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कदु॑ प्रि॒याय॒ धाम्ने॑ मनामहे॒ स्वक्ष॑त्राय॒ स्वय॑शसे म॒हे व॒यम्। आ॒मे॒न्यस्य॒ रज॑सो॒ यद॒भ्र आँ अ॒पो वृ॑णा॒ना वि॑त॒नोति॑ मा॒यिनी॑ ॥१॥

English Transliteration

kad u priyāya dhāmne manāmahe svakṣatrāya svayaśase mahe vayam | āmenyasya rajaso yad abhra ām̐ apo vṛṇānā vitanoti māyinī ||

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Pad Path

कत्। ऊँ॒ इति॑। प्रि॒याय॑। धाम्ने॑। म॒ना॒म॒हे॒। स्वऽक्ष॑त्राय। स्वऽय॑शसे। म॒हे। व॒यम्। आ॒ऽमे॒न्यस्य॑। रज॑सः। यत्। अ॒भ्रे। आ। अ॒पः। वृ॒णा॒ना। वि॒ऽत॒नोति॑। मा॒यिनी॑ ॥१॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:48» Mantra:1 | Ashtak:4» Adhyay:3» Varga:2» Mantra:1 | Mandal:5» Anuvak:4» Mantra:1


SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब पाँच ऋचावाले अड़तालीसवें सूक्त का प्रारम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में फिर मनुष्यों को किसकी इच्छा करनी चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - (यत्) जो (आमेन्यस्य) चारों और से ज्ञान के विषय (रजसः) लोक के मध्य में और (अभ्रे) मेघ में (अपः) जलों का (आ, वृणाना) उत्तम प्रकार स्वीकार करती हुई और (मायिनी) बुद्धि जिसमें विद्यमान वह नीति (वितनोति) विस्तारयुक्त करती है उसको (उ) भी (वयम्) हम लोग (महे) बड़े (प्रियाय) सुन्दर (धाम्ने) जन्म, स्थान और नाम स्वरूप के लिये (स्वक्षत्राय) अपने राज्य वा क्षत्रिय कुल के लिये और (स्वयशसे) अपना यश जिससे उसके लिये (कत्) कब (मनामहे) जानें ॥१॥
Connotation: - मनुष्यों को चाहिये कि निरन्तर इस प्रकार से इच्छा करें, जिससे राज्य, यश और धर्म्म बढ़े, वैसे ही स्वीकार करके अनुष्ठान करें ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

तेजस्विता व प्रज्ञा

Word-Meaning: - [१] (कत् उ) = वह शुभ दिन कब होगा जब कि (वयम्) = हम (धाम्ने) = तेजस्विता के लिये (मनामहे) = स्तवन करेंगे? जो तेजस्विता (प्रियाय) = प्रीतिजनक है, (स्वक्षत्राय) = स्वयं क्षतों से त्राण करने में समर्थ है तथा (स्वयशसे) = अपने यश का कारण बनती है और (महे) = महनीय व अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। [२] वह समय कब होगा (यत्) = जब (अभ्रे) = बादल के होने पर भी वासनारूप मेघों के प्रज्ञान सूर्य को आच्छादित करने पर भी (मायिनी) = यह प्रज्ञावती बुद्धि [माया: प्रज्ञा] (आमेन्यस्य) = समन्तात् मातव्य, जिसक प्रकार ज्ञान प्राप्त करना चाहिए उस (रजसः) = लोक समूह के (अप:) = ज्ञान जलों को आवृणाना = - सर्वथा वरण करती हुई हमारे जीवनों में वितनोति प्रकाश को फैलाती है। इस लोक समूह का बुद्धि से ज्ञान प्राप्त करके, इसके यथायोग से ही कल्याण सम्भव है।
Connotation: - भावार्थ- हमारे जीवन का लक्ष्य यही हो कि हम 'तेजस्विता व प्रज्ञा' का सम्पादन करनेवाले बनें।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्यैः किमेष्टव्यमित्याह ॥

Anvay:

यद्या आमेन्यस्य रजसो मध्येऽभ्रेऽप आ वृणाना मायिनी सती वितनोति तामु वयं महे प्रियाय धाम्ने स्वक्षत्राय स्वयशसे कन्मनामहे ॥१॥

Word-Meaning: - (कत्) कदा (उ) (प्रियाय) कमनीयाय (धाम्ने) जन्मस्थाननामस्वरूपाय (मनामहे) जानीमहे (स्वक्षत्राय) स्वकीयराज्याय क्षत्रियकुलाय वा (स्वयशसे) स्वकीयं यशो यस्मात्तस्मै (महे) महते (वयम्) (आमेन्यस्य) समन्तान्मेयस्य (रजसः) लोकस्य (यत्) या (अभ्रे) घने [(आ)] (अपः) जलानि (वृणाना) स्वीकुर्वाणा (वितनोति) विस्तीर्णां करोति (मायिनी) माया प्रज्ञा विद्यते यस्यां सा ॥१॥
Connotation: - मनुष्यैः सततमेवमाशंसितव्यं येन राज्यं यशो धर्मश्च वर्धेत तथैव स्वीकृत्याऽनुष्ठातव्यम् ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When shall we all sing and celebrate in honour of our own domain, our cherished independent identity and social order, our own honour and glory, which, commanding its own power and splendour, pursuing its own policy, extends its resounding actions and waters of peace and freedom among the people, across the lands and over the clouds of immeasurable skies and spaces? When shall we think and reflect upon this?

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should be the aim of men is told?

Anvay:

When shall we know the power of the council, endowed with wisdom and is in the middle of the State, it should be properly measured out thoroughly. It extends its activities for The great and desirable benevolent splendour, is strong in its own strength and glorious, like the lightning generating water. It performs good and beneficent deeds under a great leader who is like the cloud.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Men should always desire that the State, its good reputation and Dharma may ever grow, They should act for the accomplishment of this purpose,

MATA SAVITA JOSHI

या सूक्तात विद्वान व राजाच्या गुणांचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची पूर्वसूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - माणसांनी निरंतर अशा प्रकारची इच्छा करावी की ज्यामुळे राज्य, यश, धर्म वाढावा त्यासाठी तसेच अनुष्ठान करावे. ॥ १ ॥