Go To Mantra
Viewed 453 times

मा वो॑ रिषत्खनि॒ता यस्मै॑ चा॒हं खना॑मि वः । द्वि॒पच्चतु॑ष्पद॒स्माकं॒ सर्व॑मस्त्वनातु॒रम् ॥

English Transliteration

mā vo riṣat khanitā yasmai cāhaṁ khanāmi vaḥ | dvipac catuṣpad asmākaṁ sarvam astv anāturam ||

Pad Path

मा । वः॒ । रि॒ष॒त् । ख॒नि॒ता । यस्मै॑ । च॒ । अ॒हम् । खना॑मि । वः॒ । द्वि॒ऽपत् । चतुः॑ऽपत् । अ॒स्माक॑म् । सर्व॑म् । अ॒स्तु॒ । अ॒ना॒तु॒रम् ॥ १०.९७.२०

Rigveda » Mandal:10» Sukta:97» Mantra:20 | Ashtak:8» Adhyay:5» Varga:11» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:8» Mantra:20


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (वः) ओषधियों ! तुम्हारा (खनिता) उखाड़नेवाला-उखाड़ता हुआ (मा रिषत्) रोग से पीड़ित नहीं होता, अपितु उखाड़ते-उखाड़ते स्वस्थ हो जाता है (च) और (यस्मै) जिसके लिए (अहं खनामि) मैं खोदता हूँ-उखाड़ता हूँ, वह भी अपने रोग से पीड़ित नहीं होता, किन्तु स्वस्थ हो जाता है, तुम्हारे गुणप्रभाव से (अस्माकम्) हमारा (द्विपत्) दो पैरवाला मनुष्य (चतुष्पत्) चार पैरवाला पशु (सर्वम्) सब प्राणिमात्र (अनातुरम्) रोगरहित-स्वस्थ (अस्तु) होवे-या हो जाता है ॥२०॥
Connotation: - ओषधियों के अन्दर परमात्मा ने ऐसा रोगनाशक गुण दिया है, उन्हें उखाड़ते-उखाड़ते ही रोग दूर हो जाता है-अथवा रोग नहीं होता और रोगों का रोग भी उनके सेवन से दूर हो जाता है, न केवल मनुष्य ही, किन्तु पशु पक्षी भी ओषधियों से नीरोग हो जाते हैं ॥२०॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अनातुरता

Word-Meaning: - [१] ओषधियाँ पर्वत-प्रदेशों में प्रायः उत्पन्न होती हैं। कई ओषधियाँ इस प्रकार की भी हैं कि उनका रस व दूध खोदनेवाले की त्वचा पर पड़कर कुछ अशान्ति का कारण बन सकता है। सो इनके खोदने में बड़ी सावधानी की आवश्यकता होती है। इसलिए कहते हैं कि हे ओषधियो ! (वः खनिता) = तुम्हारा खोदनेवाला (मा रिषत्) = हिंसित न हो। (च) = और (यस्मै) = जिसके लिए (अहम्) = मैं (वः) = आपको खनामि खोदता हूँ वह भी हिंसित न हो। [२] इस औषधि के प्रयोग से (अस्माकम्) = हमारे (द्विपद) = दो पाँववाले मनुष्यादि तथा (चतुष्पद्) = चार पाँववाले पशु (सर्वम्) = सब अनातुरं अस्तु रोगों की व्याकुलता से रहित हों।
Connotation: - भावार्थ- ओषधियों के समुचित प्रयोग से हम सब अनातुर = नीरोग हों।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (वः खनिता मा रिषत्) ओषधयः ! युष्माकं खनिता-उत्पाटयिता खनन् सन् न रोगेण पीडितो भवति (यस्मै च-अहं खनामि) यस्मै रुग्णाय चाहं खनामि सोऽपि वर्त्तमानेन रोगेण पीडितो न भवेदिति निश्चयः युष्माकं गुणप्रभावात् (अस्माकं द्विपत्-चतुष्पत्) अस्माकं मनुष्यः पशुश्च (सर्वम्-अनातुरम्-अस्तु) सर्वं प्राणिमात्रं रोगरहितं भवतु ॥२०॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let not the man who digs you from earth violate you, nor should he come to harm, nor should I come to harm who dig you out. May all human beings, all our animals, and all others be free from suffering and disease.