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प॒र्जन्या॒वाता॑ वृष॒भा पु॑री॒षिणे॑न्द्रवा॒यू वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । दे॒वाँ आ॑दि॒त्याँ अदि॑तिं हवामहे॒ ये पार्थि॑वासो दि॒व्यासो॑ अ॒प्सु ये ॥

English Transliteration

parjanyāvātā vṛṣabhā purīṣiṇendravāyū varuṇo mitro aryamā | devām̐ ādityām̐ aditiṁ havāmahe ye pārthivāso divyāso apsu ye ||

Pad Path

प॒र्जन्या॒वाता॑ । वृ॒ष॒भा । पु॒री॒षिणा॑ । इ॒न्द्र॒वा॒यू इति॑ । वरु॑णः । मि॒त्रः । अ॒र्य॒मा । दे॒वान् । आ॒दि॒त्यान् । अदि॑तिम् । ह॒वा॒म॒हे॒ । ये । पार्थि॑वासः । दि॒व्यासः॑ । अ॒प्ऽसु । ये ॥ १०.६५.९

Rigveda » Mandal:10» Sukta:65» Mantra:9 | Ashtak:8» Adhyay:2» Varga:10» Mantra:4 | Mandal:10» Anuvak:5» Mantra:9


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पर्जन्यवाता) मेघ और वायु (ऋषभा) सुखवर्षक (पुरीषिणा) जलवाले-जलप्रद (इन्द्रवायू) विद्युत् और वायु (वरुणः-मित्रः-अर्यमा) सूर्य का प्रक्षेपणधर्म आकर्षणधर्म और सूर्य (ये) जो भी (पार्थिवासः) पृथिवीस्थ (ये-अप्सु) जो अन्तरिक्षस्थ अन्तरिक्ष में (दिव्यासः) द्युलोकस्थ-द्युलोक के सब देव अर्थात् दिव्यगुण पदार्थ हैं, उन (देवान्) देवों को (आदित्यान्-अदितिम्) रश्मियों को और उषा को (हवामहे) ज्ञान की सिद्धि के लिए सुनें-ग्रहण करें ॥९॥
Connotation: - सुखवर्षक मेघ और वायु तथा जलमय विद्युत् और वायु, सूर्य का प्रक्षेपणधर्म और आकर्षणधर्म तथा सूर्य एवं पृथिवी के वनस्पति आदि पदार्थ, अन्तरिक्ष के स्तर दिशाएँ और द्युलोक के ग्रह तारे आदि हमारे उपयोगी एवं ज्ञानवृद्धि के लिए सिद्ध हों ॥९॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

त्रिलोकी के देव

Word-Meaning: - [१] हम (देवान्) = देवों को हवामहे पुकारते हैं, जो देव (आदित्यान्) = उत्तमता का आदान करनेवाले हैं, (ये) = जो (पार्थिवासः) = पृथिवी के साथ सम्बद्ध हैं, (दिव्यासः) = द्युलोक के साथ सम्बद्ध हैं और (ये) = जो (अप्सु) = अन्तरिक्ष में हैं । पृथिवीलोक 'शरीर' है, द्युलोक 'मस्तिष्क' है और अन्तरिक्षलोक 'हृदय' है। शरीर, मस्तिष्क व हृदय सम्बन्धी सब दिव्यगुणों की हम कामना करते हैं। साथ ही (अदितिम्) = अखण्डन, अर्थात् स्वास्थ्य की हम प्रार्थना करते हैं । स्वास्थ्य आधार बनता है, देव उसमें आधेय होते हैं । [२] (पर्जन्यावाता) = पर्जन्य [ = बादल] तथा वात को पुकारते हैं, ये पर्जन्य और वात (वृषभा) = सुखों का वर्षण करनेवाले हैं। बादल वृष्टि के द्वारा तृप्ति को पैदा करता है, वायु जीवन को देनेवाली है । हम इनको पुकारते हैं, हम भी पर्जन्य की तरह अन्नादि का उत्पादन करते हुए दूसरों की तृप्ति को पैदा करनेवाले हों । वायु की तरह जीवन के देनेवाले हों। [३] (इन्द्रवायू) = इन्द्र और वायु को पुकारते हैं, जो (पुरीषिणा) = पालन व पूरण करनेवाले हैं इन्द्र 'शक्ति' का प्रतीक है और वायु 'गति' का [सर्वाणि बलकर्माणि इन्द्रस्य, वा गतौ]। शक्ति और गति हमारा पालन व पूरण करनेवाले हों। शक्ति और गति शरीर व मन दोनों को स्वस्थ रखते हैं। [४] (वरुणा) = द्वेष निवारण की देवता, (मित्रः) = स्नेह की देवता तथा (अर्यमा) [ = अरीन् यच्छति] काम-क्रोध आदि शत्रुओं का नियमन, इन तीनों को हम पुकारते हैं। हमारा जीवन किसी व्यक्ति के प्रति द्वेषवाला न हो, हम सब के साथ स्नेह करनेवाले हों और काम-क्रोध आदि को पूर्णरूप से वश में करनेवाले हों । ।
Connotation: - भावार्थ- हमारा जीवन दिव्यभावनाओं से परिपूर्ण हो । स्वस्थ शरीर इन दिव्य भावनाओं का आधार बने ।
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (पर्जन्यवाता) पर्जन्यवातौ मेघवातौ (वृषभा) सुखवर्षकौ (पुरीषिणा) उदकवन्तौ-उदकप्रदौ “पुरीषमुदकनाम” [निघ० १।१२] (इन्द्रवायू) विद्युद्वायू (वरुणः-मित्रः-अर्यमा) सूर्यस्य प्रक्षेपणधर्मो वरणकर्त्तृधर्मः सूर्यश्च (ये) ये के च (पार्थिवासः) पृथिवीस्थाः (ये-अप्सु) येऽन्तरिक्षे सन्ति “आपोऽन्तरिक्षनाम” [निघ० १।३] (दिव्यासः) दिवि भवाः सन्ति ते सर्वे देवाः-दिव्यगुणपदार्थास्तान् (देवान्) देवान् (आदित्यान्-अदितिम्) रश्मीन्-उषसं च (हवामहे) ज्ञानसिद्ध्यर्थं शृणुमो गृह्णीमः “हवामहे विद्यासिद्ध्यर्थमुपदिशामः शृणुमश्च” [ऋ० १।२१।४ दयानन्दः] ॥९॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Clouds and winds, mighty water bearer vapours, Indra and Vayu, currents of electric energy and the winds, Varuna, Mitra and Aryama, centrifugal, centripetal and all controlling cosmic energy, the devas, Adityas, rays of solar emissions, Aditi, mother nature, all we invoke, adore and exalt, all that pervade and abide by earth, heaven and the middle regions of the sky, for knowledge and its application in practice.