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त ऊ॒ षु णो॑ म॒हो य॑जत्रा भू॒त दे॑वास ऊ॒तये॑ स॒जोषा॑: । ये वाजाँ॒ अन॑यता वि॒यन्तो॒ ये स्था नि॑चे॒तारो॒ अमू॑राः ॥

English Transliteration

ta ū ṣu ṇo maho yajatrā bhūta devāsa ūtaye sajoṣāḥ | ye vājām̐ anayatā viyanto ye sthā nicetāro amūrāḥ ||

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Pad Path

ते । ऊँ॒ इति॑ । सु । नः॒ । म॒हः । य॒ज॒त्राः॒ । भू॒त । दे॒वा॒सः॒ । ऊ॒तये॑ । स॒ऽजोषाः॑ । ये । वाजा॑न् । अन॑यत । वि॒ऽयन्तः॑ । ये । स्थ । नि॒ऽचे॒तारः॑ । अमू॑राः ॥ १०.६१.२७

Rigveda » Mandal:10» Sukta:61» Mantra:27 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:30» Mantra:7 | Mandal:10» Anuvak:5» Mantra:27


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यजत्राः सजोषाः-देवासः) हे अध्यात्मयाजी समान प्रीतिवाले मुमुक्षुजनों ! (ते) वे तुम लोग (नः) हमारे लिए (उ-सु-उतये महः-भूत) अवश्य अच्छे रक्षण के लिए महत्त्ववाले होओ (ये वाजान् वियन्तः-अनयत) जो तुम विशिष्ट गति करते हुए अमृतान्न भोगों को प्राप्त कराते हो (ये निचेतारः-अमूराः स्थ) जो तुम निरन्तर ज्ञान का चयन करानेवाले सावधान हो ॥२७॥
Connotation: - मानव को अध्यात्मयाजी मुमुक्षुजनों का सङ्ग करके अपने रक्षण के लिए ज्ञान का ग्रहण करना चाहिए और मोक्ष के अमृतभोगों की प्राप्ति के लिए भी उनसे अध्यात्ममार्ग को जानना चाहिए ॥२७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रक्षक देव

Word-Meaning: - [१] (ते) = वे (यजत्राः) = यष्टव्य, पूज्य संगतिकरण योग्य व सब कुछ देनेवाले (देवासः) = देवो ! आप (ऊ) = निश्चयपूर्वक (सु) = उत्तमता से (नः) = हमारे (महः) [ महते ] = महान् (उतये) = रक्षण के लिये (सजोषाः) = समानरूप से प्रीतिवाले (भूत) = होइये । सब देव ऐकमत्यवाले होकर हमारा रक्षण करनेवाले हों । सूर्य-चन्द्रादि देव हमारे अनुकूल होकर हमें स्वास्थ्य प्राप्त कराते हैं । तथा विद्वान् ज्ञानी पुरुष ज्ञान के द्वारा हमारा कल्याण करनेवाले होते हैं। सामान्यतः 'माता, पिता, आचार्य व अतिथि' रूप सब देव एक निश्चय से चलते हैं तो एक बालक को एक 'सज्जन ज्ञानी' के रूप में बनानेवाले होते हैं। [२] ये सब देव वे हैं (ये) = जो (वियन्तः) = विविध गतियों को करते हुए, (वाजान्) = विविध शक्तियों को (अनयत) = हमें प्राप्त कराते हैं। माता 'चरित्र - बल' को प्राप्त कराती है, पिता 'आचार शक्ति' को । आचार्य 'ज्ञान के बल' को देते हैं तो अतिथि 'धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति' को देनेवाले होते हैं, ये हमें धर्म मार्ग से विचलित नहीं होने देते। इन देवों के अतिरिक्त प्राकृतिक देव अपनी अनुकूलता से हमें 'स्वास्थ्य का बल' प्राप्त कराते हैं । [३] ये 'माता, पिता, आचार्य व अतिथि' वे देव हैं (ये) = जो (निचेतारः स्थ) = निश्चय से ठीक मार्ग का चयन करनेवाले हैं, ये गलत मार्ग से हमें सदा बचाते हैं, यदि (अमूराः) = ये अमूढ़ होते हैं, किसी प्रकार के मोह में फँसे हुए नहीं होते। मोह में फँसकर माता-पिता से भी गलती हो सकती है। अमूढ़ माता-पिता बालक को ज्ञानी व सदाचारी बना ही पाते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- सब देव हमारे रक्षक हों, ये हमें विविध शक्तियों को प्राप्त करानेवाले हों । सूक्त का प्रारम्भ 'आँख, कान, नासिका, मुख' आदि की न्यूनताओं को दूर करके उनके पूरण की प्रार्थना से हुआ है [६१.१] और समाप्ति पर सब देवों से विविध शक्तियों की प्राप्ति की प्रार्थना है [६१.२७] अव नाभानेदिष्ठ यह प्रार्थना करता है कि हम यज्ञ व दान वृत्ति से युक्त हों और अमृतत्व को प्राप्त करें-

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यजत्राः सजोषाः-देवासः) हे अध्यात्मयाजिनः समानप्रीतिमन्तो मुमुक्षवः ! (ते) ते यूयम्  (नः) अस्मभ्यम् (उ सु-ऊतये महः-भूतम्) अवश्यं सुष्ठु रक्षणाय महान्तो महत्त्ववन्तो भवत (ये वाजान् वियन्तः-अनयत) ये यूयं विशिष्टं गतिं कुर्वन्तः खल्वमृतान्नभोगान् “अमृतान्नं वै वाजः” [जै० २।१९२] प्रापयत (ये निचेतारः-अमूराः-स्थ) ये यूयं निरन्तरं ज्ञानस्य चयनं कारयितारः-सावधानाः स्थ ॥२७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Great and glorious divinities, loving friends, adorable visionaries, decisive and discriminative in wisdom and judgement, pray ever abide by us for our protection and progress, you who are leading lights and harbingers of abundant food, energy, victory and ultimate fulfilment of life.