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प्र नू॒नं जा॑यताम॒यं मनु॒स्तोक्मे॑व रोहतु । यः स॒हस्रं॑ श॒ताश्वं॑ स॒द्यो दा॒नाय॒ मंह॑ते ॥

English Transliteration

pra nūnaṁ jāyatām ayam manus tokmeva rohatu | yaḥ sahasraṁ śatāśvaṁ sadyo dānāya maṁhate ||

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Pad Path

प्र । नू॒नम् । जा॒य॒ता॒म् । अ॒यम् । मनुः॑ । तोक्म॑ऽइव । रो॒ह॒तु॒ । यः । स॒हस्र॑म् । श॒तऽअ॑श्वम् । स॒द्यः । दा॒नाय॑ । मंह॑ते ॥ १०.६२.८

Rigveda » Mandal:10» Sukta:62» Mantra:8 | Ashtak:8» Adhyay:2» Varga:2» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:5» Mantra:8


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अयं मनुः) यह मननशील विद्वान् ज्ञानदाता (नूनं प्रजायताम्) अवश्य प्रसिद्ध होवे (तोक्म-इव रोहतु) अल्प आयुवाले बालक के समान बढ़े (यः शताश्वं सहस्रम्) जो सौ संख्या घोड़ोंवाले वह भी सहस्रगुणित जितने ज्ञान (दानाय सद्यः-मंहते) दान के लिये तुरन्त प्रवृत्त हो ॥८॥
Connotation: - ज्ञान का प्रदान करनेवाला दिनोंदिन बढ़े, छोटे बालक जिससे सहस्रगुणित ज्ञान आदान करने को समर्थ हो सकेगा ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मनुष्य की सस्यांकुर के समान उत्पत्ति

Word-Meaning: - (अयं मनुः) = यह मनुष्य (तोक्मं) = जल से भीगे बीज के समान (प्र जायताम्) = अच्छी प्रकार उत्पन्न होता (प्र रोहतु) = और उसी के समान उगता बढ़ता और फलता फूलता है । यह वही है (यः) = जो (सहस्त्रं शताश्वं) = हजारों सैकड़ों पशुओं का (दानाय) = दान देकर (सद्यः) = शीघ्र ही (मंहते) = सत्कार योग्य हो जाता है ।
Connotation: - भावार्थ- दानवृत्तिवाले का सम्मान होता है ।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अयं मनुः-नूनं प्रजायताम्) एष मननशीलो विद्वान् ज्ञानदाताऽवश्यं प्रसिद्धो भवतु (तोक्म-इव रोहतु) अपत्यम्-अल्पायुष्कं नवजातं बालकमिव वर्धताम् “तोक्म-अपत्यनाम” [निघ० २।२] (यः शताश्वं सहस्रम्) यः शतसङ्ख्याश्वकं तदपि सहस्रमिव ज्ञानम् “सर्वेषामेव दानानां ब्रह्मदानं विशिष्यते” [मनु० ४।२२३] (दानाय सद्यः-मंहते) दानाय सद्यः प्रवर्तते ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May this man, for sure, arise and grow like a germinating seed in fertile soil, who creates and gives a thousand gifts of hundred horse-power achievement straight to be dedicated to charitable good.