Go To Mantra
Viewed 403 times

सा॒कं य॑क्ष्म॒ प्र प॑त॒ चाषे॑ण किकिदी॒विना॑ । सा॒कं वात॑स्य॒ ध्राज्या॑ सा॒कं न॑श्य नि॒हाक॑या ॥

English Transliteration

sākaṁ yakṣma pra pata cāṣeṇa kikidīvinā | sākaṁ vātasya dhrājyā sākaṁ naśya nihākayā ||

Pad Path

सा॒कम् । य॒क्ष्म॒ । प्र । प॒त॒ । चाषे॑ण । कि॒कि॒दी॒विना॑ । सा॒कम् । वात॑स्य । ध्राज्या॑ । सा॒कम् । न॒श्य॒ । नि॒ऽहाक॑या ॥ १०.९७.१३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:97» Mantra:13 | Ashtak:8» Adhyay:5» Varga:10» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:8» Mantra:13


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यक्ष्म) राजरोग ! (चाषेण साकम्) ओषधियों के भक्षण के साथ-वमनरीति से (प्र पत) शरीर से बाहर गिर-निकल (किकिदीविना) क्या-क्या ऐसे कड़वे स्वादरूप कुरले से बाहर निकल (वातस्य ध्राज्या साकम्) अपानवायु के वेग के साथ (नश्य) नष्ट हो (निहाकया साकम्) खङ्खङ्कार थूकने क्रिया के साथ नष्ट हो ॥१३॥
Connotation: - राजयक्ष्मा रोग को नष्ट करने के लिये वमन लानेवाली ओषधि खिलाकर या कड़वी ओषधि खिला-पिलाकर कुरले कराकर या अपानवायु लाकर या खङ्खङ्कार थूकने-लानेवाली ओषधि खिलाकर दूर करना चाहिये ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

त्रिविध-दोष-विनाश

Word-Meaning: - [१] शरीर में रोग 'वात, पित्त व कफ' के विकार के कारण होते हैं। वातिक विकार से उत्पन्न रोगों का निर्देश प्रस्तुत मन्त्र में 'वातस्य ध्राज्या' इन शब्दों से हो रहा है । लेष्यजन्य रोगों का संकेत 'किकिदीविना' शब्द से हुआ है। श्लेष्मावरुद्ध कण्ठजन्य ध्वनि का अनुकरण 'किकि' शब्द है, उस ध्वनि के साथ दीप्त होनेवाला यह श्लेष्यजन्य रोग है । 'चण भक्षणे' से बना हुआ 'चाण' शब्द भस्मक आदि पैत्रिक रोगों का वाचक है। इन रोगों में अति पीड़ा के होने पर मनुष्य 'हा मरा' इस प्रकार चीख पड़ता है। उस पीड़ा का वाचक 'निहाका' शब्द है। [२] हे (यक्ष्म) = रोग ! तू (चाषेण) = पित्त विकार से होनेवाले राक्षसी भूखवाले भस्मकादि रोगों के (साकम्) = साथ (प्रपत) = इस शरीर से दूर हो जा । (किकिदीविना) = कफजन्य रोग के साथ तू यहाँ से नष्ट हो जा । (वातस्य ध्राज्या) = वात की गति व व्याप्ति जनित रोगों के (साकम्) = साथ तू इस शरीर से दूर हो। तथा (निहाकया) = प्रबल पीड़ा के (साकम्) = साथ नश्य तू इस शरीर से अदृष्ट हो जा।
Connotation: - भावार्थ - औषध प्रयोग से पित्त, कफ व वात जनित सब विकार दूर हों। रोगजनित प्रबल पीड़ा भी दूर हो।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यक्ष्म) हे राजरोग ! त्वम् (चाषेण साकं प्र पत) ओषधीनां भक्षणेन सहैव “चष भक्षणे” [भ्वादि०] शरीराद् बहिः प्रपतनं कुरु वमनरीत्या (किकिदीविना) किं किमिति कटुकगण्डूषेण सह प्रपतनं कुरु (वातस्य ध्राज्या साकं नश्य) अपानवायोर्वेगेन सह नष्टो भव (निहाकया साकम्) नितरां खङ्खङ्कारष्ठीवनक्रियया सह नष्टो भव ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Consumptive disease is cured with increase in appetite, administration of medicine by mouth and cleansing by vomiting, with bitter medication, with strong and deep breathing in clean air, and cleansing of the system by eliminating the sputum and congestion.