Go To Mantra

अ॒ग्निः सप्तिं॑ वाजम्भ॒रं द॑दात्य॒ग्निर्वी॒रं श्रुत्यं॑ कर्मनि॒ष्ठाम् । अ॒ग्नी रोद॑सी॒ वि च॑रत्सम॒ञ्जन्न॒ग्निर्नारीं॑ वी॒रकु॑क्षिं॒ पुरं॑धिम् ॥

English Transliteration

agniḥ saptiṁ vājambharaṁ dadāty agnir vīraṁ śrutyaṁ karmaniṣṭhām | agnī rodasī vi carat samañjann agnir nārīṁ vīrakukṣim puraṁdhim ||

Pad Path

अ॒ग्निः । सप्ति॑म् । वा॒ज॒म्ऽभ॒रम् । द॒दा॒ति॒ । अ॒ग्निः । वी॒रम् । श्रुत्य॑म् । क॒र्म॒निः॒ऽस्थाम् । अ॒ग्निः । रोद॑सी॒ इति॑ । वि । च॒र॒त् । स॒म्ऽअ॒ञ्जन् । अ॒ग्निः । नारी॑म् । वी॒रऽकु॑क्षिम् । पुर॑म्ऽधिम् ॥ १०.८०.१

Rigveda » Mandal:10» Sukta:80» Mantra:1 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:15» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:6» Mantra:1


Reads 431 times

BRAHMAMUNI

इस सूक्त में परमात्मा अपने स्तुति करनेवाले को पाप से बचाता है, मोक्ष प्रदान करता है इत्यादि विषय हैं।

Word-Meaning: - (अग्निः) ज्ञानप्रकाशस्वरूप परमात्मा (सप्तिम्) गमनशील प्राण को (वाजम्भरम्) वेग धारण करनेवाले मन को (ददाति) देता है (अग्निः) परमात्मा (श्रुत्यम्) श्रवणशील आज्ञाकारी (कर्मनिष्ठाम्) कर्म में श्रद्धावाले (वीरम्) पुत्र को देता है (अग्निः) परमात्मा (रोदसी) गृहस्थाश्रम को संभालनेवाले स्त्री-पुरुषों को (समञ्जन्) परस्पर संयुक्त करने को (विचरत्) विशेष प्रेरणा देता है (वीरकुक्षिम्) पुत्र कुक्षि में जिसकी हो, ऐसी (पुरन्धिं नारीं) पुर नगर तथा घर को धारण करनेवाली स्त्री को सम्पादित करता है ॥१॥
Connotation: - परमात्मा मानव को संसार में कार्यसिद्धि के लिए प्राण और मन प्रदान करता है और आज्ञाकारी पुत्र को भी प्रदान करता है। गृहस्थ आश्रम को धारण करने के लिये स्त्री-पुरुषों को प्रेरित करता है और स्त्री को पुत्र को गर्भ में धारण करने के योग्य बनाता है ॥१॥
Reads 431 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वीर श्रुत्य-कर्मनिष्ठ' सन्तान

Word-Meaning: - [१] (अग्निः) = वह अग्रेणी परमात्मा (सप्तिम्) = [सप् to worship] बड़ों का आदर करनेवाले [to obey, to do, to perfome] बड़ों के कहने के अनुसार कर्म करनेवाले (वाजम्भरम्) = अपने में शक्ति को धारण करनेवाले सन्तान को ददाति देता है । (अग्निः) = वे प्रभु (वीरम्) = वीर (श्रुत्यम्) = ज्ञानश्रवण में उत्तम (कर्मनिष्ठाम्) = [ कर्मणि निश्चयेन तिष्ठति] यज्ञादि उत्तम कर्मों में निष्ठावाले सन्तान को देता है। हम प्रभु का उपासन करते हैं, गतसूक्त के अनुसार सर्वत्र प्रभु की महिमा को देखते हैं तो प्रभु हमारे सन्तानों को भी उत्तम बनाते हैं । [२] (अग्निः) = वे प्रभु (रोदसी) = द्यावापृथिवी को, हमारे मस्तिष्क व शरीर को (समञ्जन्) = अलंकृत करते हुए (विचरत्) = गति करते हैं। प्रभु कृपा से ही हमारा मस्तिष्क उग्र व ज्ञानदीप्त बनता है और शरीर दृढ़ होता है । (अग्निः) = ये प्रभु ही (नारीम्) = गृहिणी को (वीरकुक्षिम्) = वीर सन्तानों को कोख में धारण करनेवाली व (पुरन्धिम्) = पालक व पूरक बुद्धिवाली बनाते हैं।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु की महिमा को देखनेवालों व स्तवन करनेवालों के सन्तान 'आज्ञापालक, सशक्त, ज्ञानी व यज्ञादि कर्मों में निष्ठावान' होते हैं। इनके अपने मस्तिष्क व शरीर उत्तम होते हैं। इनकी गृहिणियाँ वीर प्रसविनी व बुद्धिमती होती हैं।
Reads 431 times

BRAHMAMUNI

अस्मिन् सूक्ते परमात्मा स्वस्तुतिकर्तारं जनं पापान्निवारयति मोक्षं च तस्मै प्रयच्छतीत्येवमादयो विषयाः सन्ति।

Word-Meaning: - (अग्निः) ज्ञानप्रकाशस्वरूपः परमात्मा (सप्तिं वाजम्भरं ददाति) सरणं गमनशीलं प्राणम् “सप्तेः सरणस्य” [निरु० ९।३] वेगधारकं मनः “वाजम्भरं यो वाजं वेगं बिभर्ति तम्” [ऋ० १।६०।५ दयानन्दः] (अग्निः) परमात्मा (श्रुत्यं कर्मनिष्ठां वीरम्) श्रोतारं श्रवणशीलमाज्ञाकारिणं कर्मणि श्रद्धावन्तं पुत्रं ददाति (अग्निः) परमात्मा (रोदसी समञ्जन् विचरत्) रोधसी गृहस्थाश्रमस्य रोधकौ स्त्रीपुरुषौ परस्परं संयोजयन् व्याप्नोति (वीरकुक्षिं पुरन्धिं नारीम्) वीरः पुत्रः कुक्षौ यस्यास्तथाभूतं पुरं धारयित्रीं स्त्रियं करोति-सम्पादयति ॥१॥
Reads 431 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni gives us fast faculties of sense and mind which bring us food for life and experience with success in many fields. Agni gives valiant progeny, learned and cultured with dedication to noble action. Agni pervades heaven and earth, beautifying them, and blesses the family home of man and woman, beatifying it with light and passion for good action, and Agni blesses the woman with fertility, motherhood of the brave and wisdom to keep a happy home.