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अ॒नृ॒क्ष॒रा ऋ॒जव॑: सन्तु॒ पन्था॒ येभि॒: सखा॑यो॒ यन्ति॑ नो वरे॒यम् । सम॑र्य॒मा सं भगो॑ नो निनीया॒त्सं जा॑स्प॒त्यं सु॒यम॑मस्तु देवाः ॥

English Transliteration

anṛkṣarā ṛjavaḥ santu panthā yebhiḥ sakhāyo yanti no vareyam | sam aryamā sam bhago no ninīyāt saṁ jāspatyaṁ suyamam astu devāḥ ||

Pad Path

अ॒नृ॒क्ष॒राः । ऋ॒जवः॑ । स॒न्तु॒ । पन्थाः॑ । येभिः॑ । सखा॑यः । यन्ति॑ । नः॒ । व॒रे॒ऽयम् । सम् । अ॒र्य॒मा । सम् । भगः॑ । नः॒ । नि॒नी॒या॒त् । सम् । जाः॒ऽप॒त्यम् । सु॒ऽयम॑म् । अ॒स्तु॒ । दे॒वाः॒ ॥ १०.८५.२३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:85» Mantra:23 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:24» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:7» Mantra:23


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (देवाः) हे विद्वानों ! (पन्थाः) तुम्हारे बताए मार्ग (अनृक्षराः) कण्टकरहित-बाधारहित (ऋजवः) सरल (सन्तु) हों (येभिः) जिन मार्गों से (नः) हमारे (वरेयं सखायः) यह मेरा वर और उसके सहायक मित्रसम्बन्धी जन (यन्ति) जाते हैं और (नः) हमारा (अर्यमा) आशीर्वाद देनेवाला वृद्धजन (सं निनीयात्) सम्यक् ले जाये (भगः) भाग्यविधाता पुरोहित (सम्) सम्यक् ले जाये (जास्पत्यम्) जायापतिकर्म-सन्तानोत्पादन  (संसुयमम्)  सम्यक् सुनियन्त्रित (अस्तु) होवे ॥२३॥
Connotation: - विद्वान् जन वर वधू को गृहस्थ का ऐसा मार्ग सुझावें, जो बाधा से रहित हो तथा जिससे वर और उसके पारिवारिक जन ठीक चलें। वृद्धजन पुरोहित आशीर्वाद देवें कि सन्तानोत्पत्ति अच्छी हो ॥२३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

विवाहिता के लिये प्रार्थना का स्वरूप

Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र में कहा था कि विवाहिता कन्या के लिये पिता प्रभु से प्रार्थना करें। उस प्रार्थना को स्वरूप यह हो कि हमारी कन्या (अनृक्षरा:) = कण्टकरहित कुटिलता से शून्य (पन्थाः) = मार्ग से चलनेवाली हो। (येभिः) = जिनके कारण (सखायः) = उसके पति के अन्य मित्र भी (वरेयम्) = हमारी अन्य कन्या के वरण के लिये (नः) = हमारे समीप यन्ति गति करते हैं । हमारी विवाहिता कन्या के उत्तम व्यवहार को देखकर दूसरों की भी इच्छा इस रूप में होगी कि हमें भी इसी कुल की कन्या मिल सके तो ठीक है । [२] हम भी यह चाहते हैं कि हमारी कन्या को (अर्यमा) = [अरीन् यच्छति] जितेन्द्रिय (सं भग:) = उत्तम ऐश्वर्यशाली पुरुष (सं भिनीयात्) = सम्यक् शास्त्रविधि के अनुसार ले जानेवाला हो और हे (देवा:) = सब देवो ! इन युवक-युवति का (जास्पत्यम्) = पति-पत्नी भाव (सं सुयमम्) = मिलकर उत्तम शासन व नियमवाला हो। हमारा (जास्पति) = [son-in-lew] धर्मपुत्र अपने जास्पत्य को, धर्मपुत्रत्व को अच्छे प्रकार से निभाये ।
Connotation: - भावार्थ - विवाहित कन्या का व्यवहार इतना उत्तम हो कि अन्य लोग भी हमारे कुल की कन्या को चाहे उन्हें भी हमारे कुल से कन्या के वरण की कामना हो। हमें हमारी कन्याओं के लिये जितेन्द्रिय ऐश्वर्यशाली पति प्राप्त हों ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (देवाः) हे विद्वांसः ! (पन्थाः) पन्थानो मार्गाः (अनृक्षराः-ऋजवः सन्तु) कण्टकरहिता बाधारहिताः “अनृक्षरा ऋक्षरः कण्टकः” [निरु० ९।३०] सरलाः सन्तु (येभिः-नः-वरेयं सखायः-यन्ति) यैर्मार्गैरस्माकमयं वरस्तत्सहायकाः सखायः सम्बन्धिनो गच्छन्ति (नः-अर्यमा सन्निनीयात्-भगः सम्) अस्माकं वृद्धजनो य आशीर्वादं ददाति “अर्यमेति तमाहुर्यो ददाति” [तै० १।१।२।४] सम्यग्नयेत्-भगो भाग्यविधाता पुरोहितो यः सम्यग्नयेत् (जास्पत्यं संसुयमम्-अस्तु) जायापतिकर्म सन्तानोत्पादनं सम्यक् सुनियन्त्रितं भवतु ॥२३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let our paths be simple, natural and comfortable, free from obstacles, by which our friends may win the goal of their choice. May Aryama, lord of vision, justice and rectitude, and Bhaga, lord of power, prosperity and glory, lead us on to fulfilment. O divinities of nature and humanity, may our married life be happy, noble and fruitful.