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यस्ते॒ अनु॑ स्व॒धामस॑त्सु॒ते नि य॑च्छ त॒न्व॑म्। स त्वा॑ ममत्तु सो॒म्यम्॥

English Transliteration

yas te anu svadhām asat sute ni yaccha tanvam | sa tvā mamattu somyam ||

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Pad Path

यः। ते॒। अनु॑। स्व॒धाम्। अस॑त्। सु॒ते। नि। य॒च्छ॒। त॒न्व॑म्। सः। त्वा॒। म॒म॒त्तु॒। सो॒म्यम्॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:51» Mantra:11 | Ashtak:3» Adhyay:3» Varga:16» Mantra:6 | Mandal:3» Anuvak:4» Mantra:11


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

Word-Meaning: - हे राजन् ! (यः) जो (ते) आपके (सुते) उत्पन्न सोमलता के रस में (स्वधाम्) अन्न (अनु, असत्) पीछे होवे (सः) वह (त्वा) आपको (ममत्तु) आनन्द देवे और आप (तन्वम्) शरीर को (नियच्छ) ग्रहण कीजिये (सोम्यम्) सोमलता में उत्पन्न का पान आदि आचरण कीजिये ॥११॥
Connotation: - हे राजन् ! जो आपके अनुकूल और धर्मात्मा होकर प्रजाओं को आनन्दित करे, वह लक्ष्मीवान् से ऐश्वर्य को प्राप्त होवे और आप इन्द्रियजित् होकर प्रजाओं को सिद्ध कीजिये ॥११॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सोमरक्षण से आनन्द प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] (यः) = जो सोम (ते स्वधां अनु) = तेरे आत्मधारक अन्न के अनुसार (असत्) = उत्पन्न होता है। आग्नेय भोजनों से उष्णवीर्य उत्पन्न होता है और सोम्य भोजनों से शीतवीर्य । (सुते) = उस सोम के उत्पन्न होने पर (तन्वं नियच्छ) = तू अपने शरीर का नियमन कर। शरीर के नियमन से सोम का शरीर में रक्षण होगा । [२] (सः) = वह रक्षित सोम (सोम्यम्) = सोमरक्षण में कुशल (त्वा) = तुझे (ममत्तु) = आनन्दित करें। सोमरक्षण के अनुपात में ही नीरोगता, निर्मलता व बुद्धि की तीव्रता प्राप्त होती है और हम वास्तविक आनन्द को प्राप्त करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम सात्त्विक सोम्य भोजन द्वारा शरीर में सोम का उत्पादन व रक्षण करें। यह रक्षित सोम हमारे आनन्द का वर्धन करे ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

हे राजन् ! यस्ते सुते स्वधामन्वसत्स त्वा ममत्तु त्वं तन्वं नियच्छ सोम्यमाचर ॥११॥

Word-Meaning: - (यः) विद्वान् (ते) तव (अनु) (स्वधाम्) अन्नम् (असत्) भवेत् (सुते) (नि) (यच्छ) निगृह्णीहि (तन्वम्) शरीरम् (सः) (त्वा) त्वाम् (ममत्तु) आनन्दतु (सोम्यम्) सोमे भवम् ॥११॥
Connotation: - हे राजन् ! यो भवदनुकूलो भूत्वा धर्मात्मा सन् प्रजा आनन्दयेत् स श्रीमत ऐश्वर्यं प्राप्नुयात्त्वं जितेन्द्रियो भूत्वा प्रजाः साधि ॥११॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord ruler of the world, whatever and whoever be in accord with your power and pleasure, pray control, direct, administer and order the body-polite into settled form, and may all that give you pleasure and satisfaction, lover and creator of soma peace as you are.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The duties of the rulers are underlined.

Anvay:

O King! one who gives you good food along with the drink of the Soma (invigorating juice of various herbs), gladden you. Control your body and do noble deeds which may bring about peace.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O King! let a righteous person be acceptable to you. Make your subjects happy and they obtain wealth from you. Controlling your senses, rule over your people.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे राजा! जो तुझ्या अनुकूल धर्मात्मा बनून प्रजेला आनंदित करतो त्याला श्रीमंताकडून ऐश्वर्य प्राप्त व्हावे व तू इंद्रियजित बनून प्रजेला संपन्न करावेस. ॥ ११ ॥