Go To Mantra
Viewed 400 times

सिन्धु॒र्न क्षोदः॒ शिमी॑वाँ ऋघाय॒तो वृषे॑व॒ वध्रीँ॑र॒भि व॒ष्ट्योज॑सा। अ॒ग्नेरि॑व॒ प्रसि॑ति॒र्नाह॒ वर्त॑वे॒ यंयं॒ युजं॑ कृणु॒ते ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑॥

English Transliteration

sindhur na kṣodaḥ śimīvām̐ ṛghāyato vṛṣeva vadhrīm̐r abhi vaṣṭy ojasā | agner iva prasitir nāha vartave yaṁ-yaṁ yujaṁ kṛṇute brahmaṇas patiḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

सिन्धुः॑। न। क्षोदः॑। शिमी॑ऽवान्। ऋ॒घा॒य॒तः। वृषा॑ऽइव। वध्री॑न्। अ॒भि। व॒ष्टि॒। ओज॑सा। अ॒ग्नेःऽइ॑व। प्रऽसि॑तिः। न। अ॑ह। वर्त॑वे। यम्ऽय॑म्। युज॑म्। कृ॒णु॒ते। ब्रह्म॑णः। पतिः॑॥

Rigveda » Mandal:2» Sukta:25» Mantra:3 | Ashtak:2» Adhyay:7» Varga:4» Mantra:3 | Mandal:2» Anuvak:3» Mantra:3


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

Word-Meaning: - जो (शिमीवान्) प्रशस्त कर्मयुक्त (ब्रह्मणः,पतिः) वेद का रक्षक विद्वान् पुरुष (क्षोदः) जलको (सिन्धुः,न) समुद्र जैसे अपने में लय करता (वध्रीन्) वा साधारण बैलों को (अभि) सन्मुख होके जैसे (वृषेव) अति बलवान् बैल मारता वैसे (ओजसा) बल से (घायतः) सत्य धर्म के नाशक शत्रुओं का नाश करता सत्य को (वष्टि) चाहता और (अग्नेरिव) अग्नि से जैसे (प्रसिति) बन्धन (वर्त्तवे) वर्त्तने के अर्थ (न,अह) नहीं रहता अर्थात् स्वाधीनता होती है वैसे (यंयम्) जिस-जिसको (युजम्) शुभ गुणयुक्त (कृणुते) करता है वह उसको सुखी करता है ॥३॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो मनुष्य पुरुषार्थी समुद्र के तुल्य गम्भीर धनाढ्य वृषभ के तुल्य बलवान् अग्नि के तुल्य शत्रुओं के जलानेवाले सत्य कामनायुक्त होते हैं, वे समस्त शिल्प विद्या को सिद्ध कर सकते हैं ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

विजेता-अपराजित

Word-Meaning: - १. (ब्रह्मणस्पतिः) = ज्ञान का स्वामी प्रभु (यंयम्) = जिस-जिस को युजं कृणुते साथी बनाता है, वह (शिमीवान्) = उत्कृष्ट कर्मोंवाला होता हुआ (ऋघायतः) = हिंसा करनेवाले शत्रुओं को (ओजसा) = बल द्वारा (अभिवष्टि) = [अभितः हन्तुं कामयते सा०] अन्दर-बाहर नष्ट करने की कामना करता है। उसी प्रकार (नः) = जैसे कि (सिन्धुः) = नदी (क्षोदः) = किनारे को [क्षुद्यमानं कूलं सा०] और (इव) = जैसे कि वृषा शक्तिशाली (वृषभ वधीन्) = निर्वीर्य बैल को। २. जैसे (अग्नेः) = अग्नि की (प्रसितिः) = ज्वाला (अह) = निश्चय से (वर्तवे न) = निवारण के लिए नहीं होती है, उसी प्रकार यह प्रभुमित्र शत्रुओं से पराजित नहीं किया जा सकता ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभुमित्र शत्रुओं का विजेता तथा शत्रुओं से सदा अपराजित होता है।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

यः शिमीवान् ब्रह्मणस्पतिः क्षोदः सिन्धुर्न वध्रीनभि वृषेवौजसा घायतो नाशं करोति सत्यं वष्टि। अग्नेरिव प्रसितिर्वर्त्तवे नाह भवति यंयं युजं कृणुते स तं तं सुखिनं करोति ॥३॥

Word-Meaning: - (सिन्धुः) समुद्रः (न) इव (क्षोदः) जलम्। क्षोद इत्युदकना० निघं० १। १२ (शिमीवान्) प्रशस्तकर्मयुक्तः (घायतः) तं सत्यं हिंसतः। अत्र हन् धातोश्छान्दसो वर्णलोप इति तलोपो बाहुलकादौणादिको डण् प्रत्ययः (वृषेव) यथा बलिष्ठो वृषभः (वध्रीन्) वृद्धान् वृषभान् (अभि) आभिमुख्ये (वष्टि) कामयते (ओजसा) बलेन (अग्नेरिव) (प्रसितिः) बन्धनम् (न) निषेधे (अह) (वर्त्तवे) (यंयम्) (युजम्) (कृणुते) (ब्रह्मणः) (पतिः) ॥३॥
Connotation: - अत्रोपमालङ्कारः। ये मनुष्याः पुरुषार्थिनः सन्ति समुद्रवद्गम्भीरा धनाढ्या वृषभवद्बलिष्ठा अग्निवच्छत्रुदाहकाः सत्यकामाः स्युस्ते सर्वां शिल्पविद्यां साद्धुं शक्नुवन्ति ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Just as the deep sea receives and stills the impetuous river in flood, as the mighty man of action subdues the forces of violence, and as the strong and virile bull overthrows the old broken bullock with its strength, so does the man whom Brahmanaspati chooses as his friend and associate for his purpose overcome opposition with his valour and lustre. Like the rising flames of fire there is no looking back for him, no resistance against him.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The attributes of an ideal person are mentioned.

Anvay:

As the ocean stores all the water in it flowing from the earth, and as a stronger bull attacks the smaller one, same way a noble and learned person performs nice acts, protects the Vedas or the scholars on account of its power. Such a person annihilates the opponents of real religion, and loves the other category. He is always independent and free from bonds. Those who receive good virtues from him, they are always happy.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Here is a simile. The persons who ae grave like ocean, are rich and strong like a bull. They always strive to annihilate the enemies like fire. Such persons can accomplish all the science and technology.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात उपमालंकार आहे. जी माणसे पुरुषार्थी समुद्राप्रमाणे गंभीर, धनाढ्य, वृषभाप्रमाणे बलवान, अग्नीप्रमाणे शत्रूंचे दहन करणारी, सत्यकामनायुक्त असतात, ती संपूर्ण शिल्पविद्या सिद्ध करू शकतात. ॥ ३ ॥