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अ॒स्मे रायो॑ दि॒वेदि॑वे॒ सं च॑रन्तु पुरु॒स्पृहः॑। अ॒स्मे वाजा॑स ईरताम् ॥७॥

English Transliteration

asme rāyo dive-dive saṁ carantu puruspṛhaḥ | asme vājāsa īratām ||

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Pad Path

अ॒स्मे इति॑। रायः॑। दि॒वेऽदि॑वे। सम्। च॒र॒न्तु॒। पु॒रु॒स्पृहः॑। अ॒स्मे इति॑। वाजा॑सः। ई॒र॒ता॒म्॥७॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:8» Mantra:7 | Ashtak:3» Adhyay:5» Varga:8» Mantra:7 | Mandal:4» Anuvak:1» Mantra:7


SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब विद्वानों के पुरुषार्थ का फल कहते हैं ॥

Word-Meaning: - मनुष्य लोग (दिवेदिवे) प्रतिदिन (अस्मे) हम लोगों में (पुरुस्पृहः) बहुतों से चाहने योग्य (रायः) श्रेष्ठ लक्ष्मियाँ (सम्, चरन्तु) विलसें और (वाजासः) अन्न आदि ऐश्वर्य्यों के योग (अस्मे) हम लोगों को (ईरताम्) प्राप्त हों, ऐसी अभिलाषा करो ॥७॥
Connotation: - मनुष्यों को चाहिये कि सदा ही पुरुषार्थ से धन, अन्न, राज्य, प्रतिष्ठा और विद्या आदि उत्तम गुणों की उन्नति होती है, इस प्रकार निरन्तर इच्छा करनी चाहिये ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

राय:-वाजास:

Word-Meaning: - [१] (दिवे दिवे) = प्रतिदिन-दिन दूने रात चौगुने, (रायः) = धन (अस्मे संचरन्तु) = हमें सम्यक् प्राप्त हों, उत्तम मार्ग से प्राप्त हों। ये धन (पुरुस्पृहः) = पालक और पूरक व स्पृहणीय हों, अर्थात् भोगविलास में व्यक्ति होते हुए ये नाशक व न्यूनताओं की ओर ले जानेवाले न हों, तथा अवाञ्छनीय न बन जायें। 'दिवे दिवे' का भाव यही है कि मुझे धन प्रतिदिन प्राप्त हों getting prosperity continuously की तरह मुझे प्रतिदिन आवश्यक धन प्राप्त होती रहे, अनावश्यक धन के रक्षण का मुझे बोझ उठाना ही न पड़े। मैं 'उप-मुक्त- धन' ही बनूँ। मुझे 'मुक्त धन' न बनना हो। [२] हे प्रभो! इन धनों के ठीक प्रयोग से (अस्मे) = हमारे लिये (वाजास:) = शक्तियाँ, (ईरताम्) = प्राप्त हों। हमारा अंग-प्रत्यंग शक्ति सम्पन्न बने ।
Connotation: - भावार्थ- हमें पुरुस्पृह धन प्राप्त हों और उनके ठीक विनियोग से हम सर्वाङ्ग सुन्दर सबल शरीरवाले बनें ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ विद्वत्पुरुषार्थफलमाह ॥

Anvay:

मनुष्या दिवेदिवेऽस्मे पुरुस्पृहो रायः सञ्चरन्तु वाजासोऽस्मे ईरतामित्यभिलषन्तु ॥७॥

Word-Meaning: - (अस्मे) अस्मासु (रायः) शुभाः श्रियः (दिवेदिवे) प्रतिदिनम् (सम्) (चरन्तु) विलसन्तु (पुरुस्पृहः) बहुभिः स्पृहणीयाः (अस्मे) अस्मान् (वाजासः) अन्नाद्यैश्वर्य्ययोगाः (ईरताम्) प्राप्नुवन्तु ॥७॥
Connotation: - मनुष्यैः सदैव पुरुषार्थेन धनान्नराज्यप्रतिष्ठाविद्यादयः शुभगुणा उन्नता भवन्त्विति सततमेष्टव्याः ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let wealths of various kinds and universal value come and abound among us, let food and energy of all varieties flow and arise among us (as divine gifts of Agni, lord of heat and light and cosmic energy).

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The outcome of the sustained and hard labor made by the enlightened persons is told.

Anvay:

Men should aspire every day to seek good riches desired by many dissolve upon us. They may obtain prosperity by abundant food grains and other necessaries.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Men should always desire that through exertion of labor, we may develop wealth, food, kingdom, honor and other good virtues.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - नेहमी पुरुषार्थाने धन, अन्न, राज्य, प्रतिष्ठा व विद्या इत्यादी उत्तम गुणांनी उन्नती होते, अशा प्रकारची माणसांनी सतत इच्छा करावी. ॥ ७ ॥