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अ॒यं वां॑ मित्रावरुणा सु॒तः सोम॑ ऋतावृधा। ममेदि॒ह श्रु॑तं॒ हव॑म्॥

English Transliteration

ayaṁ vām mitrāvaruṇā sutaḥ soma ṛtāvṛdhā | mamed iha śrutaṁ havam ||

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Pad Path

अ॒यम्। वा॒म्। मि॒त्रा॒व॒रु॒णा॒। सु॒तः। सोमः॑। ऋ॒त॒ऽवृ॒धा॒। मम॑। इत्। इ॒ह। श्रु॒त॒म्। हव॑म्॥

Rigveda » Mandal:2» Sukta:41» Mantra:4 | Ashtak:2» Adhyay:8» Varga:7» Mantra:4 | Mandal:2» Anuvak:4» Mantra:4


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को कहते हैं।

Word-Meaning: - हे (तावृधा) सत्य से बड़े हुए (मित्रावरुणा) प्राण और उदान के समान वर्त्तमान अध्यापको ! जो (अयम्) यह (वाम्) तुम दोनों से (सोमः) ओषधियों का रस (सुतः) उत्पन्न हुआ उसको पीके (इत्) ही (इह) यहाँ (मम) मेरे (हवम्) आह्वान को (श्रुतम्) सुनिये ॥४॥
Connotation: - जैसे वायु सबसे रस को ग्रहण कर वर्षाते हैं, वैसे ही सत्य विद्याओं को सुनकर सबके लिये सुख देना चाहिये ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

नीरोग व निष्पाप

Word-Meaning: - १. प्रस्तुत मन्त्र में 'मित्रावरुण' द्वारा जीव को यह कहते हैं कि 'प्रमीतेः अयते' मृत्यु व रोगों से अपने को बचानेवाला हो 'पापात् निवारयति' पाप से अपने को निवारित करे। 'शरीर के दृष्टिकोण से रोगों से बचना तथा मन के दृष्टिकोण से पाप से दूर रहना' यही मित्र और वरुण बनना है। ये मित्र और वरुण अपने में ॠत का वर्धन करते हैं इनके सब कार्य ठीक समय व ठीक स्थान पर होते हैं । हे (ऋतावृधा मित्रावरुणा) = ॠत का अपने में वर्धन करनेवाले मित्र और वरुण ! [नीरोग व निष्पाप जीवनवाले व्यक्ति !] (अयं सोमः) = यह सोम [= वीर्यशक्ति] (वाम्) = आप के लिए (सुतः) = उत्पादित हुआ है। इस सोम द्वारा ही तो वस्तुतः वे मित्र और वरुण नीरोगता व निष्पापता को प्राप्त करते हैं। इस सोम रक्षण के लिए सब कार्यों को ऋत से करना आवश्यक है। यह ऋत का पालन-ठीक समय व ठीक स्थान पर कार्यों को करना-मनुष्य को सोमरक्षण के योग्य बनाएगा। २. प्रभु इन मित्र वरुण से कहता है कि इस प्रकार ऋतपालन द्वारा सोमरक्षण करते हुए तुम इह इस जीवन में (इत्) = निश्चय से (मम) = मेरी (हवम्) = प्रेरणा को (श्रुतम्) = सुनो। यह सोमरक्षकपुरुष हृदयस्थ- प्रभु की प्रेरणा को सुनने के योग्य बनता है।
Connotation: - भावार्थ - ऋतपालन से वीर्य का शरीर में रक्षण होता है। इस सोमरक्षण से मनुष्य नीरोग व निष्पाप बनता है। ऐसा बनने पर हृदयस्थ प्रभु की प्रेरणा को यह सुन पाता है।
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

हे तावृधा मित्रावरुणा योऽयं वा सोमः सुतस्तत्पीत्वेदिह मम हवं श्रुतम् ॥४॥

Word-Meaning: - (अयम्) (वाम्) युवाभ्याम् (मित्रावरुणा) प्राणोदानवद्वर्त्तमानौ (सुतः) निष्पादितः (सोमः) (तावृधा) सत्येन वृद्धौ (मम) (इत्) (इह) (श्रुतम्) (हवम्) ॥४॥
Connotation: - यथा वायवः सर्वस्माद्रसं गृहीत्वा वर्षयन्ति तथैव सत्या विद्याः श्रुत्वा सर्वेभ्यः सुखं देयम् ॥४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Mitra and Varuna, dear as breath of life and soothing as morning mist, eminent in dedication to truth and law, the soma of life is distilled and prepared for you. Listen to this call and invitation of mine and come here and now.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

More about the teachers and pupils.

Anvay:

O advancers or propagators of truth ! O Mitra and Varuna (king and prime minister) ! you are like Prana and Udana (vital breaths ). This juice of Soma (nourishing herbs) has been prepared for you. Drink it and listen to my invocation.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - As the winds take sap from all articles and then rain it down, so men should study all the sciences and bestow happiness upon all.
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जसे वायू सर्वांकडून रस ग्रहण करून वृष्टी करतात तसेच सत्य विद्येचे श्रवण करून सर्वांना सुख दिले पाहिजे. ॥ ४ ॥