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प्र ये दि॒वः पृ॑थि॒व्या न ब॒र्हणा॒ त्मना॑ रिरि॒च्रे अ॒भ्रान्न सूर्य॑: । पाज॑स्वन्तो॒ न वी॒राः प॑न॒स्यवो॑ रि॒शाद॑सो॒ न मर्या॑ अ॒भिद्य॑वः ॥

English Transliteration

pra ye divaḥ pṛthivyā na barhaṇā tmanā riricre abhrān na sūryaḥ | pājasvanto na vīrāḥ panasyavo riśādaso na maryā abhidyavaḥ ||

Pad Path

प्र । ये । दि॒वः । पृ॒थि॒व्याः । न । ब॒र्हणा॑ । त्मना॑ । रि॒रि॒च्रे । अ॒भ्रात् । न । सूर्यः॑ । पाज॑स्वन्तः । न । वी॒राः । प॒न॒स्यवः॑ । रि॒शाद॑सः । न । मर्याः॑ । अ॒भिऽद्य॑वः ॥ १०.७७.३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:77» Mantra:3 | Ashtak:8» Adhyay:3» Varga:10» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:6» Mantra:3


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (ये) जो जीवन्मुक्त विद्वान् (बर्हणा) प्रवृद्ध (त्मना) आत्मबल से (दिवः) द्युलोक-ज्ञान से (पृथिव्याः) पृथिवीलोक-ज्ञान से (अभ्रात्) मेघवाले अन्तरिक्ष-ज्ञान से (न प्ररिरिच्रे) नहीं परिवर्जित हैं, किन्तु (सूर्यः-न) सूर्य के समान, जैसे सूर्य द्युलोक से, पृथिवीलोक से और अन्तरिक्षलोक से वियुक्त नहीं है (पाजस्वन्तः) बलवाले (वीराः-न) वीरों के समान ज्ञानवाले (पनस्यवः) अपनी प्रशंसा के योग्य (रिशादसः-न) हिंसा भाव से दूर करनेवालों के समान (अभिद्यवः) ज्ञान से द्योतमान (मर्याः) मनुष्य हैं, उनकी सङ्गति करनी चाहिए ॥३॥
Connotation: - जो जीवन्मुक्त महानुभाव भारी आत्मबल से युक्त हों, तीनों लोकों के ज्ञान से युक्त हों, वे प्रशंसा के योग्य हैं, उनकी सङ्गति अपने कल्याण के लिए मनुष्य करें ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्राणसाधक की शोभा का अतिरेक

Word-Meaning: - [१] गत मन्त्र के अनुसार प्राणसाधना से शोभा को प्राप्त करनेवाले ये साधक [= मरुत्] वे हैं (ये) = जो कि (दिवः) = द्युलोक के दृष्टिकोण से (पृथिव्याः न) = [ न च सा० ] और पृथिवी के दृष्टिकोण से (बर्हणा) = वृद्धि के कारण (त्मना) = स्वयं इस प्रकार (प्ररिरिने) = खूब बढ़े हुए होते हैं (न) = जैसे कि (अभ्रात् सूर्य:) = बादल से सूर्य बढ़ा हुआ होता है। बादल कुछ देर के लिये सूर्य को एक देश में आवृत कर ले, परन्तु सदा सर्वत्र ऐसा कर सकना बादल के लिये सम्भव नहीं । इसी प्रकार प्राणसाधक को वासनारूप वृत्र हमेशा आवृत नहीं रख सकता । प्राणसाधक की वासनाएँ नष्ट होती ही हैं। वासना - विनाश से यह अपने मस्तिष्क रूप द्युलोक में ज्ञान के सूर्य से चमकता है। उसकी यह चमक बाह्य द्युलोक की चमक से भी अधिक होती है। और पृथिवीरूप शरीर इसका इस पृथिवी से भी अधिक दृढ़ बनता है । [२] (पाजस्वन्तः) = शक्तिशाली (वीराः न) = वीरों के समान ये प्राणसाधक (पनस्यवः) = स्तुति की कामनावाले होते हैं। इनका कोई व्यवहार कायर पुरुषों के समान नहीं होता। [३] (रिशादसः) = शत्रुओं को खा जानेवाले (मर्याः न) = मनुष्यों के समान ये (अभिद्यवः) = अभिगत दीप्तिवाले होते हैं । काम-क्रोध आदि शत्रुओं को जीतकर ये दीप्त जीवनवाले बनते हैं । अथवा दोनों ओर ये दीप्तिवाले होते हैं। दोनों ओर, अर्थात् प्रकृतिविद्या में भी और आत्मविद्या में भी ये निपुण होते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - प्राणसाधना से मनुष्य वासना से ऊपर उठकर मस्तिष्क व शरीर को दीप्त व दृढ़ बनाता है।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (ये बर्हणा त्मना) ये जीवन्मुक्ता विद्वांसः खलु प्रवृद्धेनात्मबलेन (दिवः-पृथिव्याः) द्युलोकात्-द्युलोकज्ञानात् पृथिवीलोकात्-पृथिवीलोकज्ञानात् (अभ्रात्-न) अभ्रादभ्रवतोऽन्तरिक्षलोकज्ञानात् “अभ्रशब्दादकारो मत्वर्थीयश्छान्दसः” (न प्र रिरिच्रे) नहि प्ररिक्ताः परिवर्जिताः सन्ति, किन्तु (सूर्यः-न) सूर्य इव सन्ति, यथा सूर्यो द्युलोकेन पृथिव्या-अभ्रमयेनान्तरिक्षेण सह च न वियुक्तोऽस्ति (पाजस्वन्तः-वीराः न पनस्यवः) बलवन्तो वीरा इव ज्ञानवन्तः स्वप्रशंसायोग्याः (रिशादसः-न) हिंसाभावप्रक्षेप्तार इव (अभिद्यवः-मर्याः) ज्ञानेनाभिद्योतमाना मनुष्याः सन्ति तेषां सङ्गतिः कार्येति शेषः ॥३॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - By virtue of their own strength and power (they are great) but not separate, not unrelated to heaven and earth just as the sun is great but not unrelated to the cloud and the sky. Commanding power and grandeur like heroes, they are adorable like mortals who destroy negativity, and they are refulgent in their own right.