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प्रेतो मु॒ञ्चामि॒ नामुत॑: सुब॒द्धाम॒मुत॑स्करम् । यथे॒यमि॑न्द्र मीढ्वः सुपु॒त्रा सु॒भगास॑ति ॥

English Transliteration

preto muñcāmi nāmutaḥ subaddhām amutas karam | yatheyam indra mīḍhvaḥ suputrā subhagāsati ||

Pad Path

प्र । इ॒तः । मु॒ञ्चामि॑ । न । अ॒मुतः॑ । सु॒ऽब॒द्धाम् । अ॒मुतः॑ । क॒र॒म् । यथा॑ । इ॒यम् । इ॒न्द्र॒ । मी॒ढ्वः॒ । सु॒ऽपु॒त्रा । सु॒ऽभगा॑ । अस॑ति ॥ १०.८५.२५

Rigveda » Mandal:10» Sukta:85» Mantra:25 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:24» Mantra:5 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:25


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इतः प्रमुञ्चामि) हे वधु ! इस पितृकुल से तुझे मैं पुरोहित पृथक् करता हूँ (अमुतः-न) उस पतिगृह से नहीं पृथक् करता हूँ (अमुतः सुबद्धां करम्) वहाँ पति के साथ कल्याणबद्ध सुस्नेहबद्ध  तुझे करता हूँ (मीढ्वः-इन्द्र) हे वीर्यसेचक ऐश्वर्यवन् इसके पति ! ( यथा-इयम्) जिससे यह (सुपुत्रा सुभगा-असति) अच्छे पुत्रोंवाली सौभाग्यशाली होवे, वैसे इसको प्रसन्न रखना ॥२५॥
Connotation: - विवाहसंस्कार हो जाने पर पितृगृह को तो वधू छोड़ देती है, परन्तु पतिगृह में बसती है। वहाँ सौभाग्य को प्राप्त होई अच्छे पुत्रों वाली बनती है ॥२५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सुपुत्रा - सुभगा

Word-Meaning: - [१] वर कन्यापक्षवालों से कहता है कि मैं आपकी इस कन्या को (इतः) = इधर से (प्रमुञ्चामि) = प्रकर्षेण मुक्त कर रहा हूँ (न अमुतः) = उधर से नहीं। (अमुतः) = उस तरफ तो (सुबद्धां करम्) = मैं इसे सुबद्ध कर रहा हूँ । अर्थात् इस घर से मैं इसे ले जा रहा हूँ। यह अब उस घर में सुबद्ध होकर उसे उत्तम बनाने का ध्यान करेगी। [२] कन्या के पिता वर से कहते हैं कि- हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय (मीढ्वः) = सब सुखों का सेचन करनेवाले युवक बस ऐसा करना कि (यथा इयम्) = जिस से यह (सुपुत्रा) = उत्तम पुत्रोंवाली तथा (सुभगा) = उत्तम ऐश्वर्यवाली असति हो । इसे पुत्र के अभाव में असफलता अनुभव होती रहेगी और धन के अभाव में चिन्ता बनी रहेगी। ऐसा जीवन तो बड़ा दुःखी हो जाएगा। तूने इन्द्र बनना, जितेन्द्रिय बनना । इस से तुम्हारी शक्तियाँ ठीक बनी रहेंगी। इस अपनी पत्नी पर सुखों की वर्षा करना तेरा कर्त्तव्य है । इसमें तूने प्रमाद न करना ।
Connotation: - भावार्थ- पति जितेन्द्रिय व पत्नी को सुखी रखनेवाला हो। उसे वह सुपुत्रा व सुभगा बनाये ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (इतः-प्रमुञ्चामि) हे वधु ! अस्मात् पितृकुलात् त्वां प्रमुञ्चामि (अमुतः-न) ततः पतिगृहात् खलु न पृथक् करोमि विवाहसंस्कारं कृत्वाऽहं पुरोहितः (अमुतः सुबद्धां करम्)  अमुत्र तत्र ‘सप्तमीस्थाने पञ्चमी व्यत्ययेन’ पत्या सह शोभनबद्धां त्वामहं करोमि (मीढ्वः-इन्द्र) हे वीर्यसेचक ऐश्वर्यवन्-अस्याः पते ! (यथा-इयं सुपुत्रा सुभगा-असति) एषा वधूः सुपुत्रा शोभनपुत्रवती सौभाग्यवती भवेत् तथा प्रसादयैनाम् ॥२५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - I release you from here, the parental home and its discipline, but not from there, the husband’s home, where I establish you duly bound in the new conjugal law and discipline so that, O Indra, O noble husband, she may be the proud and fortunate mother of noble progeny.