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वह॑न्तु त्वा मनो॒युजो॑ यु॒क्तासो॑ नव॒तिर्नव॑। वाय॒वा च॒न्द्रेण॒ रथे॑न या॒हि सु॒तस्य॑ पी॒तये॑ ॥४॥

English Transliteration

vahantu tvā manoyujo yuktāso navatir nava | vāyav ā candreṇa rathena yāhi sutasya pītaye ||

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Pad Path

वह॑न्तु। त्वा। म॒नः॒ऽयुजः॑। यु॒क्तासः॑। न॒व॒तिः। नव॑। वायो॒ इति॑। आ। च॒न्द्रेण॑। रथे॑न। या॒हि। सु॒तस्य॑। पी॒तये॑ ॥४॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:48» Mantra:4 | Ashtak:3» Adhyay:7» Varga:24» Mantra:4 | Mandal:4» Anuvak:5» Mantra:4


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (वायो) बलवान् राजन् ! (मनोयुजः) मन से ब्रह्म का योग करनेवाले (युक्तासः) जिन्होंने योगाभ्यास किया वे (नव) नौ वार गुनी गईं (नवतिः) नव्वे संख्या से युक्त नाड़ियों के सदृश (त्वा) आप राजा को (वहन्तु) प्राप्त हों वा प्राप्त करावें आप इनके (सुतस्य) प्राप्त राज्य के (पीतये) रक्षण आदि के लिये (चन्द्रेण) सुवर्ण आदि से बने हुए (रथेन) वाहन से (आ, याहि) आइये ॥४॥
Connotation: - हे राजन् ! जो श्रेष्ठ यथार्थवक्ता जन आपके सहायक होवें तो आप जिस-जिस पदार्थ की इच्छा करें, वह-वह सब सिद्ध होवें ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'मत्वा कर्माणि सीव्यति'

Word-Meaning: - [१] हे (वायो) = क्रियाशील जीव! (त्वा) = तुझे (मनोयुजः) = मन के साथ सम्बद्ध होकर कार्यों में प्रवृत्त होनेवाले, (युक्तासः) = शरीर-रथ में जुते हुए अपने कर्त्तव्य कर्मों में प्रवृत्त इन्द्रियाश्व (नवतिर्नव) = निन्यानवे वर्षों तक (वहन्तु) = ले चलनेवाले हों, अर्थात् जीवन के अन्तिम क्षणों तक तू क्रियाशील बना रह। [२] (चन्द्रेण रथेन) = मन: प्रसादवाले शरीर-रथ से तू (आयाहि) = समन्तात् कर्त्तव्यकर्मों में प्रवृत्त रह, ताकि (सुतस्य पीतये) = तू सोम का पान कर सके। यह कर्त्तव्यपरायणता हमें वासनाओं से बचाती है और इस प्रकार सोमरक्षण के योग्य बनाती है ।
Connotation: - भावार्थ- हम जीवन के अन्तिम क्षणों तक मननपूर्वक कार्यों में प्रवृत्त रहें। 'मत्वा कर्माणि सीव्यति' के अनुसार मनुष्य बनें ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे वायो ! मनोयुजो युक्तासो नव नवतिर्नाड्य इव त्वा वहन्तु त्वमेषां सुतस्य पीतये चन्द्रेण रथेनाऽऽयाहि ॥४॥

Word-Meaning: - (वहन्तु) प्राप्नुवन्तु प्रापयन्तु वा (त्वा) त्वां राजानम् (मनोयुजः) ये मनसा ब्रह्म युञ्जते ते (युक्तासः) कृतयोगाभ्यासाः (नवतिः) (नव) नवगुणिता (वायो) बलिष्ठ राजन् (आ) (चन्द्रेण) (रथेन) (याहि) (सुतस्य) प्राप्तस्य राज्यस्य (पीतये) रक्षणाय ॥४॥
Connotation: - हे राजन् ! यद्युत्तमा आप्तजनास्तव सहायाः स्युस्तर्हि भवान् यद्यदिच्छेत् तत्तत्सर्वं सिद्ध्येत् ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Vayu, may the ninety nine forces of cosmic energy yoked to your chariot transport you by the golden chariot of the moon controlled by thought of the mind. Come to our yajna for a drink of soma.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject of ruler's duties is continued.

Anvay:

O king ! you are the mightiest like the wind. Let those eight hundred Yogis who have attuned their minds to God, like 810 nerve centers, be your associates, and helpers or (guides ). Mounted on your charming chariot, come for the protection of your State.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O king! let the absolutely truthful and enlightened persons be your helpers. You are competent to do whatever you desire to acquire or act.
Footnote: यूजिर्-योगे (रुधा० ) युज समाधौ (दिवा० ) पा-रक्षणे (अदा० ) । The exact significance of the number mentioned in the mantra 9×90=810 is a matter of further research. Unfortunately it has not been explained by the revered Vedic commentator.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे राजा ! जर श्रेष्ठ विद्वान लोक तुझे सहायक असतील तर तू ज्या ज्या पदार्थाची इच्छा करशील ती ती सिद्ध होईल. ॥ ४ ॥