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दि॒वश्चि॑द्घा दुहि॒तरं॑ म॒हान्म॑ही॒यमा॑नाम्। उ॒षास॑मिन्द्र॒ सं पि॑णक् ॥९॥

English Transliteration

divaś cid ghā duhitaram mahān mahīyamānām | uṣāsam indra sam piṇak ||

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Pad Path

दि॒वः। चि॒त्। घ॒। दु॒हि॒तर॑म्। म॒हान्। म॒ही॒यमा॑नाम्। उ॒षस॑म्। इ॒न्द्र॒। सम्। पि॒ण॒क् ॥९॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:30» Mantra:9 | Ashtak:3» Adhyay:6» Varga:20» Mantra:4 | Mandal:4» Anuvak:3» Mantra:9


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (इन्द्र) तेजस्वि राजन् ! जैसे (महान्) महानुभाव कोई (दिवः, दुहितरम्) कन्या के सदृश वर्त्तमान सूर्य्य की (महीयमानाम्) विस्तीर्ण (उषासम्) प्रातर्वेला के (चित्) सदृश (सम्, पिणक्) पीसता है, वैसे (घ) ही अविद्या और दुष्टों का निवारण करो ॥९॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जो राजपुरुष और राजा अन्यायरूप अन्धकार को निवृत्त करके विद्या और न्यायरूप सूर्य्य को उत्पन्न करते, वे सूर्य्य के सदृश प्रतापी होते हैं ॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अर्ध चेतनावस्था का विनाश

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष! तू (महान्) = 'मह पूजायाम्' प्रभुपूजा की वृत्तिवाला बन । प्रभु का उपासक बन करके (इत्) = ही (चित् घा) = निश्चय से तू (उषासम्) = उषा को (संपिणक्) = संपिष्ट करनेवाला होता है। इस अर्ध जागरित स्थिति को समाप्त करके तू जागरित स्थिति में आ जाता है। [२] यह उषा (दिवः दुहितरम्) = [दिव् स्वप्ने] स्वप्न की पुत्री है। स्वप्नावस्था से इसकी उत्पत्ति होती है। स्वप्न के अनन्तर आनेवाली यह पूर्ण जागरित न होने से हमारे पापों के उदय का कारण बनती है। सो इसका विनाश आवश्यक है। (महीयमानाम्) = यह पूर्ण जागरण के अभाव में बड़े बड़े स्वप्न देखती है गर्व का अनुभव करती है वास्तविक स्थिति से सदा ओझल रहती है।
Connotation: - भावार्थ- एक जितेन्द्रिय पुरुष को चाहिए कि रात्रि समाप्त होने पर पूर्ण जागरित स्थिति में आने का प्रयत्न करे। अर्धचेतन अवस्था में व्यर्थ के गर्व को न अनुभव करता रहे।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे इन्द्र राजन् ! यथा महान्त्सूर्य्यो दिवो दुहितरं महीयमानामुषासञ्चित् सम्पिणक् तथा घाविद्यां दुष्टांश्च निवारय ॥९॥

Word-Meaning: - (दिवः) सूर्य्यस्य (चित्) इव (घ) इव। अत्र ऋचि तुनुघेति दीर्घः। (दुहितरम्) कन्यामिव वर्त्तमानाम् (महान्) (महीयमानाम्) विस्तीर्णाम् (उषासम्) प्रातर्वेलाम् (इन्द्र) (सम्) (पिणक्) पिनष्टि ॥९॥
Connotation: - अत्रोपमालङ्कारः । ये राजपुरुषा चान्यायान्धकारं निवार्य्य विद्यां न्यायार्कञ्च जनयन्ति ते सूर्य्य इव प्रतापिनो जायन्ते ॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, great you are. Surely the dawn is glorious, daughter of heaven, which you refine, adorn and glorify, and then make her disappear when she waxes with pride.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The attributes of a ruler are highlighted.

Anvay:

O Indra ! you are a glorious ruler. The way rising morning sun comparable to a girl crushes or defeats the darkness, the same way you should eradicate ignorance and wickeds.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Here is a simile. A ruler who eradicates injustice like the sun, which overcomers the darkness, same way the ruler establishing the rule of justice and spreading the knowledge, surely becomes matching to the sun.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात उपमालंकार आहे. जे राजपुरुष व राजे अन्यायरूपी अंधकार नाहीसा करून विद्या व न्यायरूपी सूर्य उत्पन्न करतात ते सूर्याप्रमाणे प्रतापी असतात. ॥ ९ ॥