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शर्धो॒ मारु॑त॒मुच्छं॑स स॒त्यश॑वस॒मृभ्व॑सम्। उ॒त स्म॒ ते शु॒भे नरः॒ प्र स्य॒न्द्रा यु॑जत॒ त्मना॑ ॥८॥

English Transliteration

śardho mārutam uc chaṁsa satyaśavasam ṛbhvasam | uta sma te śubhe naraḥ pra syandrā yujata tmanā ||

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Pad Path

शर्धः॑। मारु॑तम्। उत्। शं॒स॒। स॒त्यऽश॑वसम्। ऋभ्व॑सम्। उ॒त। स्म॒। ते। शु॒भे। नरः॑। प्र। स्य॒न्द्राः। यु॒ज॒त॒। त्मना॑ ॥८॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:52» Mantra:8 | Ashtak:4» Adhyay:3» Varga:9» Mantra:3 | Mandal:5» Anuvak:4» Mantra:8


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर विद्वान् क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे विद्वन् ! आप (मारुतम्) मनुष्यों के सम्बन्धी इस (शर्धः) बल और (सत्यशवसम्) सत्य बल जिसका उस (ऋभ्वसम्) बुद्धिमान् को ग्रहण करनेवाले की (उत्, शंस) अच्छे प्रकार स्तुति करो (उत) और (स्म) निश्चित (ते) वे (स्यन्द्राः) धीरतायुक्त गमनवाले (नरः) नायक आप लोग (शुभे) उत्तम कार्य में (त्मना) आत्मा से परमात्मा को (प्र, युजत) प्रयुक्त करो ॥८॥
Connotation: - मनुष्यों को चाहिये कि उत्तम बल और परमात्मा की निरन्तर प्रशंसा करें ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'सत्यशवस्' मरुद्गण

Word-Meaning: - [१] हे मनुष्य! तू (मारुतम्) = प्राणसम्बन्धी (शर्ध:) = बल का (उत् शंस) = उत्कर्षेण शंसन कर | यह प्राणों का बल (सत्यशवसम्) = सत्य के बलवाला है, मनों में सत्य का संचार करता है। प्राणसाधक असत्य नहीं बोलता । (ऋभ्वसम्) = यह बल महान् है अथवा ऋत से दीप्त होता है । यह प्राणसाधक ऋतमय जीवनवाला होता है । [२] (उत) = और (ते) = वे (स्पन्द्राः) = शरीर में सूक्ष्म गतिवाले प्राण (शुभे) = शुभ कार्यों में (स्म) = निश्य से (प्र युजत) = प्रकर्षण युक्त करते हैं और अन्ततः (त्मना) = आत्मा से हमारा योग करानेवाले होते हैं। 'शुभ्' शब्द का अर्थ 'दीप्ति, आनन्द व रेतः कणरूप जल' भी है। ये प्राण 'ज्ञानदीप्ति, नीरोगता के आनन्द व उर्ध्वरेतस्कता' को भी प्राप्त कराते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्राणों का बल हमें सत्यवादी व महान् बनाता है। ये प्रवण 'ज्ञानदीप्ति, आनन्द व ऊर्ध्वरेतस्कता' को प्राप्त कराके हमें प्रभु सम्पर्क को प्राप्त कराते हैं।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्विद्वान् किं कुर्यादित्याह ॥

Anvay:

हे विद्वँस्त्व मारुतं शर्धः सत्यशवसमृभ्वसमुच्छंस। उत स्म ते स्यन्द्रा नरो यूयं शुभे त्मना परमात्मानं प्र युजत ॥८॥

Word-Meaning: - (शर्धः) बलम् (मारुतम्) मनुष्याणामिदम् (उत्) (शंस) स्तुहि (सत्यशवसम्) सत्यं शवो बलं यस्य (ऋभ्वसम्) ऋभुं मेधाविनमसते गृह्णाति तम्। ऋभुरिति मेधाविनामसु पठितम्। (निघं०३.१५) अस गत्यादिः। (उत) (स्म) (ते) (शुभे) (नरः) नेतारो मनुष्याः (प्र) (स्यन्द्राः) धैर्य्यगतयः (युजत) (त्मना) आत्मना ॥८॥
Connotation: - मनुष्यैरुत्तमं बलं परमात्मा च सततं प्रशंसनीयाः ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Honour and celebrate the strength and courage of humanity, admire and value the honest wisdom and rectitude of the scientist and the expert. O leading lights and brave pioneers of the human nation, moving forward with steadiness and dignity, join the onward march of humanity for a noble divine purpose. Join it conscientiously, honestly, without reservation.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should a learned men do is told further.

Anvay:

O learned person ! praise the strength of thoughtful men who are endowed with truth strength or whose strength is truth. They who accept as guides very wise men. leading men of persevering movement! unite yourselves with God for your welfare.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Men should always admire good strength and God the Almighty.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - माणसांनी उत्तम बल प्राप्त करून परमेश्वराची निरंतर प्रशंसा करावी. ॥ ८ ॥