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वाय॒वा या॑हि वी॒तये॑ जुषा॒णो ह॒व्यदा॑तये। पिबा॑ सु॒तस्यान्ध॑सो अ॒भि प्रयः॑ ॥५॥

English Transliteration

vāyav ā yāhi vītaye juṣāṇo havyadātaye | pibā sutasyāndhaso abhi prayaḥ ||

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Pad Path

वायो॒ इति॑। आ। या॒हि॒। वी॒तये॑। जु॒षा॒णः। ह॒व्यऽदा॑तये। पिब॑। सु॒तस्य॑। अन्ध॑सः। अ॒भि। प्रयः॑ ॥५॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:51» Mantra:5 | Ashtak:4» Adhyay:3» Varga:5» Mantra:5 | Mandal:5» Anuvak:4» Mantra:5


SWAMI DAYANAND SARSWATI

मनुष्यों को क्या भोजन करना और क्या पीना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (वायो) अत्यन्त बल से युक्त ! आप (हव्यदातये) देने योग्य वस्तु के देने के लिये और (वीतये) विज्ञान आदि की प्राप्ति के लिये (अभि, प्रयः) सब ओर से सुन्दर जल का (जुषाणः) सेवन करते हुए (आ, याहि) प्राप्त हूजिये और (सुतस्य) उत्पन्न हुए (अन्धसः) अन्न के रस का (पिबा) पान करिये ॥५॥
Connotation: - हे विद्वन् ! आप रोग और प्रमाद के नाश करने और बुद्धि के बढ़ानेवाले अन्न को खाइये और रस को पीजिये ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

आनन्द की ओर

Word-Meaning: - [१] प्रभु कहते हैं कि - (वायो) = हे क्रियाशील जीव! तू (वीतये) = [वी-असने] अन्धकार को परे फेंकने के लिये (आयाहि) = हमारे समीप प्राप्त हो। यह उपासना तेरे अज्ञानान्धकार को विनष्ट करेगी । [२] (जुषाण:) = प्रीतिपूर्वक अपने कर्त्तव्यकर्मों का सेवन करता हुआ तू हव्यदातये उत्तम पदार्थों के दान के लिये हो । [३] (सुतस्य) = उत्पन्न हुए-हुए (अन्धसा) = इस सोम का तू (पिबा) = पान करनेवाला बन, सोम को अपने अन्दर सुरक्षित कर और (प्रयः अभि) = [delight] आनन्द की ओर गतिवाला हो ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु उपासना से ही अन्धकार नष्ट होता है। प्रीतिपूर्वक कर्मों को करते हुए हम सदा दानशील हों। भोगवृत्ति से ऊपर उठकर सोम का पान करें, यही आनन्द प्राप्ति का मार्ग है ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

मनुष्यैः किं भोक्तव्यं पेयं चेत्युपदिश्यते ॥

Anvay:

हे वायो ! त्वं हव्यदातये वीतयेऽभि प्रयो जुषाण आ याहि सुतस्यान्धसः पिबा ॥५॥

Word-Meaning: - (वायो) परमबलयुक्त (आ) (याहि) आगच्छ (वीतये) विज्ञानादिप्राप्तये (जुषाणः) सेवमानः (हव्यदातये) दातव्यदानाय (पिबा) अत्र द्व्यचोऽतस्तिङ इति दीर्घः। (सुतस्य) निष्पन्नस्य (अन्धसः) अन्नस्य रसान् (अभि) (प्रयः) कमनीयं जलम् ॥५॥
Connotation: - हे विद्वंस्त्वं रोगप्रमादनाशकं बुद्धिवर्द्धकमन्नं भुङ्क्ष्व रसं पिब ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Vayu, force and power of the nation, come for the delight of a drink of the soma of knowledge and enlightenment with love and joy for the self sacrificing people. Enjoy the flavour of the food and stimulating taste of the drink on the tongue.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should men eat and drink is told.

Anvay:

O very powerful person ! come here for giving in charity what is worth giving and for the attainment of knowledge, along with drinking the desirable good water and take the juice of the food grains.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O learned person ! eat food which improves intellectual power and destroys diseases and sloth. Drink good juice.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे विद्वानांनो! तुम्ही रोगनाशक व प्रमादनाशक तसेच बुद्धिवर्धक अन्न खा व रस प्या. ॥ ५ ॥