Go To Mantra
Viewed 819 times

च॒न्द्रमा॒ मन॑सो जा॒तश्चक्षो॒: सूर्यो॑ अजायत । मुखा॒दिन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॑ प्रा॒णाद्वा॒युर॑जायत ॥

English Transliteration

candramā manaso jātaś cakṣoḥ sūryo ajāyata | mukhād indraś cāgniś ca prāṇād vāyur ajāyata ||

Pad Path

च॒न्द्रमा॑ । मन॑सः । जा॒तः । चक्षोः॑ । सूर्यः॑ । अ॒जा॒य॒त॒ । मुखा॑त् । इन्द्रः॑ । च॒ । अ॒ग्निः । च॒ । प्रा॒णात् । वा॒युः । अ॒जा॒य॒त॒ ॥ १०.९०.१३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:90» Mantra:13 | Ashtak:8» Adhyay:4» Varga:19» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:13


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (मनसः-चन्द्रमाः जातः) समष्टि पुरुष के मननसामर्थ्य से चन्द्रमा उत्पन्न हुआ (चक्षोः-सूर्यः-अजायत) उसके ज्योतिर्मयस्वरूप से सूर्य उत्पन्न हुआ (मुखात्-इन्द्रः-च अग्निः-च) उसके प्रमुख बल से विद्युत् और अग्नि उत्पन्न हुए (प्राणात्-वायुः-अजायत) प्राण शक्ति से वायु उत्पन्न हुआ ॥१३॥
Connotation: - परमात्मा ने अपनी मननशक्ति से चन्द्रमा को उत्पन्न किया, ज्योतिर्मयस्वरूप से सूर्य को, प्रमुख बल से विद्युत् और अग्नि को और प्राणन शक्ति से वायु को उत्पन्न किया ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'चन्द्र, सूर्य, इन्द्र-अग्नि, वायु'

Word-Meaning: - [१] (मनसः) = मन के दृष्टिकोण से यह प्रभु को धारण करनेवाला (चन्द्रमाः जातः) = चन्द्रमा हो जाता है। 'चदि आह्लादे' से चन्द्र शब्द बनता है। यह प्रभु-भक्त सदा आह्लादमय मनवाला होता है । 'मनः प्रसाद' से सदा यह स्मितवदन दिखता है । [२] (चक्षोः) = चक्षु से सूर्यः अजायत यह सूर्य बन जाता है। सूर्य जैसे अन्धकार को दूर करनेवाला है, इसी प्रकार इसकी चक्षु इसके अज्ञानान्धकार को सदा दूर करनेवाली बनती है। यह आँख सब पदार्थों को सूक्ष्मता से देखती हुई इसके तत्त्वज्ञान का साधन बनती है। [३] (मुखात्) = मुख से यह (इन्द्रः च अग्निः च) = इन्द्र और अग्नि बनता है। मुख के दो कार्य हैं 'खाना और बोलना' पहले कार्य के दृष्टिकोण से यह जितेन्द्रिय बनता है, इन्द्रियों का अधिष्ठाता ही इन्द्र है । जितेन्द्रिय होता हुआ यह स्वाद के लिए न खाकर केवल शरीरधारण के लिए खाता है। दूसरे कार्य के दृष्टिकोण से यह अग्नि बनता है, इसके मुख से निकले हुए शब्द अग्नि होते हैं, आगे ले चलनेवाले होते हैं, सबको उत्साहित करनेवाले होते हैं। [४] (प्राणाद्) = प्राण के दृष्टिकोण से, जीवन के दृष्टिकोण से यह (वायुः अजायत) = वायु हो जाता है। 'वा गतौ' वायु चलती है, इसका जीवन भी बड़ा क्रियाशील होता है ।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु को धारण करनेवाले के जीवन में ये बातें होती हैं— [क] मनः प्रसाद, [ख] प्रकाशमय दृष्टि, [ग] जितेन्द्रियता व उत्साहमय वाणी, [घ] क्रियाशीलता ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (मनसः-चन्द्रमाः-जातः) समष्टिपुरुषस्य मननसामर्थ्याच्चन्द्रमाः जातः (चक्षोः-सूर्यः-अजायत) तस्य ज्योतिर्मयस्वरूपात् सूर्य उत्पन्नः (मुखात्-इन्द्रः-च-अग्निः-च) मुखात् प्रमुखबलात्-खल्विन्द्रो विद्युच्चाग्निश्च जातः (प्राणात्-वायुः-अजायत) प्राणशक्तेर्वायुरुत्पन्नः ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The moon is bom of the cosmic mind, the sun is born of the eye, the fire and energy is born from the mouth and the wind is born from the breath.