Go To Mantra
Viewed 899 times

तां पू॑षञ्छि॒वत॑मा॒मेर॑यस्व॒ यस्यां॒ बीजं॑ मनु॒ष्या॒३॒॑ वप॑न्ति । या न॑ ऊ॒रू उ॑श॒ती वि॒श्रया॑ते॒ यस्या॑मु॒शन्त॑: प्र॒हरा॑म॒ शेप॑म् ॥

English Transliteration

tām pūṣañ chivatamām erayasva yasyām bījam manuṣyā vapanti | yā na ūrū uśatī viśrayāte yasyām uśantaḥ praharāma śepam ||

Pad Path

ताम् । पू॒ष॒न् । शि॒वऽत॑माम् । आ । ई॒र॒य॒स्व॒ । यस्या॑म् । बीज॑म् । म॒नु॒ष्याः॑ । वप॑न्ति । या । नः॒ । ऊ॒रू इति॑ । उ॒श॒ती । वि॒ऽश्रया॑ते । यस्या॑म् । उ॒शन्तः॑ । प्र॒ऽहरा॑म । शेप॑म् ॥ १०.८५.३७

Rigveda » Mandal:10» Sukta:85» Mantra:37 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:27» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:37


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पूषन्) हे पोषणकर्ता ! परमात्मन् ! (तां शिवतमाम्) उस कल्याणकारी वधू को (ईरयस्व) तू प्रेरित करता है-प्रदान करता है (यस्यां मनुष्याः) जिसमें पुरुष (बीजं वपन्ति) सन्तान के बीज-वीर्य को डालते हैं (या उशती) जो कामना करती हुई (नः ऊरू विश्रयाते) हमारे लिये दोनों जङ्घाओं को शिथिल करती है-खोलती है (यस्याम्-उशन्तः) जिसमें हम कामना करते हुए (शेपं प्रहरामः) प्रजननसाधन-पुरुषेन्द्रिय को प्रक्षिप्त करते हैं ॥३७॥
Connotation: - विवाह के अनन्तर घर पहुँचकर गर्भाधान के लिये वधू को कामना करनी चाहिये, जिसके अन्दर पुत्र की कामना करते हुए पुरुष सन्तानबीज को प्रक्षिप्त करे और वधू अपने गुप्ताङ्गों को खोल दे ॥३७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'उत्तम सन्तान की कामनावाले' पति-पत्नी

Word-Meaning: - [१] हे (पूषन्) = अपनी शक्तियों का उचित पोषण करनेवाले तथा परिवार का समुचित पोषण करनेवाले युवन् ! तू (तां शिवतमाम्) = उस अत्यन्त मंगलमय स्वभाववाली पत्नी को (एरयस्व) = प्रेरित करनेवाला हो । पति में उत्तम सन्तान की प्राप्ति के लिये कामना हो और पत्नी में उस भावना की कुछ कमी हो तो सन्तान कभी सुन्दर व स्वस्थ नहीं उत्पन्न होते। इसलिए पति को चाहिए कि पत्नी को भी प्रेरणा दे और पत्नी में भी उस भावना के उदय होने पर ही पति-पत्नी सन्तान प्राप्ति के लिए यत्नशील हों । उस पत्नी को तू प्रेरणा देनेवाला हो (यस्याम्) = जिसमें (मनुष्याः) = विचारशील (पति बीजम्) = शक्ति को (वपन्ति) = स्थापित करते हैं । यह पत्नी में शक्ति का स्थापन भूमि में बीज को बोने के समान है । [२] पत्नी वही ठीक है (या) = जो (उशती) = उत्तम सन्तान की कामनावाली होती हुई (नः) = हमारे लिये (उरु विश्रयाते) = उरुओं को खोलनेवाली होती है। भोग की वृत्ति से इन क्रियाओं के होने पर 'धर्मपत्नीत्व' नष्ट हो जाता है। (यस्याम्) = जिसमें हम भी (उशन्तः) = उत्तम सन्तान की कामनावाले होते हुए ही (शेपं प्रहराम) = जननेन्द्रिय को प्राप्त कराते हैं। सन्तान की कामना से यह बीजवपन 'वीर्य-दान' कहलाता है। भोग के होने पर यही 'वीर्य विनाश' हो जाता है।
Connotation: - भावार्थ- पति 'पूषा' हो, पत्नी 'शिवतमा'। दोनों उत्तम सन्तान की कामनावाले होकर ही परस्पर सम्बद्ध हों। यह सम्बन्ध शक्तिक्षय का कारण न बनेगा।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पूषन्) हे पोषणकर्त्तः ! परमात्मन् ! (तां शिवतमाम्-ईरयस्व) तां कल्याणकरीं वधूं प्रेरयसि-प्रयच्छसि (यस्यां मनुष्याः-बीजम्-वपन्ति) यस्यां हि पुरुषाः सन्तानबीजं क्षिपन्ति (या-उशती नः-ऊरू विश्रयाते) या कामयमाना सती खल्वस्मभ्यं जङ्घे उभे शिथिलयति विसारयति (यस्याम्-उशन्तः शेपं प्रहरामः) यस्यां वयं कामयमानाः प्रजननसाधनं पुरुषेन्द्रियं प्रक्षिपामः ॥३७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Pushan, O lord of creativity and growth, inspire her, the most auspicious wife, in whom men sow the seed of life, who, moved with love and desire for progeny, surrenders herself with body and mind and men too with love and passion enter into the conjugal rite of consummation.