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तद॑ग्ने॒ चक्षु॒: प्रति॑ धेहि रे॒भे श॑फा॒रुजं॒ येन॒ पश्य॑सि यातु॒धान॑म् । अ॒थ॒र्व॒वज्ज्योति॑षा॒ दैव्ये॑न स॒त्यं धूर्व॑न्तम॒चितं॒ न्यो॑ष ॥

English Transliteration

tad agne cakṣuḥ prati dhehi rebhe śaphārujaṁ yena paśyasi yātudhānam | atharvavaj jyotiṣā daivyena satyaṁ dhūrvantam acitaṁ ny oṣa ||

Pad Path

तत् । अ॒ग्ने॒ । चक्षुः॑ । प्रति॑ । धे॒हि॒ । रे॒भे । श॒फ॒ऽआ॒रुज॑म् । येन॑ । पश्य॑सि । या॒तु॒ऽधान॑म् । अ॒थ॒र्व॒ऽवत् । ज्योति॑षा । दैव्ये॑न । स॒त्यम् । धूर्व॑न्तम् । अ॒चित॑म् । नि । ओ॒ष॒ ॥ १०.८७.१२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:87» Mantra:12 | Ashtak:8» Adhyay:4» Varga:7» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:12


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे तेजस्वी अग्रणायक ! (रेभे) अति शब्द करनेवाले प्रजागण के निमित्त (तत्-चक्षुः) उस यथार्थदर्शक नेत्र को (प्रति धेहि) स्थापित कर-उसके आर्त्तनाद को सुन (येन शफारुजम्) जिससे पापकारी जो वाणी के शल्य से अन्यों को पीड़ा देता है, उस (यातुधानं पश्यसि) पीड़ा देनेवाले पाप करते हुए को देखता है (अथर्ववत्) सूर्य के समान (दैव्येन-ज्योतिषा) आकाश में होनेवाले प्रखर तेज से (सत्यं धूर्वन्तम्) सत्य को विनष्ट करते हुए (अचितं न्योष) मूढ़ को जला दे ॥१२॥
Connotation: - प्रजा के आर्त्तनाद को सुनकर, उनकी अवस्था को देखकर, सूर्य के समान तेज से सत्य के नष्ट करनेवाले मूढ़ को जला दे ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दिव्य ज्योति से यातुधानत्व का दहन

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = राष्ट्र के अग्रेणी राजन् ! तू (तद् चक्षुः) = उस आँख को (रेभे) = [talker] बहुत बोलनेवाले पर भी (प्रतिधेहि) = रख, (येन) = जिस आँख से तू (शफारुजम्) = राष्ट्र वृक्ष के मूल पर कुठाराघात करनेवाले [शफ = root of a tree] (यातुधानम्) = प्रजापीड़क को पश्यसि देखता है । राजा को यातुधानों पर तो दृष्टि रखनी ही चाहिए, इनके अतिरिक्त बहुत बोलनेवालों पर भी उसे दृष्टि रखनी है । ये रेभ प्रजा के बहकाने में समर्थ हो जाते हैं और उन्हें मार्ग से भटका देते हैं । [२] हे राजन् ! तू (अथर्ववत्) = एक अडिग पुरुष की तरह [न थर्वति] (दैव्येन) = दिव्यगुणों की उत्पत्ति के लिये हितकर (ज्योतिषा) = ज्ञान से इस (सत्यं धूर्वन्तम्) = सत्य की हिंसा करते हुए (अचितम्) = नासमझ यातुधान को (न्योष) = [ नि ओष] नितरां दग्ध करनेवाला हो [उष दाहे ] । ज्ञान के द्वारा इसके यातुधानत्व को समाप्त करके इसे पवित्र जीवनवाला बना दीजिये ।
Connotation: - भावार्थ - राजा ज्ञान प्रसार के द्वारा यातुधानों के यातुधानत्व को समाप्त करके उन्हें दैवी वृत्तिवाला बनाये ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे तेजस्विन्-अग्रणीः ! (रेभे तत्-चक्षुः प्रति धेहि) अति शब्दं कुर्वति प्रजागणे यथार्थदर्शकं चक्षुर्निपातय तस्यार्त्तनादं शृणु (येन शफारुजं यातुधानं पश्यसि) येन पापकारिणं शफेन वाक्शल्येनान्यान् रुजति पीडयति तम् “धिष्ण्याः शफाः” [काठ० १६।८] “धिषणा वाङ्नाम” [निघ० १।११] यातनाधारकं पापं कुर्वन्तं पश्यसि (अथर्ववत्-दैव्येन ज्योतिषा) प्रजापतिरादित्यवत् “एष आदित्यः प्रजापतिः” [काठ० १२।६] “अथर्वा वै प्रजापतिः” [गो० १।१।४] दिविभवेन प्रखरेण तेजसा (सत्यं धूर्वन्तम्-अचितं न्योष) सत्यं घ्नन्तं मूढं निदह ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Agni, cast the same eye of light on the law abiding celebrant of the social order by which you watch the violent and antisocial elements treading on the peace and order of society. As an enlightened power undisturbed at heart, with your divine light and power, light up or burn out the callous and violent destroyer of truth and law.