयन्तौ वा (अनु) (द्यून्) दिनान्यनु (मर्त्ताय) मनुष्याय (देवौ) दातारौ (अदभा) अहिंसकौ (अर्हन्ता) पूज्यौ (चित्) (पुरः) (दधे) (अंशेव) भागमिव (देवौ) देदीप्यमानौ (अर्वते) विज्ञानाय ॥५॥
Connotation: - ये मनुष्या अहर्निशं मनुष्यहिताय प्रयतन्ते त एव सर्वैः पूज्या वर्त्तन्ते ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Exalted, thriving day by day for the sake of mortal humanity, brilliant, indomitable, adorable and generous Indra and Agni, ruling powers and enlightened scholars, we honour you at the head of our creative and developmental yajna like the soma of success and celebration in matters of science and progress.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The duties of the scholars are further dealt.

Anvay:

O men ! you should honor the twins- teachers and preachers like two partners. They help a man to grow or increase his power. They are non-violent and worthy of respect, liberal doners and shining on account of their virtues. I place them before me as ideal personages. They also try to acquire knowledge and spread it far and wide.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Those men only are venerable, who endeavor day and night for the we fire of mankind.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जी माणसे रात्रंदिवस माणसांच्या हितासाठी प्रयत्न करतात ती सर्वत्र पूज्य ठरतात. ॥ ५ ॥