Go To Mantra
Viewed 447 times

द्यावा॑ चिदस्मै पृथि॒वी न॑मेते॒ शुष्मा॑च्चिदस्य॒ पर्व॑ता भयन्ते। यः सो॑म॒पा नि॑चि॒तो वज्र॑बाहु॒र्यो वज्र॑हस्तः॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑॥

English Transliteration

dyāvā cid asmai pṛthivī namete śuṣmāc cid asya parvatā bhayante | yaḥ somapā nicito vajrabāhur yo vajrahastaḥ sa janāsa indraḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

द्यावा॑। चि॒त्। अ॒स्मै॒। पृ॒थि॒वी इति॑। न॒मे॒ते॒ इति॑। शुष्मा॑त्। चि॒त्। अ॒स्य॒। पर्व॑ताः। भ॒य॒न्ते॒। यः। सो॒म॒ऽपाः। नि॒ऽचि॒तः। वज्र॑ऽबाहुः। यः। वज्र॑ऽहस्तः। सः। ज॒ना॒सः॒। इन्द्रः॑॥

Rigveda » Mandal:2» Sukta:12» Mantra:13 | Ashtak:2» Adhyay:6» Varga:9» Mantra:3 | Mandal:2» Anuvak:2» Mantra:13


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर सूर्य विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

Word-Meaning: - हे (जनासः) मनुष्यो ! तुमको (अस्मै) इस सूर्यमण्डल के लिये (द्यावापृथिवी) आकाश और भूमि के समान बृहत् पदार्थ (चित्) भी (नमेते) अति सामर्थ्ययुक्त शब्दायमान होते हैं (अस्य) इस सूर्यमण्डल के (शुष्मात्) बल से (चित्) ही (पर्वताः) मेघ (भयन्ते) भयभीत होते हैं (यः) जो (सोमपाः) रस को पीता (निचितः) निरन्तर अनेक पदार्थों से इकट्ठा किया गया (वज्रबाहुः) और (यः) जो बाहुओं के तुल्य किरण बलयुक्त तथा (वज्रहस्तः) जिसकी हाथों के समान किरणें हैं वह (इन्द्रः) सूर्य्यलोक जानने योग्य है ॥१३॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जिसके आकर्षण से प्रकाश और क्षिति नमे हुए वर्त्तमान हैं, मेघ भ्रमि रहे हैं, हाथों के समान जो रस को ऊर्ध्व पहुँचाता है, उसका यथावत् अच्छे प्रकार प्रयोग करो ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वज्रहस्त' प्रभु

Word-Meaning: - १. (अस्मै) = इस प्रभु के लिए (द्यावा पृथिवी चित्) = द्युलोक व पृथिवीलोक भी निश्चय से (नमेते) = नमन करते हैं, अर्थात् इसके शासन में चलते हैं। (अस्य शुष्मात्) = इसके शत्रुशोषक बल से (पर्वताः चित्) = पर्वत भी (भयन्ते) = भयभीत होते हैं, अर्थात् दृढ़ से दृढ़ पर्वत को भी विदीर्ण करने में वे प्रभु समर्थ हैं । २. (यः) = जो (सोम-पा:) = इस उत्पन्न जगत् के रक्षक हैं । (नि- चितः) = [चिकेति= to observe, see, perceive] निश्चय से सर्वद्रष्टा हैं । (वज्रबाहुः) = वज्रसदृश बाहुवाले हैं—कभी न थकनेवाले हैं– अनन्त शक्तिसम्पन्न हैं। (यः) = जो (वज्रहस्तः) = अशुभमार्ग पर जानेवालों के लिए हाथ में वज्र को लिये हुए हैं, अर्थात् पापियों को दण्डित करनेवाले हैं। (जनासः) = लोगो ! (स इन्द्रः) = वे ही परमैश्वर्यशाली प्रभु 'इन्द्र' नामवाले हैं ।
Connotation: - भावार्थ – अनन्तशक्तिसम्पन्न वे प्रभु हैं। वे ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के शासक हैं। पापियों को दण्ड देनेवाले वे ही हैं ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनः सूर्यविषयमाह।

Anvay:

हे जनासो युष्माभिरस्मै द्यावापृथिवी चिन्नमेते अस्य शुष्माच्चित्पर्वता भयन्ते यः सोमपा निचितो वज्रबाहुर्यो वज्रहस्तोऽस्ति स इन्द्रो वेदितव्यः ॥१३॥

Word-Meaning: - (द्यावा) द्यौः (चित्) इव (अस्मै) सूर्याय (पृथिवी) भूमिः (नमेते) प्रभूतं शब्दयेते (शुष्मात्) बलात् (चित्) अपि (अस्य) सूर्य्यस्य (पर्वताः) मेघाः (भयन्ते) बिभ्यति। अत्र व्यत्ययेनात्मनेपदम्। (यः) (सोमपाः) यः सोमरसं पिबति सः (निचितः) निश्चितश्चितः (वज्रबाहुः) बाहुवत् किरणबलः (यः) (वज्रहस्तः) वज्राः किरणा हस्ता यस्य (सः) (जनासः) (इन्द्रः) ॥१३॥
Connotation: - हे मनुष्या यस्याकर्षणेन प्रकाशक्षिती नम्रे इव वर्त्तेते मेघा भ्रमन्ति हस्ताभ्यामिव यो रसमूर्ध्वन्नयति तं यथावत्संप्रयुञ्जत ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Heaven and earth bow to him in homage. Clouds cower and mountains quake for fear of his power. He is the creator, preserver and promoter of the soma nectar and ecstasy of life, knowledge concentrate and power both, thunder-armed for punishment and protection, flower-handed with kusha grass for blessing and benediction. Such is Indra, lord of light and might and life of life, O children of the earth.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Again about the sun-power is mentioned.

Anvay:

O men! the firmament and earth like substances create roar because of the solar power. The clouds get frightened with it's power. Like a person drinking SOMA and herbal juices, the sun with its powerful arms, like rays and hands, like thunderbolt establishes its supremacy. We all should know its greatness.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Because of the solar gravitation, the firmament and earth draw their existence and the clouds make a sound. The sun extracts up the moisture with its own rays-like hands and arms. We should take maximum use of the solar energy.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे माणसांनो! ज्याच्या आकर्षणाने प्रकाश व क्षिती नमलेले आहेत, मेघ भ्रमण करीत आहेत, हात जसे कार्य करतात तसे जो रस वर पोचवितो त्या (सूर्याचा) चा यथायोग्य उपयोग करून घ्या. ॥ १३ ॥