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चित्ति॑रा उप॒बर्ह॑णं॒ चक्षु॑रा अ॒भ्यञ्ज॑नम् । द्यौर्भूमि॒: कोश॑ आसी॒द्यदया॑त्सू॒र्या पति॑म् ॥

English Transliteration

cittir ā upabarhaṇaṁ cakṣur ā abhyañjanam | dyaur bhūmiḥ kośa āsīd yad ayāt sūryā patim ||

Pad Path

चित्तिः॑ । आः॒ । उ॒प॒ऽबर्ह॑णम् । चक्षुः॑ । आः॒ । अ॒भि॒ऽअञ्ज॑नम् । द्यौः । भूमिः॑ । कोशः॑ । आ॒सी॒त् । यत् । अया॑त् । सू॒र्या । पति॑म् ॥ १०.८५.७

Rigveda » Mandal:10» Sukta:85» Mantra:7 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:21» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:7


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सूर्या) सूर्यकान्तिसदृश योग्य नववधू (पतिम्-अयात्) पति-वर को प्राप्त होती है, (उपबर्हणं चित्तिः-आ) शिर का भूषण चेतानेवाली विद्या है (अभ्यञ्जनं चक्षुः-आः) नेत्र को सुन्दर बनानेवाला अञ्जन उसका यथार्थ दिखानेवाला स्नेहदर्शन है (कोशः-द्यौः-भूमिः आसीत्) कोश अर्थात् धनरक्षणस्थान के समान द्यावापृथिवीमय सब जगत् है, माता-पिता हैं ॥७॥
Connotation: - सुयोग्य वधू वही कहलाती है, जिसकी विद्या ज्ञान ही मस्तक का भूषण है और उसका स्नेहदर्शन-स्नेहदृष्टि आँख का अञ्जन है, उसकी सम्पत्ति समस्त प्राणिजगत् या माता-पिता का आश्रय है, ऐसी वधू सुख शान्ति को प्राप्त करती है ॥७॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वास्तविक सम्पत्ति

Word-Meaning: - [१] (चित्तिः) = समझदारी ही इसका (उपबर्हणं आ:) = तकिया है। जैसे तकिया सहारा देता है, उसी प्रकार इस कन्या की समझदारी से आनेवाली मुसीबतों में सहारा देती है । (चक्षुः अभ्यञ्जनं आ:) = इसका ठीक दृष्टिकोण ही इसका सुरमा था। सुरमा आँख के सौन्दर्य को बढ़ाने का साधन होता है। इसका ठीक दृष्टि से प्रत्येक वस्तु को देखना ही इसे सुशोभित करता है । [२] (द्यौ भूमिः) = मस्तिष्क व शरीर इसके (कोश:) = कोश (आसीत्) = था । ज्ञानोज्वल मस्तिष्क व दृढ़ शरीर ही इसका वास्तविक धन था। उस समय (यत्) = जब कि (सूर्या) = सविता की पुत्री, उज्ज्वल ज्ञानवाली (सूर्या पतिम्) = अपने पति को अयात् प्राप्त हुई । पतिगृह में जाते हुए यह मस्तिष्क के ज्ञान व शरीर की दृढ़ता रूप सम्पत्ति को ही लेकर गयी।
Connotation: - भावार्थ - कन्या समझदार हो, इसका दृष्टिकोण ठीक हो । मस्तिष्क में ज्ञानरूप सम्पत्ति को तथा शरीर में दृढ़ता को प्राप्त करके ही यह पतिगृह को प्राप्त हो ।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (सूर्या पतिम्-अयात्) सूर्यकान्तिसदृशी योग्या नववधूः पतिं वरं प्राप्नोति, तदा (उपबर्हणं चित्तिः-आ) शिरोभूषणं चित्तिश्चेतयित्री विद्या “चिती सञ्ज्ञाने” [भ्वादिः] अस्ति-भवति (अभ्यञ्जनं चक्षुः-आ) नेत्रस्याभिव्यक्तीकरणमञ्जनं तस्या यथार्थचक्षणं यथायोग्य-सम्मानस्नेहदर्शनमस्ति (कोशः-द्यौः-भूमिः-आसीत्) कोशो धनरक्षणस्थानमिव द्युलोकः पृथिवीलोकश्च द्यावापृथिवीमयं सर्वं जगदस्ति नह्येकदेशीयकोशोऽपेक्ष्यते सर्वं जगदेव तस्याः कोशः, यद्वा “द्यौर्मे, पिता……माता पृथिवी महीयम्” [ऋ० १।१६४।३३] मातापितरौ स्तः ॥७॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When Surya, the dawn, the new bride, goes to the house of her groom, then her noble mind and thought is her resting couch, her gracious eye, the collyrium, and the earth and heaven, her treasure.