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यु॒ष्माकं॑ स्मा॒ रथाँ॒ अनु॑ मु॒दे द॑धे मरुतो जीरदानवः। वृ॒ष्टी द्यावो॑ य॒तीरि॑व ॥५॥

English Transliteration

yuṣmākaṁ smā rathām̐ anu mude dadhe maruto jīradānavaḥ | vṛṣṭī dyāvo yatīr iva ||

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Pad Path

यु॒ष्माक॑म्। स्म॒। रथा॑न्। अनु॑। मु॒दे। द॒धे॒। म॒रु॒तः॒। जी॒र॒ऽदा॒न॒वः॒। वृ॒ष्टी। द्यावः॑। य॒तीःऽइ॑व ॥५॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:53» Mantra:5 | Ashtak:4» Adhyay:3» Varga:11» Mantra:5 | Mandal:5» Anuvak:4» Mantra:5


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (जीरदानवः) जीवते हुए (मरुतः) मनुष्यो ! मैं (युष्माकम्) आप लागों के (मुदे) आनन्द के लिये (रथान्) विमान आदि यानों को (दधे) धारण करता हूँ और (वृष्टी) वर्षाओं तथा (द्यावः) प्रकाशों को (यतीरिव) प्रयत्न से सिद्ध होनेवाली क्रियाओं के समान (स्मा) ही (अनु) पीछे आनन्द के लिये धारण करता हूँ ॥५॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जैसे मैं अभ्यास से विद्या के प्रकाशों को यज्ञ से वृष्टि को धारण करता हूँ, वैसे आप लोग भी इनको धारण कीजिये ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मरुतः जीरदानवः

Word-Meaning: - [१] हे (जीरदानवः) = उत्तम जीवन का प्रदान करनेवाले प्राणो ! (मुदे) = आनन्द प्राप्ति के लिये (युष्माकम्) = तुम्हारे (रथान्) = शरीर-रथों को (अनुदधे स्म) = अनुकूलता से धारण करता हूँ। [२] उन प्राणों को मैं धारण करता हूँ जो (वृष्टी) [वृष्ट्यां] = वृष्टि के होने के समय (यतीः द्यावः इव) = गतिशील ज्योतियों के समान हैं। वस्तुतः प्राणसाधन के होने पर आनन्द की वृष्टि होती है और साथ ही ज्ञानदीप्ति का प्रसार होता है।
Connotation: - भावार्थ- प्राण हमें जीवन देते हैं। प्राणसाधनावाला शरीर रथ हमारे आनन्द के लिये होता है । आनन्द की वृष्टि में वे प्राण ज्ञानदीप्ति का संचार करते हैं ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्यैः कि कर्त्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

हे जीरदानवो मरुतोऽहं युष्माकं मुदे रथान् दधे वृष्टी द्यावो यतीरिव स्माऽनु मुदे दधे ॥५॥

Word-Meaning: - (युष्माकम्) (स्मा) एव। अत्र निपातस्य चेति दीर्घः। (रथान्) विमानादियानान् (अनु) (मुदे) हर्षाय (दधे) दधामि (मरुतः) मनुष्याः (जीरदानवः) जीवन्ति ते (वृष्टी) वर्षाः (द्यावः) प्रकाशान् (यतीरिव) प्रयत्नसाध्या क्रिया इव ॥५॥
Connotation: - हे मनुष्या ! यथाहमभ्यासेन विद्याप्रकाशं यज्ञेन वृष्टिमनु दधे तथा यूयमप्येतान् धत्त ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Maruts, leading lights and unaging pioneers, I take to your chariots for your pleasure and exhilaration and rise to the clouds of shower and lights of heaven.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The men's duties are stated.

Anvay:

O thought men of good life ! for your delight I uphold vehicles like the aeroplanes, good rains (through Yajnas) and lightful of knowledge and like the acts which are to be accomplished with hard labour.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O men ! as I uphold with due practice the light of knowledge and rains through the Yajnas, so you should also do.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे माणसांनो! जसा मी अभ्यासाने विद्येद्वारे यज्ञाने वृष्टीचा स्वीकार करतो तसे तुम्ही करा. ॥ ५ ॥