Go To Mantra

इ॒यं ते॑ पूषन्नाघृणे सुष्टु॒तिर्दे॑व॒ नव्य॑सी। अ॒स्माभि॒स्तुभ्यं॑ शस्यते॥

English Transliteration

iyaṁ te pūṣann āghṛṇe suṣṭutir deva navyasī | asmābhis tubhyaṁ śasyate ||

Mantra Audio
Pad Path

इ॒यम्। ते॒। पू॒ष॒न्। आ॒घृ॒णे॒। सु॒ऽस्तु॒तिः। दे॒व॒। नव्य॑सी। अ॒स्माभिः॑। तुभ्य॑म्। श॒स्य॒ते॒॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:62» Mantra:7 | Ashtak:3» Adhyay:4» Varga:10» Mantra:2 | Mandal:3» Anuvak:5» Mantra:7


Reads 385 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब अगले मन्त्र में विद्वान् के विषय को कहते हैं।

Word-Meaning: - हे (पूषन्) पुष्टि करनेवाले (आघृणे) सब प्रकार प्रकाशित (देव) उत्तमगुणों से युक्त विद्वान् पुरुष वा राजन् ! (ते) आपकी जो (इयम्) यह (नव्यसी) अत्यन्त नवीन (सुष्टुतिः) उत्तम प्रशंसा वर्त्तमान है वह (तुभ्यम्) आपके लिये (अस्माभिः) हम लोगों से (शस्यते) उच्चारण की जाती है ॥७॥
Connotation: - जो मनुष्य धर्मसम्बन्धी कर्मों के करने से यशस्वी हैं, उनको सुन और देख के सब लोग प्रसन्न होओ ॥७॥
Reads 385 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'पूषा का आघृणि' बनना

Word-Meaning: - [१] प्रभु तो 'पूषा' हैं ही। सूर्य को भी पूषा कहते हैं, यह अपनी किरणों से सर्वत्र प्राणशक्ति का संचार करता है, यह सर्वतो दीप्यमान होने से 'आघृणि' है। सूर्य अपनी किरणों से [घृणि] चमक रहा है, प्रभु ज्ञान की किरणों से दीप्त हैं। 'ब्रह्म सूर्यसमं ज्योति: ' । हे (पूषन्) = सब का पोषण करनेवाले! (आघृणे) = सर्वतः दीप्यमान देव प्रकाशमय व सब व्यवहारों के साधक प्रभो ! [दिव्= व्यवहारे] (इयम्) = यह (नव्यसी) = अत्यन्त प्रशस्त (सुष्टुतिः) = उत्तम स्तुति ते आपके लिए है। हम प्रतिदिन आपका स्तवन करते हैं। [२] (अस्माभिः) = हमारे से (तुभ्यम्) = आपके लिए (शस्यते) = सुष्टुति उच्चरित होती है। आपका 'पूषन् आघृणि' रूप में स्मरण करते हुए हम भी 'पूषा व आघृणि' बनने का प्रयत्न करते हैं, शरीर में पुष्ट, मस्तिष्क में दीप्त । वस्तुतः ऐसा बनना ही प्रभु का सच्चा पूजन है।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु का पूजन 'पूषा व आघृणि' रूप में करते हुए हम 'शरीर में पुष्ट व मस्तिष्क में दीप्त' बनने के लिए यत्नशील हों।
Reads 385 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

विद्वद्विषयमाह।

Anvay:

हे पूषन्नाघृणे देव विद्वन् राजन् वा ते येयं नव्यसी सुष्टुतिर्वर्तते सा तुभ्यमस्माभिः शस्यते ॥७॥

Word-Meaning: - (इयम्) (ते) तव (पूषन्) पुष्टिकर्त्तः (आघृणे) समन्तात् प्रकाशितः (सुष्टुतिः) शोभना प्रशंसा (देव) दिव्यगुणसम्पन्न (नव्यसी) अतिशयेन नवीना (अस्माभिः) (तुभ्यम्) (शस्यते) ॥७॥
Connotation: - ये मनुष्या धर्म्यकर्माऽनुष्ठानेन कीर्त्तिमन्तो भवेयुस्ताञ्छ्रुत्वा दृष्ट्वा सर्वे प्रसन्ना भवन्तु ॥७॥
Reads 385 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O brilliant master, giver of mental and spiritual nourishment, this is the latest song of homage and reverence composed and sung by us for you in honour of your light of knowledge and flames of fire (for world enlightenment).
Reads 385 times

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The duties of a learned person are stated.

Anvay:

We offer you, O illustrious divine nourisher (highly learned) king! this most recent true eulogy which you richly and rightly deserve.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - All men should be glad to hear the praise of those people, who attain good reputation by the observance and performance of good righteous deeds.
Reads 385 times

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जी माणसे धर्म कर्म करून कीर्तिमान होतात ते ऐकून व पाहून सर्व लोक प्रसन्न होतात. ॥ ७ ॥