Go To Mantra
Viewed 347 times

इ॒ह त्वं सू॑नो सहसो नो अ॒द्य जा॒तो जा॒ताँ उ॒भयाँ॑ अ॒न्तर॑ग्ने। दू॒त ई॑यसे युयुजा॒न ऋ॑ष्व ऋजुमु॒ष्कान्वृष॑णः शु॒क्रांश्च॑ ॥२॥

English Transliteration

iha tvaṁ sūno sahaso no adya jāto jātām̐ ubhayām̐ antar agne | dūta īyase yuyujāna ṛṣva ṛjumuṣkān vṛṣaṇaḥ śukrām̐ś ca ||

Mantra Audio
Pad Path

इ॒ह। त्वम्। सू॒नो॒ इति॑। स॒ह॒सः॒। नः॒। अ॒द्य। जा॒तः। जा॒तान्। उ॒भया॑न्। अ॒न्तः। अ॒ग्ने॒। दू॒तः। ई॒य॒से॒। यु॒यु॒जा॒नः। ऋ॒ष्व॒। ऋ॒जु॒ऽमु॒ष्कान्। वृष॑णः। शु॒क्रान्। च॒॥२॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:2» Mantra:2 | Ashtak:3» Adhyay:4» Varga:16» Mantra:2 | Mandal:4» Anuvak:1» Mantra:2


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (अग्ने) अग्नि के सदृश वर्त्तमान (ऋष्व) विज्ञान को प्राप्त (नः) हम लोगों के (सूनो) पवित्रपुत्र (त्वम्) आप (इह) इस संसार में (अद्य) आज (सहसः) बल से (जातः) विद्या के जन्म में प्रकट हुए (ऋजुमुष्कान्) सरलता से चुरानेवाले (वृषणः) बलयुक्त जनों और (शुक्रान्) शुद्धि करनेवालों का (च) भी (युयुजानः) समाधान करते हुए (दूतः) दुष्टों के सन्ताप देनेवाले के तुल्य (जातान्) विद्वान् और (उभयान्) पढ़ाने और पढ़नेवालों को (अन्तः) मध्य में (ईयसे) प्राप्त होते हो, इससे कल्याण करनेवाले हो ॥२॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जैसे मध्य में अग्नि सब का पालन और नाश करनेवाला है, वैसे ही इस संसार में विद्वान् पुत्र तो पालन करनेवाला और मूर्ख विनाश करनेवाला होता है। तिससे दीर्घ ब्रह्मचर्य से अपनी सन्तानों को उत्तम करके कृतकृत्यता अर्थात् जन्मसाफल्य जानो ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वृषा व शुक्र' इन्द्रियाश्व

Word-Meaning: - [१] हे (सहसः सूनो) = बल के पुत्र बल के पुतले शक्ति के पुञ्ज (अग्ने) = अग्रणी प्रभो ! (त्वम्) = आप (इह) = इस जीवन (नः) = हमें (अद्य) = आज (जातान्) = विकसित शक्तिवाले (उभयान् अन्तः) = शरीर व मस्तिष्क दोनों के अन्दर, दोनों के मध्य हृदयान्तरिक्ष में (जातः) = प्रादुर्भूत हुए हुए, (दूत:) = ज्ञान का सन्देश देनेवाले होकर (ईयसे) = गति करते हैं। हम शरीर को तेजस्वी व मस्तिष्क को ज्ञानदीप्त बनायें। तब हमारे हृदयों में प्रभु का प्रादुर्भाव होगा। ये प्रभु हमें ज्ञान का सन्देश दे रहे होंगे। [२] हे (ऋष्व) = दर्शनीय प्रभो ! आप हमारे शरीर-रथों में उन इन्द्रियाश्वों को (युयुजानः) = जोतनेवाले होते हैं जो कि (ऋजुमुष्कान्) = ऋजु, अर्थात् प्रसाधक-सरलता से अपने मार्ग पर बढ़नेवाले तथा मांसल [बलवान्] हैं, (वृषण:) = हमारे लिये सुखों का सेचन करनेवाले व शक्तिशाली हैं, (च) = तथा (शुक्रान्) = [शुक् गतौ, शुच् दीप्तौ] तीव्र गतिवाले व दीप्त हैं। कर्मेन्द्रियों के दृष्टिकोण से 'वृषण: ' और ज्ञानेन्द्रियों के दृष्टिकोण से 'शुक्रान्' शब्द का प्रयोग हुआ है, ये इन्द्रियरूप घोड़े शक्तिशाली व ज्ञानदीप्त हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम शरीर व मस्तिष्क को ठीक बनाकर हृदय प्रभु के प्रकाश को देखते हैं। ये प्रभु हमारे शरीर रथों में कर्मेन्द्रिय रूप सशक्त अश्वों को तथा ज्ञानेन्द्रियरूप ज्ञानदीप्त अश्वों को जोतते हैं ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

Anvay:

हे अग्ने ! ऋष्व नः सूनो त्वमिहाद्य सहसो जात ऋजुमुष्कान् वृषणः शुक्रांश्च युयुजानो दूत इव जातानुभयानन्तरीयसे तस्माच्छ्रेयस्करोषि ॥२॥

Word-Meaning: - (इह) अस्मिन् संसारे (त्वम्) (सूनो) पवित्रपुत्र (सहसः) बलात् (नः) अस्माकम् (अद्य) (जातः) विद्याजन्मनि प्रादुर्भूतः (जातान्) विदुषः (उभयान्) अध्यापकान् अध्येतॄंश्च (अन्तः) मध्ये (अग्ने) अग्निरिव वर्त्तमान (दूतः) दुष्टानां परितापकः (ईयसे) प्राप्नोषि (युयुजानः) समादधन् (ऋष्व) प्राप्तविज्ञान (ऋजुमुष्कान्) य ऋजुना मुष्णन्ति तान् (वृषणः) बलिष्ठान् (शुक्रान्) शुद्धिकरान् (च) ॥२॥
Connotation: - हे मनुष्या ! यथान्तरग्निः सर्वेषां पालको विनाशकश्चास्ति तथैवेह विद्वान् पुत्रः पालको मूर्खश्च विनाशको भवति तस्माद्दीर्घेण ब्रह्मचर्येण स्वसन्तानानुत्तमान् कृत्वा कृतकृत्यतां विजानीत ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, lord giver of light, child of omnipotence, great and sublime, giver of mighty strength, here in this world of ours, risen today to full glory among both divines and humans born and initiated, you move as the light and energy of yajna, carrying the fragrance, inspiring and engaging all who are pure and generous and move by the brilliant paths of nature and rectitude.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The duties of ideal persons are highlighted.

Anvay:

O our highly learned son ! you are purifier like the fire, symbolic of strength, manifestation of knowledge, and dealing sternly with the gangs of thiefs. You purify the scholars, approach both teachers and students like a messenger and give punishment to the wickeds. Therefore, you give happiness and do good to all.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - As the Agni preserves all, as well as destroys, Them too; in the same manner, a learned son preserves peace and an ignorant or stupid son destroys it. Therefore, you should gratify yourselves by making your children exalted and admirable through the observance of longer span of Brahamcharya.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे माणसांनो ! जसा अग्नी सर्वांचे पालन किंवा नाश करणारा असतो, तसेच या जगात विद्वान पुत्र पालनकर्ता व मूर्ख नाशकर्ता असतो. त्यामुळे दीर्घ ब्रह्मचर्याने आपल्या संतानांना उत्तम करून कृतकृत्य होता येते हे जाणावे ॥ २ ॥