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इन्द्र॒ सोमाः॑ सु॒ता इ॒मे तान्द॑धिष्व शतक्रतो। ज॒ठरे॑ वाजिनीवसो॥

English Transliteration

indra somāḥ sutā ime tān dadhiṣva śatakrato | jaṭhare vājinīvaso ||

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Pad Path

इन्द्र॑। सोमाः॑। सु॒ताः। इ॒मे। तान्। द॒धि॒ष्व॒। श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो। ज॒ठरे॑। वा॒जि॒नी॒व॒सो॒ इति॑ वाजिनीऽवसो॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:42» Mantra:5 | Ashtak:3» Adhyay:3» Varga:5» Mantra:5 | Mandal:3» Anuvak:4» Mantra:5


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

Word-Meaning: - हे (वाजिनीवसो) रात्रि को वसानेवाले (शतक्रतो) बहुत कर्मों में कुशल (इन्द्र) अत्यन्त ऐश्वर्य के भोक्ता ! जो (इमे) ये (जठरे) प्रसिद्ध हुए इस संसार में (सोमाः) पदार्थ (सुताः) उत्पन्न हुए हैं उनको (दधिष्व) धारण करो ॥५॥
Connotation: - तभी मनुष्य पूर्ण विद्या और ऐश्वर्य्यवाले होवें कि जब सृष्टि में वर्त्तमान पदार्थों की विद्या को जानें ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

इन्द्र, शतक्रतु व वाजिनीवसु

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष ! (इमे) = ये (सोमाः) = सोम [वीर्यकण] (सुत्यः) = उत्पन्न किये गये हैं, हे (शतक्रतो) = शतवर्षपर्यन्त यज्ञों को करनेवाले जीव! (तान् दधिष्व) = उनको तू अपने में धारण कर । यज्ञादि कर्मों में लगे रहना ही सोमरक्षण का साधन है। [२] हे (वाजिनीवसो) = शक्तिप्रद अन्नों से अपने निवास को उत्तम बनानेवाले जीव ! तू इन सोमों को (जठरे) = अपने अन्दर ही धारण कर सोम्य अन्नों का सेवन होने पर सोम का रक्षण अधिक सम्भव होता है। आग्नेय भोजन सोमरक्षण के अनुकूल नहीं हैं।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण के लिए हम [क] जितेन्द्रिय बनें [इन्द्र], [ख] यज्ञादि उत्तम कर्मों में प्रवृत्त रहें [शतक्रतो], [ग] उत्तम सोम्य अन्नों का सेवन करें [वाजिनीवसो]।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

हे वाजिनीवसो शतक्रतो इन्द्र ! य इमे जठरे सोमाः सुतास्तान् दधिष्व ॥५॥

Word-Meaning: - (इन्द्र) परमैश्वर्यभोक्तः (सोमाः) पदार्थाः (सुताः) निष्पन्नाः (इमे) (तान्) (दधिष्व) (शतक्रतो) बहुकर्मप्रज्ञ (जठरे) जातेऽस्मिन् जगति (वाजिनीवसो) यो वाजिनीमुषसं वासयति तत्सम्बुद्धौ। वाजिनीत्युषसो ना०। निघं०१। ८ ॥५॥
Connotation: - तदैव मनुष्याः पूर्णविद्यैश्वर्य्याः स्युर्यदा सृष्टिस्थपदार्थविद्यां विजानन्तु ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, father of morning freshness, lord of a hundred acts of yajna, distilled are these soma essences. Take these, hold them safe in the treasury of this world for a fresh lease of life’s energy.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The subject of Agni is dealt.

Anvay:

O prosperous personal! splendid like the sun, you are blessed with deep knowledge and power of action, uphold the various things in the world which have been prepared and manufactured by men.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Men can become endowed with perfect knowledge and wealth, only when they know the physical sciences also.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जेव्हा माणूस सृष्टीतील विद्या जाणतो तेव्हाच तो पूर्ण विद्या व ऐश्वर्य प्राप्त करतो. ॥ ५ ॥