Go To Mantra
Viewed 420 times

अव॑र्धयन्त्सु॒भगं॑ स॒प्त य॒ह्वीः श्वे॒तं ज॑ज्ञा॒नम॑रु॒षं म॑हि॒त्वा। शिशुं॒ न जा॒तम॒भ्या॑रु॒रश्वा॑ दे॒वासो॑ अ॒ग्निं जनि॑मन्वपुष्यन्॥

English Transliteration

avardhayan subhagaṁ sapta yahvīḥ śvetaṁ jajñānam aruṣam mahitvā | śiśuṁ na jātam abhy ārur aśvā devāso agniṁ janiman vapuṣyan ||

Mantra Audio
Pad Path

अव॑र्धयन्। सु॒ऽभग॑म्। स॒प्त। य॒ह्वीः। श्वे॒तम्। ज॒ज्ञा॒नम्। अ॒रु॒षम्। म॒हि॒ऽत्वा। शिशु॑म्। न। जा॒तम्। अ॒भि। आ॒रुः॒। अश्वाः॑। दे॒वासः॑। अ॒ग्निम्। जनि॑मन्। व॒पु॒ष्य॒न्॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:1» Mantra:4 | Ashtak:2» Adhyay:8» Varga:13» Mantra:4 | Mandal:3» Anuvak:1» Mantra:4


SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब स्त्री पुरुष के विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

Word-Meaning: - हे (जनिमन्) प्रशंसित जन्म वा (वपुष्यन्) अपने को रूप की इच्छा करनेवाले विद्वन् ! जैसे (अश्वाः) विद्या व्याप्तिशील (देवासः) विद्वान् जन (श्वेतम्) श्वेतवर्ण (अरुषम्) अश्वरूप (अग्निम्) अग्नि को (सप्तयह्वीः) सात महान् स्त्री (सुभगम्) सुन्दर ऐश्वर्ययुक्त (जज्ञानम्) जन्म दिलानेवाले का (महित्वा) सत्कार (जातम्) उत्पन्न हुए (शिशुम्) बालक के (न) समान (अवर्धयन्) बढ़ावें वे निरन्तर सुख को (अभ्यारुः) प्राप्त होती हैं वैसे तुम भी प्रयत्न करो ॥४॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे सात स्त्रियाँ एक पुत्र की वृद्धि करती हैं, वैसे जो अग्निविद्या को जानकर ऐश्वर्य्य की उन्नति करते हैं, वे महिमा को प्राप्त होते हैं ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ब्राह्म-तेज

Word-Meaning: - [१] वेदवाणियाँ सात छन्दों में होने के कारण 'सप्त' हैं, अर्थ के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण होने के कारण 'यह्वी' हैं। ये (सप्त यह्वीः) = सातों महत्त्वपूर्ण वाणियाँ (सुभगम्) = उस उत्तम भगवाले भगवान् [प्रभु] को, समग्र ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य के आधारभूत प्रभु को (अवर्धयन्) = बढ़ाती हैं। ये सब उस प्रभु का ही वर्णन करती हैं, 'सर्वे वेदाः यत् पदमामनन्ति' । उस प्रभु का वर्णन करती हैं, जो कि (श्वेतम्) = शुद्ध ही शुद्ध हैं, निर्मल हैं (जज्ञानम्) = सर्वत्र प्रादुर्भूत हो रहे हैं सब पदार्थों में उन्हीं की तो दीप्ति दीप्त हो रही है। (महित्वा) = अपनी महिमा से जो आरोचमान हैं, क्या समुद्र में, क्या पृथिवी में, अन्तरिक्ष में बहनेवाली वायु में और द्युलोकस्थ सूर्य में सर्वत्र प्रभु की महिमा व्याप्त है। [२] (जातं शिशुं न) जैसे उत्पन्न हुए हुए बच्चे को देखने के लिए सब बन्धु आते हैं, इसी प्रकार प्रादुर्भूत हुए हुए उस (अग्निम्) = अग्नि को, अग्रणी प्रभु को (अश्वा:) = कर्मों में व्याप्त होनेवाले (देवासः) = देववृत्ति के लोग (अभ्यासः) = सब ओर से आते हैं और (जनिमन्) = उस प्रभु के प्रादुर्भाव में (वपुष्यन्) [वपुर्दीप्तिमकुर्वन्] = अपने शरीर की दीप्ति को करते हैं। हृदय में प्रभु का प्रकाश होता है, तो सारा शरीर चमक उठता है। वस्तुतः यही ब्रह्म तेज की प्राप्ति के नाम से कहा जाता है, इस तेज के सामने अन्य तेज फीके पड़ जाते हैं ।
Connotation: - भावार्थ– सब वेदवाणियाँ प्रभु का प्रतिपादन करती हैं। वस्तुत: सब पदार्थों में प्रभु की महिमा प्रकट हो रही है। कर्मशील देव प्रभु के प्रकाश को अपने में देखते हैं और ब्रह्म - तेज से दीप्त हो उठते हैं।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ स्त्रीपुरुषविषयमाह।

Anvay:

हे जनिमन्वपुष्यन् विद्वन् ! यथा अश्वा देवासः श्वेतमश्वमरुषमग्निं सप्त यह्वीः सुभगं जज्ञानं महित्वा जातं शिशुं नावर्धयँस्तास्सततं सुखमभ्यारुस्तथा त्वमपि प्रयतस्व ॥४॥

Word-Meaning: - (अवर्धयन्) वर्धयन्तु (सुभगम्) शोभनैश्वर्य्यम् (सप्त) सप्तसंख्याकाः (यह्वी:) महत्यः स्त्रियः (श्वेतम्) श्वेतवर्णम् (जज्ञानम्) जनकम् (अरुषम्) अश्वम्। अरुष इति अश्वनाम। निघं०१। १४। (महित्वा) पूजयित्वा (शिशुम्) बालकम् (न) इव (जातम्) उत्पन्नम् (अभि) (आरुः) प्राप्नुवन्तु (अश्वाः) विद्याप्राप्तिशीलाः (देवासः) विद्वांसः (अग्निम्) (जनिमन्) प्रशस्ता जनिर्जन्म विद्यते यस्य तत्सम्बुद्धौ (वपुष्यन्) आत्मनो वपुरूपमिच्छन्। वपुरिति रूपनाम। निघं० ३। ७ ॥४॥
Connotation: - अत्रोपमालङ्कारः। यथा सप्त स्त्रिय एकं पुत्रं वर्धयन्ति तथा येऽग्निविद्यां विदित्वैश्वर्य्यमुन्नयन्ते ते महिमानमाप्नुवन्ति ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Seven flames of fire as seven streams of water with power and grandeur raise and elevate this glorious effulgence emerging red and white in majesty. While this Agni arises assuming a wondrous form, high-priests of brilliance and generous ambition rush to develop and adorn it as a new born baby.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The attributes and duties of husbands and wives.

Anvay:

O learned persons of pure birth! you desire to make yourself charming (by health and noble virtues). You should also endeavor in the same manner as the enlightened persons are always eager to acquire more and more knowledge. They also generate white-coloured horse power (in the form of electrically), which is bestower of happiness or, as seven great women help in the development of a fortunate and wonderful child and enjoy happiness. They thus are discharging their duty.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - As seven women help in the wonderful growth of a good child, so those who augment prosperity by knowing the Science of fire, become great and renowned.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जशा सात स्त्रिया एका पुत्राला वाढवितात, तसे जे अग्निविद्या जाणून ऐश्वर्य वाढवितात त्यांचा महिमा वाढतो. ॥ ४ ॥