'सभा' राष्ट्रपति के प्रभाव से दूर हो
Word-Meaning: - [१] राष्ट्र का निरीक्षण करने के कारण, राष्ट्र का ध्यान करने के कारण [look after ] राष्ट्रपति यहाँ 'पश्यति इति' पशु शब्द से कहा गया है। यह सभा का प्रारम्भिक समारोह करके फिर सभा में प्रतिदिन आता नहीं, जिससे सभ्यों को सब प्रकार के दबाव से रहित होकर विचार का अवसर मिले (वियुता) = इस राष्ट्र-निरीक्षक राष्ट्रपति से अलग हुए हुए (पश्वा) = उसके पीछे, उसकी अनुपस्थिति में (यत्) = जो (बुधन्त) = ये सभ्य समझते हैं, राष्ट्रपति तो (इति ब्रवीति) = उस ही बात को कह देता है । सभ्यों से बनाये गये नियम को वह उद्घोषित कर देता है। वस्तुतः राष्ट्रपति अपनी सारी शक्ति को (वक्तरी) = वक्ताओंवाली सभा में (रराणः) = देनेवाला होता है, राष्ट्र संचालन के सारे अधिकार प्रायः सभा को प्राप्त होते हैं। राष्ट्रपति तो सभा में निश्चित किये गये कानून को प्रमाणित भर कर देता है । [२] (वसोः) = धन के द्वारा (वसुत्वा) = प्रजा के निवास को उत्तम बनानेवाली, अर्थात् प्रजा की आर्थिक स्थिति को ठीक करके उनके जीवन मापक को ऊँचा करनेवाला, (कारवः) = क्रियाशील (अनेहा:) = पाप से रहित राष्ट्रपति (विश्वं द्रविणम्) = सम्पूर्ण धन को (क्षु) = शीघ्रता से (उपविवेष्टि) = व्याप्त करनेवाला होता है । सम्पूर्ण कोश का स्वामी राष्ट्रपति ही होता है। वह इस बात का पूरा ध्यान करता है कि प्रजा से कर के रूप में प्राप्त धन का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न हो जाए। एवं यह राष्ट्रपति सभा पर इष्ट नियन्त्रण को रखनेवाला होता है। उसका यह कर्त्तव्य होता है कि कार्य करनेवाली सभा के कार्यों पर दृष्टि रखे उन कार्यों में गलती न होने दे।
Connotation: - भावार्थ- सभा के सभ्य कानून आदि का विचार करते समय राष्ट्रपति के दबाव में आकर कानून न बना बैठें। राष्ट्रपति भी सभा को अन्धाधुन्ध व्यय न करने दे ।