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आ रोद॑सी अपृणा॒ जाय॑मान उ॒त प्र रि॑क्था॒ अध॒ नु प्र॑यज्यो। दि॒वश्चि॑दग्ने महि॒ना पृ॑थि॒व्या व॒च्यन्तां॑ ते॒ वह्न॑यः स॒प्तजि॑ह्वाः॥

English Transliteration

ā rodasī apṛṇā jāyamāna uta pra rikthā adha nu prayajyo | divaś cid agne mahinā pṛthivyā vacyantāṁ te vahnayaḥ saptajihvāḥ ||

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Pad Path

आ। रोद॑सी॒ इति॑। अ॒पृ॒णाः॒। जाय॑मानः। उ॒त। प्र। रि॒क्थाः॒। अध॑। नु। प्र॒य॒ज्यो॒ इति॑ प्रऽयज्यो। दे॒वः। चि॒त्। अ॒ग्ने॒। म॒हि॒ना। पृ॒थि॒व्याः। व॒च्यन्ता॑म्। ते॒। वह्न॑यः। स॒प्तऽजि॑ह्वाः॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:6» Mantra:2 | Ashtak:2» Adhyay:8» Varga:26» Mantra:2 | Mandal:3» Anuvak:1» Mantra:2


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

Word-Meaning: - हे (प्रयज्यो) उत्तम यज्ञ करनेवाले (अग्ने) अग्नि के समान विद्वान् ! (दिवः) प्रकाश और (पृथिव्याः) भूमि के (महिना) महत्त्व से (सप्तजिह्वाः) काली आदि सात जिह्वा ज्वालावाले (वह्नयः) पदार्थ को देशान्तर में पहुँचानेवाले अग्नि तुम्हें (वच्यन्ताम्) कहने चाहिये और सो आप (जायमानः) उत्पन्न होते हुए (रोदसी) आकाश और पृथिवी को (अपृणाः) परिपूर्ण कीजिये (उत) और (आ, प्र, रिक्थाः) दोषों को सब ओर से अच्छे प्रकार दूर कीजिये (अध) इसके अनन्तर (ते) आपको (चित्) (तु) शीघ्र निश्चय करके सुख हो ॥२॥
Connotation: - जैसे सूर्य, पृथिवी और अग्नि की महिमा वर्त्तमान है, वैसे जो अग्निविद्या और भूगर्भविद्या को जानता है, वह निरन्तर सुखी हो ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सात छन्दोंवाली वेदवाणी द्वारा प्रेरणा

Word-Meaning: - [१] हे परमात्मन्! (जायमानः) = प्रादुर्भूत होते हुए आप (रोदसी) = द्यावापृथिवी को आ (अपृणाः) = समन्तात् पूरित कर रहे हैं इनमें भरे हुए हैं। उत और हे प्रयज्यो=प्रकर्षेण यष्टव्य-उपास्य प्रभो ! हे अग्ने अग्रणी प्रभो! आप महिना अपनी महिमा से (दिवः चित्) = द्युलोक से भी (अध नु) = और निश्चय से (पृथिव्याः) = पृथिवी से भी (प्ररिक्थाः) = अतिरिक्त हैं- बढ़े हुए हैं। ये द्युलोक व पृथिवीलोक आपकी महिमा को सीमित नहीं कर पाते। [२] (ते) = आपकी (सप्तजिह्वा:) = सात छन्दरूप जिह्वाओंवाली (वह्नयः) = हमें उन्नतिपथ पर ले चलनेवाली वेदवाणियाँ (वच्यन्ताम्) = उच्चारण की जाएँ। इन द्वारा अपने कर्त्तव्यों को जानकर हम उन्नतिपथ पर आगे बढ़नेवाले हों ।
Connotation: - भावार्थ– प्रभु सर्वत्र व्याप्त हैं। हमारे हृदयों में भी स्थित हैं। उनसे हम सात छन्दोंवाली वेदवाणियों द्वारा कर्त्तव्यज्ञान प्राप्त करें।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

हे प्रयज्योऽग्ने दिवः पृथिव्या महिना सप्तजिह्वा वह्नयस्त्वया वच्यन्तां स त्वं जायमानः सन् रोदसी अपृणाः। उता प्ररिक्थाः अध ते चिन्नु सुखं भवेत् ॥२॥

Word-Meaning: - (आ) समन्तात् (रोदसी) द्यावापृथिव्यौ (अपृणाः) पिपर्ति (जायमानः) उत्पद्यमानः (उत्) अपि (प्र) (रिक्थाः) अतिरिणक्षि। अत्र वाच्छन्दसीति विकरणाभावः। (अध) अथ (नु) सद्यः (प्रयज्यो) यः प्रयजति तत्सम्बुद्धौ (दिवः) प्रकाशस्य (चित्) अपि (अग्ने) वह्निवद्विद्वन् (महिना) महिम्ना (पृथिव्याः) भूमेः (वच्यन्ताम्) उच्यन्ताम् (ते) तव (वह्नयः) वोढारः (सप्तजिह्वाः) काल्यादयः सप्त जिह्वा इव ज्वाला येषान्ते ॥२॥
Connotation: - यथा सूर्य्यपृथिव्योरग्नेश्च महिमा वर्त्तते तथा योऽग्निविद्यां भूगर्भविद्यां च जानाति स सततं सुखी भवेत् ॥। २॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O fire of cosmic yajna rising from the vedi, fill the heaven and earth with fragrance, fertility and prosperity. O yajaka, eliminate the weaknesses, exhaust the possibilities of excellence, and then retire and call it a day. And with the glory of heaven and majesty of the earth, the seven flames of fire with tongues of gold would speak for you in words loud and bold ringing across the spaces.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

More virtues of the learned persons are stated.

Anvay:

O performer of the Yajnas ! shining like the fire, instruct people about your glory, about the light and earth, along with the seven-tongued (in the form of seven scholars and fire flames, when you manifest yourself as great scientists, you fill the heaven and earth by your glory and cast away all the evils. Then, obviously, you attain the true delight.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - As there is the glory of the sun, earth and fire, in the same manner, one who acquires the knowledge of the science of fire and Geology, always enjoys happiness.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जसा सूर्य, पृथ्वी व अग्नीचा महिमा असतो तसे जो अग्निविद्या व भूगर्भविद्या जाणतो तो निरंतर सुखी होतो. ॥ २ ॥