Word-Meaning: - [१] हम (देवान्) = देवों को हवामहे पुकारते हैं, जो देव (आदित्यान्) = उत्तमता का आदान करनेवाले हैं, (ये) = जो (पार्थिवासः) = पृथिवी के साथ सम्बद्ध हैं, (दिव्यासः) = द्युलोक के साथ सम्बद्ध हैं और (ये) = जो (अप्सु) = अन्तरिक्ष में हैं । पृथिवीलोक 'शरीर' है, द्युलोक 'मस्तिष्क' है और अन्तरिक्षलोक 'हृदय' है। शरीर, मस्तिष्क व हृदय सम्बन्धी सब दिव्यगुणों की हम कामना करते हैं। साथ ही (अदितिम्) = अखण्डन, अर्थात् स्वास्थ्य की हम प्रार्थना करते हैं । स्वास्थ्य आधार बनता है, देव उसमें आधेय होते हैं । [२] (पर्जन्यावाता) = पर्जन्य [ = बादल] तथा वात को पुकारते हैं, ये पर्जन्य और वात (वृषभा) = सुखों का वर्षण करनेवाले हैं। बादल वृष्टि के द्वारा तृप्ति को पैदा करता है, वायु जीवन को देनेवाली है । हम इनको पुकारते हैं, हम भी पर्जन्य की तरह अन्नादि का उत्पादन करते हुए दूसरों की तृप्ति को पैदा करनेवाले हों । वायु की तरह जीवन के देनेवाले हों। [३] (इन्द्रवायू) = इन्द्र और वायु को पुकारते हैं, जो (पुरीषिणा) = पालन व पूरण करनेवाले हैं इन्द्र 'शक्ति' का प्रतीक है और वायु 'गति' का [सर्वाणि बलकर्माणि इन्द्रस्य, वा गतौ]। शक्ति और गति हमारा पालन व पूरण करनेवाले हों। शक्ति और गति शरीर व मन दोनों को स्वस्थ रखते हैं। [४] (वरुणा) = द्वेष निवारण की देवता, (मित्रः) = स्नेह की देवता तथा (अर्यमा) [ = अरीन् यच्छति] काम-क्रोध आदि शत्रुओं का नियमन, इन तीनों को हम पुकारते हैं। हमारा जीवन किसी व्यक्ति के प्रति द्वेषवाला न हो, हम सब के साथ स्नेह करनेवाले हों और काम-क्रोध आदि को पूर्णरूप से वश में करनेवाले हों । ।
Connotation: - भावार्थ- हमारा जीवन दिव्यभावनाओं से परिपूर्ण हो । स्वस्थ शरीर इन दिव्य भावनाओं का आधार बने ।