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उषो॑ मघो॒न्या व॑ह॒ सूनृ॑ते॒ वार्या॑ पु॒रु। अ॒स्मभ्यं॑ वाजिनीवति ॥९॥

English Transliteration

uṣo maghony ā vaha sūnṛte vāryā puru | asmabhyaṁ vājinīvati ||

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Pad Path

उषः॑। म॒घो॒नि॒। आ। व॒ह। सूनृ॑ते। वार्या॑। पु॒रु। अ॒स्मभ्य॑म्। वा॒जि॒नी॒ऽव॒ति ॥९॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:55» Mantra:9 | Ashtak:3» Adhyay:8» Varga:7» Mantra:4 | Mandal:4» Anuvak:5» Mantra:9


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (उषः) प्रातःकाल के सदृश वर्त्तमान (सूनृते) सत्यवाणीयुक्त (मघोनि) प्रशंसित धन को करनेवाली (वाजिनीवति) उत्तम विद्या से युक्त पत्नी ! तू (अस्मभ्यम्) हम लोगों के लिये (पुरु) बहुत (वार्या) वर्त्ताव में लाने योग्य वस्तुओं को (आ, वह) सब प्रकार से प्राप्त कराओ ॥९॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे प्रभातवेला सब जीवों की प्रिय करनेवाली है, वैसे ही विद्यायुक्त स्त्री सब को प्रिय होती है ॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'मघोनी-सूनृता-वाजिनीवती' उषा

Word-Meaning: - [१] हे (उषः) = उषा की देवी ! तू (अस्मभ्यम्) = हमारे लिए (पुरुवार्या) = पालक व पूरक वरणीय धनों को (आवह) = प्राप्त करा । हम उषा में प्रबुद्ध होकर स्वकार्य तत्पर होते हुए वरणीय धनों को प्राप्त करनेवाले बनें। [२] हे उष: ! तू [क] (मघोनि) = सब ऐश्वर्योंवाली है अथवा [मघः मखः यज्ञ] सब यज्ञोंवाली है। हम ऐश्वर्यों को प्राप्त करें और यज्ञों में उनका विनियोग करें। [ख] (सूनृते) = हे उषः ! तू प्रिय सत्यवाणीवाली है। तेरे में प्रबुद्ध होते हुए हम सदा प्रिय सत्यवाणी को ही बोलें। [ग] (वाजिनीवति) = तू प्रशस्त अन्नोंवाली है। उषा के उपासक हम सदा सात्त्विक अन्नों का ही सेवन करें।
Connotation: - भावार्थ- हम उषाकाल में जाएँ। यज्ञों में प्रवृत्त हों, प्रिय सत्यवाणी को ही बोलें और सात्त्विक अन्न का सेवन करें। यह उषा हमें सब वरणीय धनों को प्राप्त कराएगी।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे उषर्वद्वर्त्तमाने सूनृते मघोनि वाजिनीवति ! पत्नी त्वमस्मभ्यं पुरु वार्याऽऽवह ॥९॥

Word-Meaning: - (उषः) उषर्वद्वर्त्तमाने (मघोनि) प्रशंसितधनकारिके (आ) (वह) समन्तात् प्रापय (सूनृते) सत्यवाक् (वार्या) वर्त्तुमर्हाणि वस्तूनि (पुरु) (अस्मभ्यम्) (वाजिनीवति) उत्तमविद्यायुक्ते ॥९॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः। यथोषाः सर्वजीवानां प्रियकारिणी वर्त्तते तथैव विदुषी स्त्री सर्वप्रिया जायते ॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Usha, O lady of morning light, beauty of the home, blest with holy speech of inspiration, commanding wealth and honour, mistress of intelligence and speed of progress in action and endeavour, bring us manifold wealth and honour of our cherished desire.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject of learned person's attributes is continued.

Anvay:

O wife ! behaving like the dawn, and endowed with absolutely true and sweet speech, you cause to attain admirable wealth, and possession of good knowledge. Let you lead us to many desirable objects.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - As the dawn does good to all souls, so a highly learned wife attains popularity everywhere.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जशी उषा सर्व जीवांना प्रिय असते तशीच विद्यायुक्त स्त्री सर्वांना प्रिय असते. ॥ ९ ॥