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तवा॑ग्ने हो॒त्रं तव॑ पो॒त्रमृ॒त्वियं॒ तव॑ ने॒ष्ट्रं त्वम॒ग्निदृ॑ताय॒तः । तव॑ प्रशा॒स्त्रं त्वम॑ध्वरीयसि ब्र॒ह्मा चासि॑ गृ॒हप॑तिश्च नो॒ दमे॑ ॥

English Transliteration

tavāgne hotraṁ tava potram ṛtviyaṁ tava neṣṭraṁ tvam agnid ṛtāyataḥ | tava praśāstraṁ tvam adhvarīyasi brahmā cāsi gṛhapatiś ca no dame ||

Pad Path

तव॑ । अ॒ग्ने॒ । हो॒त्रम् । तव॑ । पो॒त्रम् । ऋ॒त्विय॑म् । तव॑ । ने॒ष्ट्रम् । त्वम् । अ॒ग्नित् । ऋ॒त॒ऽय॒तः । तव॑ । प्र॒ऽशा॒स्त्रम् । त्वम् । अ॒ध्व॒रि॒ऽय॒सि॒ । ब्र॒ह्मा । च॒ । असि॑ । गृ॒हऽप॑तिः । च॒ । नः॒ । दमे॑ ॥ १०.९१.१०

Rigveda » Mandal:10» Sukta:91» Mantra:10 | Ashtak:8» Adhyay:4» Varga:21» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:8» Mantra:10


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे परमात्मन् ! इस अध्यात्मयज्ञ में (तव होत्रम्) तेरा होतृकर्म है, इससे तू ही इसका होता है। (तव-ऋत्वियं पोत्रम्) तेरा ऋतु के अनुसार पोतृकर्म है, जिससे तू ही शोधनकर्म विधाता है (तव नेष्ट्रम्) तेरा नेष्टृकर्म है, तू ही नेष्टा-नेता अध्यात्मयज्ञ का है (त्वम्-अग्नित्) तू पुरोहित है (ऋतायतः) अध्यात्मयज्ञ करते हुए उपासक का (तव प्रशास्त्रम्) तेरा प्रशास्तृकर्म है, क्योंकि की तू ही प्रशास्ता उत्तम उपदेष्टा है, (त्वम्-अध्वरीयसि) तू हमारे अध्यात्मयज्ञ को चाहता है, अतः तू अध्वर्यु है (ब्रह्मा च-असि) और तू ब्रह्मा भी है तथा (नः-दमे गृहपतिः) तू हमारे हृदयघर में गृहस्वामी है ॥१०॥
Connotation: - अध्यात्मयज्ञ में समस्त ऋत्विजों, समस्त श्रेष्ठ याजकों का पद परमात्मा ही प्राप्त किये हुए है ॥१०॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सप्त होतृक यज्ञ का प्रणेता

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन् ! (ऋतायतः) = यज्ञ को अपनाने की कामनावाले का (होत्रम्) = होतृ कार्य (तव) = आपका ही है यज्ञ करनेवाले के यज्ञ में होता का कार्य आप ही करते हो। यज्ञ में उपस्थित होता आप से ही शक्ति को प्राप्त करके अपना कार्य करता है। पोत्रं तव पोता का भी कार्य आपका ही है। (नेष्ट्रं तव) = नेष्टा का भी कार्य आपका ही है (त्वं इत्) = आप ही (अग्नित्) = अग्नीध्र होते हो । (प्रशास्त्रं तव) = प्रशास्ता का कार्य भी आपकी ही शक्ति से होता है । (त्वं अध्वरीयसि) = अध्वर्यु का काम भी तो आप ही करते हैं । (च ब्रह्मा असि) = और ब्रह्मा भी आप ही हैं, (च) = और (नः दमे) = हमारे घर में (गृहपतिः) = गृहपति यजमान भी आप ही हो । [२] यजमान 'होता, पोता, नेष्टा, अग्नीध्र, प्रशास्ता, अध्वर्यु व ब्रह्मा' इन सात होताओं से यज्ञ को प्रारम्भ करता है। इन सब में प्रभु शक्ति ही काम करती है और इस प्रकार यजमान का यह सप्तहोतृक यज्ञ निर्विघ्न होकर पूर्ण होता है। प्रभु शक्ति को ही काम करता हुआ जानकर यजमान गर्ववाला नहीं होता। एवं यह यज्ञ अहंकार शून्य होकर पूर्ण पवित्र व अबन्धनकारक हो जाता है ।
Connotation: - भावार्थ - हम अपने घरों में होनेवाले यज्ञों का प्रणेता प्रभु को ही जानें।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे परमात्मन् ! अस्मिन्नध्यात्मयज्ञे (तव होत्रम्) तव होतृकर्मास्ति यतस्त्वमेवाध्यात्मयज्ञे होताऽसि (तव-ऋत्वियं पोत्रम्) तव यथाऋतु पोतृकर्म यतस्त्वमेवात्र शोधनकर्मविधाताऽसि (तव नेष्ट्रम्) तव नेष्टृकर्म त्वमेव नेष्टा नेताऽस्याध्यात्मयज्ञस्य “नयतेः षुक्। नेष्टा दयानन्दः” [उणा० २।९५] (त्वम्-अग्नित्-ऋतायतः) त्वं पुरोहितोऽध्यात्मयज्ञं कुर्वत उपासकस्य (तव प्रशास्त्रम्) तव प्रशास्तृकर्म यतस्त्वमेवात्र प्रशास्ता प्रकृष्टमुपदेष्टाऽसि (त्वम्-अध्वरीयसि) त्वमस्माकमध्वर-मध्यात्मयज्ञमिच्छसि अतस्त्वमेवाध्वर्युरसि (ब्रह्मा च-असि) त्वं ब्रह्मापि खल्वसि (च) तथा (नः दमे गृहपतिः) अस्माकं हृदयगृहे गृहस्वामी खल्वसि ॥१०॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, you are the over all master and lord of yajna, yours are all the functions: you are the yajaka, you are the purifier, you are the leader, you are the kindler, you are the director, you are the manager, you are the Brahma, presiding priest, and you are the chief of our yajnic home.