ऋ॒जी॒षी व॒ज्री वृ॑ष॒भस्तु॑रा॒षाट्छु॒ष्मी राजा॑ वृत्र॒हा सो॑म॒पावा॑। यु॒क्त्वा हरि॑भ्या॒मुप॑ यासद॒र्वाङ्माध्यं॑दिने॒ सव॑ने मत्स॒दिन्द्रः॑ ॥४॥
ṛjīṣī vajrī vṛṣabhas turāṣāṭ chuṣmī rājā vṛtrahā somapāvā | yuktvā haribhyām upa yāsad arvāṅ mādhyaṁdine savane matsad indraḥ ||
ऋ॒जी॒षी। व॒ज्री। वृ॒ष॒भः। तु॒रा॒षाट्। शु॒ष्मी। राजा॑। वृ॒त्र॒ऽहा। सो॒म॒ऽपावा॑। यु॒क्त्वा। हरि॑ऽभ्याम्। उप॑। या॒स॒त्। अ॒र्वाङ्। माध्यं॑दिने। सव॑ने। म॒त्स॒त्। इन्द्रः॑ ॥४॥
SWAMI DAYANAND SARSWATI
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
[१] (ऋजीषी) = [ऋजु - इष] सदा सरल मार्ग से चलनेवाला, (वज्री) = क्रियाशीलतारूप वज्रवाला, अर्थात् कभी अकर्मण्य न होनेवाला, अतएव (वृषभः) = शक्तिशाली, (तुराषाट्) = त्वरा से शत्रुओं का पराभव करनेवाला, (शुष्मी) = शत्रुशोषक बलवाला, (राजा) = जीवन को दीप्त बनानेवाला, (वृत्रहा) = वासना का विनाशक, (सोमपावा) = सोम [वीर्य] का रक्षण करनेवाला यह पुरुष (हरिभ्याम्) = इन्द्रियाश्वों से (युक्त्वा) = शरीर रथ को जोतकर (अर्वाङ् उपयासत्) = अन्तर्मुख यात्रावाला प्रभु के समीप प्राप्त हो । [२] माध्यन्दिने सवने-जीवन-यात्रा के इस माध्यन्दिन सवन में, गृहस्थाश्रम के काल में, इस प्रकार सोमपावा बनकर (इन्द्रः) = यह जितेन्द्रिय पुरुष (मत्सत्) = आनन्द का अनुभव करे। ब्रह्मचर्याश्रम 'जीवन का प्रातः सवन' है। गृहस्थ 'माध्यन्दिन' तथा वानप्रस्थ- संन्यास 'तृतीय सवन' हैं। माध्यन्दिन सवन में भी सोमरक्षण करता हुआ पुरुष जीवन के वास्तविक आनन्द का अनुभव करे।
SWAMI DAYANAND SARSWATI
पुनस्तमेव विषयमाह ॥
हे मनुष्या ! य ऋजीषी वज्री वृषभः शुष्मी तुराषाट् सोमपावा वृत्रहेन्द्रो राजा हरिभ्यां यानं युक्त्वाऽर्वाङुप यासन्माध्यन्दिने सवने मत्सत्तमेवाऽधिष्ठातारं कुर्वन्तु ॥४॥
DR. TULSI RAM
ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA
The attributes of Agni (king) are further elaborated.
O men ! you should accept him your ruler who is a man of upright nature, wielder of powerful weapon and missiles, very powerful, and possessor of the most mighty army. He overcomes violent foes, drinks the juice of soma and good herbs, destroys the wicked foes, who, having harnessed his two horses comes to us, and then after the midday meals let him bliss-be the maker of prosperity. He shines with knowledge and humility.
MATA SAVITA JOSHI
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