'रुद्र शिक्वस् क्षयद्वीर' प्रभु
Word-Meaning: - [१] (वः) = तुम्हारे (स्तोमम्) = स्तुति समूह को (अद्य) = आज (नमसा) = नमन के साथ रुद्राय सब रोगों के द्रावण करनेवाले (शिक्वसे) = सर्वशक्तिमान्, (क्षयद्वीराय) = वीरों में निवास करनेवाले [क्षि= निवासे] प्रभु के लिए (दिदिष्टन) = अतिसृष्ट करो। नम्रतापूर्वक उस प्रभु का ही स्तवन करो। [२] जो (शिवः) = कल्याण को करनेवाला (स्ववान्) = अपनी शक्तिवाला, (स्वयशाः) = अपने कर्मों से यशस्वी प्रभु (येभिः) = जिन (एवयावभिः) = ऐसे ही गति करनेवाले (निकामभिः) = नितरां प्रिय ज्ञानियों के द्वारा (दिवः सिषक्ति) = ज्ञान से हमारा सेवन करता है, ज्ञान को प्राप्त कराके प्रभु हमारा कल्याण करते हैं । ये ज्ञानी पुरुष 'एवयावा' होते हैं, बिना किसी अपने स्वार्थ के ऐसे ही गति करनेवाले होते हैं। वे केवल लोक-संग्रह के लिए गति करते हैं, प्रभु के ये दूत के समान होते हैं। ऐसे लोगों के द्वारा ही प्रभु हमारे में ज्ञान का स्थापन करते हैं । ये लोग प्रभु के ज्ञानी भक्त कहलाते हैं। ये बड़े प्रेम से ज्ञान का प्रसार करते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - हम प्रभु का स्तवन करें। प्रभु ही अपने ज्ञानी भक्तों के द्वारा हमारे ज्ञान का वर्धन करते हुए कल्याण करते हैं। वे प्रभु सब रोगों का द्रावण करनेवाले, सर्वशक्तिमान् व वीरों में निवास करनेवाले हैं।