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इ॒मां प्र॒त्नाय॑ सुष्टु॒तिं नवी॑यसीं वो॒चेय॑मस्मा उश॒ते शृ॒णोतु॑ नः । भू॒या अन्त॑रा हृ॒द्य॑स्य नि॒स्पृशे॑ जा॒येव॒ पत्य॑ उश॒ती सु॒वासा॑: ॥

English Transliteration

imām pratnāya suṣṭutiṁ navīyasīṁ voceyam asmā uśate śṛṇotu naḥ | bhūyā antarā hṛdy asya nispṛśe jāyeva patya uśatī suvāsāḥ ||

Pad Path

इ॒माम् । प्र॒त्नाय॑ । सु॒ऽस्तु॒तिम् । नवी॑यसीम् । वो॒चेय॑म् । अ॒स्मै॒ । उ॒श॒ते । शृ॒णोतु॑ । नः॒ । भू॒याः । अन्त॑रा । हृ॒दि । अ॒स्य॒ । नि॒ऽस्पृशे॑ । जा॒याऽइ॑व । पत्ये॑ । उ॒श॒ती । सु॒ऽवासाः॑ ॥ १०.९१.१३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:91» Mantra:13 | Ashtak:8» Adhyay:4» Varga:22» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:8» Mantra:13


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अस्मै प्रत्नाय-उशत) इस सनातन सदा एकरस वर्तमान सर्वहित कामना करनेवाले परमात्मा के लिए (इमां नवीयसीम्) इस अत्यन्त नवीन-शुद्ध (सुष्टुतिं वोचेयम्) सुन्दर स्तुति को बोलता हूँ-बोलूँ (नः शृणोतु) हमारे स्तुतिवचन को सुने (अस्य हृदि-अन्तरा) उसके हृदय के अन्दर (निस्पृशे भूयाः) नितान्त छूने के लिए-पहुँचने के लिये मैं समर्थ होऊँ (पत्ये सुवासा-जाया) पति के लिये सुन्दरवस्त्राभूषणयुक्त पत्नी (उशती-इव) कामना करती हुई की भाँति परमात्मा की कामना करता हूँ ॥१३॥
Connotation: - परमात्मा नित्य एकरस सर्वहित चाहनेवाला है, उसकी निर्दोष स्तुति करनी चाहिये,  उसके अन्दर प्रविष्ट होने की कामना करनी चाहिये, जैसे पत्नी हृदय से पति की कामना करती है ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अन्तस्तल से की जाती हुई स्तुति और प्रभु- सम्पर्क

Word-Meaning: - [१] (अस्मा उशते) = इस हमारे हित की कामना करनेवाले (प्रत्नाय) = सनातन पुरुष रूप प्रभु के लिए (इमाम्) = इस (नवीयसीम्) = अत्यन्त स्तुत्य (सुष्टुतिम्) = उत्तम स्तुति को (वोचेयम्) = मैं कहूँ । वे प्रभु (नः) = हमारी इस स्तुति को (शृणोतु) = सुनें । [२] यह स्तुति (अन्तरा हृदि) = हृदय के अन्तस्तल में होती हुई, अर्थात् दिल से की जाती हुई (अस्य निस्पृशे) = इस प्रभु के सम्पर्क के लिए (भूयाः) = [भूयात्] हो, (इव) = उसी प्रकार जैसे कि (उशती) = सदा हित की कामना करती हुई (सुवास:) = उत्तम वस्त्रोंवाली जाया पत्नी पति के हृदय में स्पर्श करनेवाली होती है।
Connotation: - भावार्थ- हम दिल से प्रभु का स्तवन करें। यह स्तुति प्रभु के लिए प्रिय हो। हमारा प्रभु से यह सम्पर्क करानेवाली है।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अस्मै प्रत्नाय-उशते) एतस्मै सनातनाय सर्वदैकरसवर्त्तमानाय सर्वहितं कामयमानाय परमात्मने (इमां नवीयसीं सुष्टुतिं वोचेयम्) एतामतिशयेन नवीनां प्रत्यग्रां शोभनस्तुतिं प्रवदेयम् (नः शृणोतु) अस्माकं वचनं शृणुयात् (अस्य हृदि अन्तरा) अस्य हृदये मध्ये “अन्तरा मध्ये” [यजु० १६।२५ दयानन्दः] (निस्पृशे भूयाः) नितान्तं स्पर्शाय भवेयम् “व्यत्ययेन मध्यमः पुरुषः” (पत्ये सुवासा-जाया-इव-उशती) पत्ये सुन्दरवस्त्राभूषणयुक्ता जाया यथा कामयमाना भवति ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let me raise this new holy song of praise to the loving and gracious eternal Agni. May the Lord listen. And let it be like an inspiring creative poem full of love and passion in a beautiful form for the master, able to touch and move his heart within to bless me.