Go To Mantra
Viewed 403 times

स॒तःस॑तः प्रति॒मानं॑ पुरो॒भूर्विश्वा॑ वेद॒ जनि॑मा॒ हन्ति॒ शुष्ण॑म्। प्र णो॑ दि॒वः प॑द॒वीर्ग॒व्युरर्च॒न्त्सखा॒ सखीँ॑रमुञ्च॒न्निर॑व॒द्यात्॥

English Transliteration

sataḥ-sataḥ pratimānam purobhūr viśvā veda janimā hanti śuṣṇam | pra ṇo divaḥ padavīr gavyur arcan sakhā sakhīm̐r amuñcan nir avadyāt ||

Mantra Audio
Pad Path

स॒तःऽस॑तः। प्र॒ति॒ऽमान॑म्। पु॒रः॒ऽभूः। विश्वा॑। वे॒द॒। जनि॑म। हन्ति॑। शुष्ण॑म्। प्र। नः॒। दि॒वः। प॒द॒ऽवीः। ग॒व्युः। अर्च॑न्। सखा॑। सखी॑न्। अ॒मु॒ञ्च॒त्। निः। अ॒व॒द्यात्॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:31» Mantra:8 | Ashtak:3» Adhyay:2» Varga:6» Mantra:3 | Mandal:3» Anuvak:3» Mantra:8


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर कौन सुखी होते हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! जो पुरुष (पुरोभूः) पहिले से चिताता (सतःसतः) विद्यमान विद्यमान के (प्रतिमानम्) परिमाण के साधक को वा (विश्वा) संपूर्ण (जनिमा) उत्पन्न हुए पदार्थों को (वेद) जानता और (शुष्णम्) शोककारक दुःख को (हन्ति) नाश करता है वह (गव्युः) अपने को विद्या चाहनेवाला (नः) हम लोगों के (दिवः) प्रकाश की (पदवीः) प्रतिष्ठाओं को (प्र) प्राप्त करे (सखीन्) मित्रों का (अर्चन्) सत्कार करता हुआ (सखा) मित्र होकर (अवद्यात्) धर्मरहित आवरण से (निः) निरन्तर (अमुञ्चत्) पृथक् करे वह अत्यन्त सुख को प्राप्त हो ॥८॥
Connotation: - वे ही मनुष्य सुखी होते हैं, जो कार्य्यकारणरूप सृष्टि को जान और संपूर्ण जनों के मित्र हो सम्पूर्ण जनों को पाप के आचरण से पृथक् करके धर्म के आचरण में प्रवृत्त करें, वे ही सत्य मित्र हैं ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अवद्य-मोचन

Word-Meaning: - [१] वे प्रभु (सतः सतः) = प्रत्येक सद्वस्तु के प्रतिमानम् प्रतिमान हैं अपनी इयत्ता से मापनेवाले हैं। वस्तुतः प्रत्येक सद्वस्तु को उस उस उत्तमता को प्राप्त करानेवाले प्रभु ही हैं। (पुरोभूः) = वे इस सृष्टि से पहले से ही हैं 'हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे'। वे प्रभु (जनिमा वेद) = सब उत्पन्न होनेवाली वस्तुओं को जानते हैं। उनकी अध्यक्षता में ही प्रकृति इन चराचर पदार्थों को जन्म देती है। प्रभु ही (शुष्णम्) = हमारा शोषण करनेवाले इस कामदेव को (हन्ति) = विनष्ट करते हैं। [२] वे प्रभु (नः) = हमारे लिए (दिवः पदवी:) = ज्ञानमार्ग पर ले चलनेवाले हैं। (गव्युः) = हमारे लिए इन प्रशस्त इन्द्रियों को प्राप्त कराने की कामनावाले हैं। (अर्चन् सखा) = [अर्च् to shine] वे हमारे देदीप्यमान मित्र हैं। अपनी इस ज्ञानदीप्ति द्वारा (सखीन्) = हम मित्रों को (अवद्यात्) = अशुभ व पाप से (निरमुञ्चत्) = मुक्त करते हैं।
Connotation: - भावार्थ—प्रभु सर्वव्यापक हैं। सब सूर्यादि को जहाँ देवत्व [दीप्ति] प्राप्त करा रहे हैं, वहाँ हमें भी, वासना- विनाश द्वारा पाप से मुक्त कर रहे हैं।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनः के सुखिनो भवन्तीत्याह।

Anvay:

हे मनुष्याः यः पुरोभूः सतःसतः प्रतिमानं विश्वा जनिमा वेद शुष्णं हन्ति स गव्युर्नो दिवः पदवीः प्रयच्छेत्सखीनर्चन् सखा सन्नवद्यान्निरमुञ्चत्सोऽतुलं सुखमाप्नुयात् ॥८॥

Word-Meaning: - (सतःसतः) विद्यमानस्य विद्यमानस्य (प्रतिमानम्) परिमाणसाधकम् (पुरोभूः) यः पुरस्ताद्भावयति सः (विश्वा) सर्वाणि (वेद) जानाति (जनिमा) जन्मानि (हन्ति) (शुष्णम्) शोककरं दुःखम् (प्र) (नः) अस्माकम् (दिवः) प्रकाशस्य (पदवीः) प्रतिष्ठाः (गव्युः) आत्मनो गां वाणीमिच्छुः (अर्चन्) सत्कुर्वन् (सखा) सुहृत्सन् (सखीन्) सुहृदः (अमुञ्चत्) मुच्यात् (निः) (अवद्यात्) निन्द्यादधर्म्यादाचरणात् ॥८॥
Connotation: - त एव मनुष्याः सुखिनो भवन्ति ये कार्य्याकारणरूपां सृष्टिं विदित्वा सर्वेषां सखायो भूत्वा सर्वान् पापाचरणात्पृथक्कृत्य धर्माचरणे प्रवर्त्तयेयुः। त एव सत्यसुहृदः सन्तीति ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The man on top, friend and comrade of the nation, first among all, who knows the models, equals and adversaries existing from moment to moment, who knows everything that is born on earth, who removes drought and poverty, who rises higher step by step to the light of heaven, who loves friends and respects seniors, may, we pray, save us from calumny, malignity and ill-will.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Who are happy is told further.

Anvay:

O men! the person who warns all before hand (about the evil consequences of an ignoble act), he knows the means for manufacturing an article and all things that have been produced. He removes all miseries causing grief. Desiring to have better and proper use of his speech, let him come into limelight or attain good reputation. Respecting his friends properly, let him keep them away from all reproachable evils and thus let him enjoy un-paralleled happiness.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Those persons only enjoy happiness, who know nature of the cause and effect in the world, and are friendly to all. They urge upon all to do noble deeds and to keep themselves away from all evil acts. They are true friends of the men.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - तीच माणसे सुखी होतात जी कार्यकारणरूपी सृष्टीला जाणून संपूर्ण लोकांचे मित्र बनतात. सर्व लोकांना पापाचरणापासून पृथक करून धर्माच्या आचरणात प्रवृत्त करतात. तेच खरे मित्र असतात. ॥ ८ ॥