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उ॒ग्रो वां॑ ककु॒हो य॒यिः शृ॒ण्वे यामे॑षु संत॒निः। यद्वां॒ दंसो॑भिरश्वि॒नात्रि॑र्नराव॒वर्त॑ति ॥७॥

English Transliteration

ugro vāṁ kakuho yayiḥ śṛṇve yāmeṣu saṁtaniḥ | yad vāṁ daṁsobhir aśvinātrir narāvavartati ||

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Pad Path

उ॒ग्रः। वा॒म्। क॒कु॒हः। य॒यिः। शृ॒ण्वे। यामे॑षु। स॒म्ऽत॒निः। यत्। वा॒म्। दंसः॑ऽभिः। अ॒श्वि॒ना॒। अत्रिः॑। न॒रा॒। आ॒ऽव॒वर्त॑ति ॥७॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:73» Mantra:7 | Ashtak:4» Adhyay:4» Varga:12» Mantra:2 | Mandal:5» Anuvak:6» Mantra:7


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (नरा) नायक (अश्विना) अध्यापक और उपदेशक जनो ! (यत्) जो (ययिः) चलनेवाला (ककुहः) बड़ा (उग्रः) तेजस्वी (सन्तनिः) उत्तम प्रकार विस्तारकर्त्ता मैं (यामेषु) प्रहरों में (वाम्) आप दोनों को (शृण्वे) सुनूँ और जो (वाम्) आप दोनों के (दंसोभिः) कर्म्मों से (अत्रिः) न तीन वार (आववर्त्तति) अत्यन्त वर्त्तमान हैं, उन हम दोनों को आप दोनों बोध कराइये ॥७॥
Connotation: - जो मनुष्य सूर्य्य और चन्द्रमा के सदृश नियम से वर्त्ताव करके कार्य्यों को सिद्ध करते हैं, वे सर्वदा उन्नत होते हैं ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

तेजस्विता-उन्नति व गतिशीलता

Word-Meaning: - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो ! (वाम्) = आप दोनों का (सन्तनि:) = शक्तियों के विस्तारवाला यह रथ (यामेषु) = जीवन-यात्रा के मार्गों में (उग्रः) = तेजस्वी (ककुहः) = उन्नत [शिखर स्थित] (ययिः) = निरन्तर गतिवाला (शृण्वे) = सुन पड़ता है। अर्थात् प्राणापान हमें तेजस्वी उन्नत व गतिशील बनाते हैं । [२] हे (नरा) = हमें उन्नतिपथ पर ले चलनेवाले प्राणापानो! (यद्) = जब (अत्रिः) = काम-क्रोध-लोभ से ऊपर उठनेवाला व्यक्ति (दंसोभिः) = उत्तम कर्मों के हेतु से (वाम्) = आपको (आववर्तति) = पुन: पुन: आवृत्त करता है, अर्थात् दीर्घ श्वासोच्छ्वास द्वारा आपके आवर्तन को करता है, दीर्घश्वास प्रश्वास होने से शोधन होता है। यह शोधन हमारे कर्मों की पवित्रता का कारण बनता है और हमें उन्नत करता से है।
Connotation: - भावार्थ– प्राणसाधना हमें तेजस्वी उन्नत व गतिशील बनाती है ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे नराश्विना ! यद्यो ययिः ककुह उग्रः सन्तनिरहं यामेषु वां शृण्वे यश्च वां दंसोभिरत्रिराववर्त्तति ता आवां युवां बोधयतम् ॥७॥

Word-Meaning: - (उग्रः) तेजस्वी (वाम्) युवाम् (ककुहः) महान् (ययिः) यो याति सः (शृण्वे) (यामेषु) प्रहरेषु (सन्तनिः) सम्यक् विस्तारकः (यत्) यः (वाम्) युवयोः (दंसोभिः) कर्म्मभिः (अश्विना) अध्यापकोपदेशकौ (अत्रिः) अत्रिवारम् (नरा) नेतारौ (आववर्तति) भृशं वर्त्तते ॥७॥
Connotation: - ये मनुष्या सूर्य्यचन्द्रवन्नियमेन वर्त्तित्वा कार्य्याणि साध्नुवन्ति ते सर्वदोन्नता जायन्ते ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, leading lights and path finders of humanity, the mighty rumble of your advance expanding in all directions is heard at every stage of your movements when Atri, the celebrant sage of threefold freedom turns his attention to you by virtue of your noble actions.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The enlightened men's duties are stated,

Anvay:

O leading teachers and preachers ! you are like the sun and the moon. I who am active, endowed by God's grace with great virtues, full of splendour, propagator of truth and education, hear ( listen. Ed.) your praise from time to time, and he who follows you by his actions many times (repeatedly. Ed.), not confined to three, you give teaching to both of us.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Those men who accomplish their works by acting like the sun and the moon, become always advanced or make satisfactory progress.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जी माणसे सूर्य व चंद्राप्रमाणे नियमाने वागून कार्य पूर्ण करतात. ती सदैव उन्नत होतात. ॥ ७ ॥