Go To Mantra
Viewed 415 times

अग्ने॒ दा दा॒शुषे॑ र॒यिं वी॒रव॑न्तं॒ परी॑णसम्। शि॒शी॒हि नः॑ सूनु॒मतः॑॥

English Transliteration

agne dā dāśuṣe rayiṁ vīravantam parīṇasam | śiśīhi naḥ sūnumataḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

अग्ने॑। दाः। दा॒शुषे॑। र॒यिम्। वी॒रऽव॑न्तम्। परी॑णसम्। शि॒शी॒हि। नः॒। सू॒नु॒ऽमतः॑॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:24» Mantra:5 | Ashtak:3» Adhyay:1» Varga:24» Mantra:5 | Mandal:3» Anuvak:2» Mantra:5


SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब विद्वान् के विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

Word-Meaning: - हे (अग्ने) अग्नि के सदृश तेजयुक्त विद्वान् पुरुष ! जैसे आप (दाशुषे) सबके सुखदाता जन के लिये (परीणसम्) बहुत प्रकारयुक्त (वीरवन्तम्) बहुत वीरों से विशिष्ट (रयिम्) धन को (दाः) दीजिये और वैसे ही (सूनुमतः) पुत्रयुक्त (नः) हम लोगों को (शिशीहि) प्रबल कीजिये ॥५॥
Connotation: - जो विद्या और धन के दाता विद्वान् हों, उनके प्रति ऐसा कहना चाहिये कि आप लोग हम लोगों की सब प्रकार वृद्धि करो ॥५॥ इस सूक्त में अग्नि, राजा और विद्वानों के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ की पूर्व सूक्तार्थ के साथ संगति जाननी चाहिये ॥ यह चौबीसवाँ सूक्त और चौबीसवाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

धन तथा तीव्रबुद्धि

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन् ! (दाशुषे) = आपके प्रति अर्पण करनेवाले मेरे लिए (रयिं दाः) = धन को दीजिए। जो धन (वीरवन्तम्) = वीरसन्तानोंवाला है अथवा हमें वीरतायुक्त करनेवाला है तथा (परीणसम्) = पर्याप्त है [परिपूर्वक व्याप्त्यर्थक नस् धातु] । हम धन द्वारा अपनी सब आवश्यकताओं को पूरा कर सकें तथा धन प्राप्त करके विलास के मार्ग पर न चल पड़ें। यह मार्ग हमारी अवीरता का कारण बनेगा। [२] (सूनुमतः) प्रशस्त पुत्रोंवाले (नः) = हमें आप (शिशीहि) = बड़ा तीव्रबुद्धि व तेजस्वी बनाइए । धन के कारण हम सन्तानों का उचित पालन व पोषण कर सकें। उनके जीवनों को प्रशस्त बनायें। स्वयं भी धन द्वारा स्वाध्याय के साधनों को जुटाते हुए हम तीव्र बुद्धि बनें । यह धन हमें तेजस्वी बनाए ।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु हमें वह धन दें, जिससे कि हम सन्तानों का उत्तम निर्माण करें और स्वयं तेजस्वी व तीव्रबुद्धि बनें । सूक्त की मूल भावना इतनी ही है कि मैं प्रभुस्मरण करता हूँ, प्रभु मेरे जीवन को उत्तम बनाते हैं। अगले सूक्त का भी यही विषय है -

SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ विद्वद्विषयमाह।

Anvay:

हे अग्ने ! यथा त्वं दाशुषे परीणसं वीरवन्तं रयिन्दास्तथैव सूनुमतो नोऽस्माञ्छिशीहि ॥५॥

Word-Meaning: - (अग्ने) (दाः) देहि (दाशुषे) सर्वेषां सुखदात्रे (रयिम्) धनम् (वीरवन्तम्) बहवो वीरा यस्मिँस्तम् (परीणसम्) बहुविधम्। परीणस इति बहुनाम। निघं० ३। १। (शिशीहि) तीक्ष्णान् सम्पादय। अत्र वाच्छन्दसीति विकरणस्य श्लुरन्येषामपि दृश्यत इति दीर्घश्च। (नः) अस्मान् (सूनुमतः) पुत्रयुक्तान् ॥५॥
Connotation: - ये विद्याधनदातारः स्युस्तान्प्रत्येवं वाच्यं भवन्तोऽस्मान्सर्वथा वर्द्धयन्त्विति ॥५॥ अत्राग्निराजविद्वद्गुणवर्णनादेतदर्थस्य पूर्वसूक्तार्थेन सह सङ्गतिरस्तीति वेद्यम् ॥ इति चतुर्विंशतितमं सूक्तं स एव वर्गश्च समाप्तः ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, lord of light and life of life, give to the man of charity and yajna wealth of the world in abundance and bless him with brave children. And, we pray, blest with children as we are, strengthen, sharpen and brighten us in our life.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The attributes of the learned men are further explained.

Anvay:

O enlightened leader! please grant your favor to the person who bestow, happiness on others, ample wealth and progeny (by imparting education) to them. Make us prosperous and blessed with noble and righteous progeny.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - The wealthy men should pray to those who are the givers of true knowledge. In this way, please make us grow in all ways.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जे विद्या व धनदाते विद्वान असतील त्यांना असे म्हणावे की तुम्ही आमची सर्व प्रकारे वाढ करा. ॥ ५ ॥