Go To Mantra
Viewed 386 times

क्व१॒॑ वोऽश्वाः॒ क्वा॒३॒॑भीश॑वः क॒थं शे॑क क॒था य॑य। पृ॒ष्ठे सदो॑ न॒सोर्यमः॑ ॥२॥

English Transliteration

kva vo śvāḥ kvābhīśavaḥ kathaṁ śeka kathā yaya | pṛṣṭhe sado nasor yamaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

क्व॑। वः॒। अश्वाः॑। क्व॑। अ॒भीश॑वः। क॒थम्। शे॒क॒। क॒था। य॒य॒। पृ॒ष्ठे। सदः॑। न॒सोः। यमः॑ ॥२॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:61» Mantra:2 | Ashtak:4» Adhyay:3» Varga:26» Mantra:2 | Mandal:5» Anuvak:5» Mantra:2


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! (वः) आप लोगों के (क्व) कहाँ (अश्वाः) शीघ्र चलनेवाले घोड़े और (क्व) कहाँ (अभीशवः) अङ्गुलियाँ हैं, उनको आप लोग (कथम्) किस प्रकार (शेक) शीघ्र पहुँचनेवाले हूजिये और (कथा) किस प्रकार से (यय) जाइये और जैसे (नसोः) नासिकाओं के (पृष्ठे) पीछे के भाग में (सदः) छेदन करने योग्य वस्तु का (यमः) नियन्ता है, वैसे आप लोग हूजिये ॥२॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । जब कोई विद्वानों को पूछे तब वे उत्तर दें और पक्षपात को छोड़कर न्यायाधीशों के सदृश होवें, तब सम्पूर्ण बोध को प्राप्त होवें ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'सर्वाधार' प्राण

Word-Meaning: - [१] हे प्राणो ! (क्व) = कहाँ (वः) = आपके (अश्वा:) = अश्व हैं, (क्वः अभीशवः) = कहाँ लगाये हैं ? (कथं शेक) = किस प्रकार आप शक्तिशाली बनते हो, उस उस कार्य को करने में समर्थ होते हो ! (कथा यय) = किस प्रकार गति करते हो। यह सब ही रहस्यमय ही है। प्राणों के कार्यक्रम को पूरा-पूरा समझ सकना सम्भव नहीं। [२] हमें सामान्यतः इनके विषय में इतना ही पता है कि (पृष्ठे सदः) = प्रत्येक इन्द्रिय के कार्य के मूल में इनका अधिष्ठान है। प्राणों के आधार से ही सब कार्य चलते हैं। और (नसोः यमः) = नासिका छिद्रों में आपका नियमन होता है। जिस समय नासिका के दक्षिण छिद्र में आपकी गति होती है तो अग्नितत्त्व का वर्धन होता है, वामछिद्र में गति होने पर जलतत्त्व का विकास दिखता है। एवं अग्नि व जल दोनों तत्त्वों का ठीक-ठीक नियमन करते हुए ये प्राण हमारे जीवन को सुन्दर बनाते हैं। ये दायें-बायें छिद्र ही योग में सूर्यस्वर व चन्द्रस्वर कहलाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्राणों का कार्यक्रम रहस्यमय है। हम इतना ही जानते हैं कि सब कार्यों के मूल में यह प्राणशक्ति है और नासिका छिद्रों में इनका नियमन कार्य चलता है।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे मनुष्या ! वः क्वाश्वाः क्वाभीशवः सन्ति तान् यूयं कथं शेक कथा यय। यथा नसोः पृष्ठे सदो यमोऽस्ति तथा यूयं भवत ॥२॥

Word-Meaning: - (क्व) कस्मिन् (वः) युष्माकम् (अश्वाः) आशुगामिनः (क्व) (अभीशवः) अङ्गुलय इव। अभीशव इत्यङ्गुलिनामसु पठितम्। (निघं०२.५) (कथम्) (शेक) सद्योगामिनो भवत (कथा) केन प्रकारेण (यय) गच्छत (पृष्ठे) पश्चाद्भागे (सदः) छेद्यं वस्तु (नसोः) नासिकयोः (यमः) नियन्ता ॥२॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः । यदा कश्चित् विदुषः पृच्छेत्तदा त उत्तरं दद्युः पक्षपातञ्च विहाय न्यायाधीशा इव भवेयुस्तदा समग्रं बोधमाप्नुयुः ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Where are your horses? Where the reins? What is your power and potential? How do you move? Where is the saddle on the horse back? Where is the bridle that controls the direction by the nose?

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The attributes of Maruts are stated.

Anvay:

O thoughtful men ! where are your horses? Where is your finger? How do you come quickly? The seat is on the back of the horse and the reins in the nostrils of the horses ?

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Whenever a man puts questions to the enlightened persons, they should answer him properly. If they are impartial like the dispensers of justice, then they can acquire all knowledge.
Footnote: अभशवः इत्यङ्गुलिनाम (NG 2,5); is also अभीशवः इति रश्मिनाम (NG 2, 5 ) बद्लु -बिशरणगत्यवसादनेषु (भ्वा० ) अत्र विधारणार्थमादाय व्याख्या = Bridles Reins.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जेव्हा विद्वानांना प्रश्न विचारला जातो तेव्हा त्यांनी उत्तर द्यावे. पक्षपात न करता न्यायाधीशाप्रमाणे वागल्यास संपूर्ण बोध होतो. ॥ २ ॥