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सोम॑मिन्द्राबृहस्पती॒ पिब॑तं दा॒शुषो॑ गृ॒हे। मा॒दये॑थां॒ तदो॑कसा ॥६॥

English Transliteration

somam indrābṛhaspatī pibataṁ dāśuṣo gṛhe | mādayethāṁ tadokasā ||

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Pad Path

सोम॑म्। इ॒न्द्रा॒बृ॒हस्प॒ती॒ इति॑। पिब॑तम्। दा॒शुषः॑। गृ॒हे। मा॒दये॑थाम्। तत्ऽओ॑कसा ॥६॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:49» Mantra:6 | Ashtak:3» Adhyay:7» Varga:25» Mantra:6 | Mandal:4» Anuvak:5» Mantra:6


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (तदोकसा) उस स्थानवाले (इन्द्राबृहस्पती) राजा और मन्त्री जनो ! आप दोनों (दाशुषः) दाता जन के (गृहे) स्थान में (सोमम्) अति उत्तम रस का (पिबतम्) पान करो और हम लोगों को निरन्तर (मादयेथाम्) आनन्द देओ ॥६॥
Connotation: - राजा आदि जन जैसे स्वयं विद्यायुक्त, धार्मिक, न्यायकारी और आनन्दित होवें, वैसे प्रजाजनों को भी करें ॥६॥ इस सूक्त में राजा और प्रजादि के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ की पूर्व सूक्त के अर्थ के साथ सङ्गति है, यह जानना चाहिये ॥६॥ यह उनचासवाँ सूक्त और पच्चीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

आनन्दमय जीवन

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्राबृहस्पती) = शक्ति व ज्ञान के अधिष्ठातृदेवो! आप (दाशुषः) = आपके प्रति अपने को दे डालनेवाले के (गृहे) = शरीरगृह में (सोमं पिबतम्) = सोम का पान करो। जो व्यक्ति शक्ति व ज्ञान की प्राप्ति में जुट जाता है, वह सोम का रक्षण कर पाता है। [२] हे इन्द्राबृहस्पती! (तदोकसा) = सोमरक्षणवाले शरीररूप गृह के स्वामी होते हुए आप (मादयेथाम्) = हमें आनन्दयुक्त जीवनवाला करिए । वस्तुतः शक्ति सम्पन्न ज्ञानयुक्त जीवन आनन्दवाला होता ही है। सोमरक्षण इस जीवन का साधन बनता है।
Connotation: - भावार्थ- हम शक्ति व ज्ञान का सम्पादन करके आनन्दयुक्त जीवनवाले हों। अगले सूक्त में भी 'बृहस्पति' का मुख्यतया उल्लेख है। समाप्ति पर उसके साथ इन्द्र का भी उल्लेख होगा -

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे तदोकसेन्द्राबृहस्पती ! युवां दाशुषो गृहे सोमं पिबतमस्मान् सततम्मादयेथाम् ॥६॥

Word-Meaning: - (सोमम्) अत्युत्तमं रसम् (इन्द्राबृहस्पती) राजामात्यौ (पिबतम्) (दाशुषः) दातुः (गृहे) (मादयेथाम्) हर्षयेतम् (तदोकसा) तदोकः स्थानं ययोस्तौ ॥६॥
Connotation: - राजादयो जना यथा स्वयं विद्यावन्तो धार्मिका न्यायशीला आनन्दिनः स्युस्तथा प्रजाजनानपि कुर्य्युः ॥६॥ अत्र राजप्रजादिगुणवर्णनादेतदर्थस्य पूर्वसूक्तार्थेन सह सङ्गतिरस्तीति वेद्यम् ॥६॥ इत्येकोनपञ्चाशत्तमं सूक्तं पञ्चविंशो वर्गश्च समाप्तः ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra and Brhaspati of the house of honour and power, drink the soma in the home of the generous yajamana as your own and give us the honour and pleasure of your company.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject of state official's duties is continued.

Anvay:

O king and minister ! dwelling in good places, drink the Soma juice at the home of a liberal donor and delight us.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - As the king and his ministers should themselves be highly learned, just and joyous, they should make their subjects also similar.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - राजा इत्यादी लोक जसे स्वतः धार्मिक, न्यायकारी व आनंदित असतात तसे प्रजाजनांनाही करावे. ॥ ६ ॥