Go To Mantra
Viewed 418 times

स्तोमा॑सस्त्वा विचारिणि॒ प्रति॑ ष्टोभन्त्य॒क्तुभिः॑। प्र या वाजं॒ न हेष॑न्तं पे॒रुमस्य॑स्यर्जुनि ॥२॥

English Transliteration

stomāsas tvā vicāriṇi prati ṣṭobhanty aktubhiḥ | pra yā vājaṁ na heṣantam perum asyasy arjuni ||

Mantra Audio
Pad Path

स्तोमा॑सः। त्वा॒। वि॒ऽचा॒रि॒णि॒। प्रति॑। स्तो॒भ॒न्ति॒। अ॒क्तु॒ऽभिः॑। प्र। या। वाज॑म्। न। हेष॑न्तम्। पे॒रुम्। अस्य॑सि। अ॒र्जु॒नि॒ ॥२॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:84» Mantra:2 | Ashtak:4» Adhyay:4» Varga:29» Mantra:2 | Mandal:5» Anuvak:6» Mantra:2


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर स्त्री कैसी हो, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (अर्जुनि) उषा के समान वर्त्तमान (विचारिणि) विचार करनेवाली स्त्री ! (या) जो तू (वाजम्) वेग के (न) समान (हेषन्तम्) शब्द करते हुए (पेरुम्) पूर्ण करनेवाले को (प्र, अस्यसि) फेंकती है उस (त्वा) तेरी (स्तोमासः) स्तुति करनेवाले जन (अक्तुभिः) रात्रियों से (प्रति, स्तोभन्ति) सब प्रकार स्तुति करते हैं ॥२॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। जैसे विद्वान् जन स्तुति करने योग्य जनों की स्तुति करते हैं, वैसे ही विद्यायुक्त स्त्री प्रशंसा करने योग्य की प्रशंसा करती है ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

पेरु-प्रासन

Word-Meaning: - [१] विविध पिण्डों व पक्षियों का संचरण स्थान होने से अन्तरिक्ष 'विचारिणी' कहलाता है । हे विचारिणि विविध पिण्डों की संचरण स्थानभूत अन्तरिक्ष देवते! (स्तोमासः) = [स्तोतार: सा०] तेरे गुण-धर्मों का स्तवन करनेवाले लोग (अक्तुभिः) = [light, darkness] कभी प्रकाशों व कभी अन्धकारों के होने से (त्वा) = तुझे (प्रतिष्टोभन्ति) = प्रतिदिन स्तुत करते हैं। अन्तरिक्ष कभी तो मेघों के अन्धकारवाला होता है और कभी मेघशून्य व प्रकाशमय प्रतीत होता है। [२] हे (अर्जुनि) = अपने अन्दर मेघों का अर्जन करनेवाली अन्तरिक्ष देवि ! तू वह है (या) = जो (हेबन्तं वाजम् न) = शब्द करते हुए उच्छंखल अश्व के समान (पेरुम्) = इस पालक मेघ को (प्रास्यसि) = वृष्टिरूप में नीचे फेंकनेवाली होती है। 'अर्जुनि' शब्द का अर्थ सायण 'गमनशीले' यह करते हैं। इस अन्तरिक्ष में मेघ इधर-उधर घूम रहे हैं। इन मेघों को वह अन्तरिक्ष भिन्न-भिन्न स्थानों पर फेंकनेवाला, बरसानेवाला होता है ।
Connotation: - भावार्थ- यह अन्तरिक्ष सब पिण्डों व मेघों का गति-स्थान बना हुआ है। यह अन्तरिक्ष ही मानो इन गर्जते हुए मेघों को उस उस स्थान पर वृष्टि करता है।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनः स्त्री कीदृशी भवेदित्याह ॥

Anvay:

हे अर्जुनि विचारिणि ! या त्वं वाजं न हेषन्तं पेरुं प्राऽस्यसि तां त्वा स्तोमासोऽक्तुभिः प्रति ष्टोभन्ति ॥२॥

Word-Meaning: - (स्तोमासः) स्तुतिकर्त्तारः (त्वा) त्वाम् (विचारिणि) विचारितुं शीलं यस्यास्तत्सम्बुद्धौ (प्रति) (स्तोभन्ति) स्तुवन्ति (अक्तुभिः) रात्रिभिः (प्र) (या) (वाजम्) वेगम् (न) इव (हेषन्तम्) शब्दं कुर्वन्तम् (पेरुम्) पूरकम् (अस्यसि) प्रक्षिपसि (अर्जुनि) उषर्वद्वर्त्तमाने ॥२॥
Connotation: - अत्रोपमावाचकलुप्तोपमालङ्कारौ । यथा विद्वांसः स्तुत्यान् स्तुवन्ति तथैव विदुषी स्त्री प्रशंसनीयं प्रशंसति ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O moving one, the celebrants adore you day and night with songs, you, O bright one, who shake and impel the roaring cloud like a war horse onward to victory.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The character of an ideal lady is told.

Anvay:

O thoughtful and beautiful lady ! like the dawn, admirers and praises you on account of virtues like the mighty-peaceful disposition etc., you throw away an impetuous evil thought that fills the heart with grief and misery which is like neighing horse.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - As the enlightened persons praise only the really admirable, likewise a highly educated lady praises only him who is truly praiseworthy.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात उपमा व वाचकलुप्तोपमालंकार आहेत. जसे विद्वान लोक स्तुती करण्यायोग्य लोकांची स्तुती करतात. तसेच विदुषी स्त्री प्रशंसा करण्यायोग्याची प्रशंसा करते. ॥ २ ॥