Word-Meaning: - [१] (यत्र) = जिस पुरुष में (ओषधी:) = ओषधियाँ (समग्मत) = इस प्रकार संगत होती हैं, (इव) = जैसे कि (राजानः समितौ) = राजा लोग किसी समिति में एकत्रित होते हैं, (स विप्रः) = वह रोगी के शरीर का ओषधि प्रयोग से विशेष रूप से पूरण करनेवाला [वि+प्र] (भिषग्) = वैद्य (उच्यते) = कहलाता है । [२] यह वैद्य इन ओषधियों का ज्ञान रखने के कारण, इनके ठीक प्रयोग से (रक्षोहा) = रोगकृमियों का विध्वंस करता है तथा (अमीवचातनः) = रोगों को नष्ट कर डालता है। समिति में एकत्रित हुए- हुए राजा जैसे किसी उत्पन्न हुई हुई समस्या को दूर करने का विचार करते हैं, उसी प्रकार ज्ञानी वैद्य उत्पन्न - उत्पन्न हुए रोग को दूर करने के लिए विविध ओषधियों का विचार करता है ।
Connotation: - भावार्थ - विविध ओषधियों के गुण दोषों को जाननेवाला ज्ञानी पुरुष ही वैद्य कहलाता है। यह 'रक्षोहा - अमीवचातन' होता है ।