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अस॑मातिं नि॒तोश॑नं त्वे॒षं नि॑य॒यिनं॒ रथ॑म् । भ॒जेर॑थस्य॒ सत्प॑तिम् ॥
English Transliteration
Mantra Audio
asamātiṁ nitośanaṁ tveṣaṁ niyayinaṁ ratham | bhajerathasya satpatim ||
Pad Path
अस॑मातिम् । नि॒ऽतोश॑नम् । त्वे॒षम् । नि॒ऽय॒यिन॑म् । रथ॑म् । भ॒जेऽर॑थस्य । सत्ऽप॑तिम् ॥ १०.६०.२
Rigveda » Mandal:10» Sukta:60» Mantra:2
| Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:24» Mantra:2
| Mandal:10» Anuvak:4» Mantra:2
BRAHMAMUNI
Word-Meaning: - (असमातिम्) ज्ञान और बल में इन असमानगति-किसी से भी समानता न रखनेवाले-अतुल्य (नितोशनम्) शत्रुओं के हिंसक (त्वेषम्) तेजस्वी (निययिनं रथम्) नियम से जानेवाले रथवान् को (भजे रथस्य सत्पतिम्) संग्राम में जिसका रथ है, ऐसे सच्चे रक्षक को प्राप्त होवें ॥२॥
Connotation: - गुण व बल में सबसे बढ़े-चढ़े नेता, तेजस्वी, शत्रुहन्ता, सांग्रामिक रथ के सँभालनेवाले की शरण लेनी चाहिए, उसको राजा बनाना चाहिए ॥२॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
किनका संग ?
Word-Meaning: - [१] (भजे) = मैं सेवन व उपासन करता हूँ उस पुरुष का जो कि [क] (असमातिम्) = असमान व अनुपम है, unpasselleded-अपने क्षेत्र में अपनी समतावाले को नहीं रखता। [ख] (नितोशनम्) = निश्चय से काम-क्रोध आदि शत्रुओं का संहार करनेवाला है, [ग] (त्वेषम्) = कामादि शत्रुओं के संहार के कारण दीप्त जीवनवाला है। इन वासनाओं ने ही तो ज्ञान पर परदा डाला हुआ था, इस आवरण के हट जाने पर उसका ज्ञान चमक उठता है, [घ] (निययिनम्) = गतिशील है, जिसका जीवन अकर्मण्य नहीं। [ङ] (रथम्) = जो तीव्र गतिवाला है, स्फूर्ति से सब कार्यों को करनेवाला है। क्रियाशील है और क्रियाओं को स्फूर्ति से करता है। [ रंहतेर्रा स्माद् गतिकर्मणः ] [च] (रथस्य सत्पतिम्) = शरीर रूप रथ का उत्तम रक्षक है। अर्थात् अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान करता है । यदि यह शरीर रूप रथ विकृत हो जाए तो अन्य सब बातें तो व्यर्थ ही हो जाती हैं ।[२] एवं हमारा सम्पर्क उल्लिखित ६ बातों से युक्त जीवनवाले पुरुष के साथ होगा तो हम भी अपने जीवन में अनुपम उन्नति करनेवाले, कामादि का पराभव करनेवाले, दीप्त, गतिशील, स्फूर्तिमय व स्वस्थ बनेंगे। यह संग ही तो हमारे जीवन को बनानेवाला होता है।
Connotation: - भावार्थ- उत्तम सम्पर्क से हम भी अपने जीवन को उत्तम बना पायें।
BRAHMAMUNI
Word-Meaning: - (असमातिम्) ज्ञानबलयोरसमानगतिकम्-अतुल्यं वा “असमातिः-अतुल्यः” [ऋ० ६।१९।६ दयानन्दः] (नितोशनम्) शत्रूणां हिंसकम् “नितोशते बधकर्मा” [निघ० २।२९] (त्वेषम्) तेजस्विनम् (निययिनं रथम्) नियमेन गन्तारं रथवन्तम् “अकारो मत्वर्थीयश्छान्दसः” (भजे रथस्य सत्पतिम्) भञ्जन्ति परस्परं यस्मिन् स संग्रामः स भजः ‘घञर्थे कविधानम्’ तस्मिन् भजे रथो यस्य तस्य यथार्थरक्षकम्-अगन्म प्राप्नुयाम ॥२॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - We come to the incomparable lord and protector of the true and the good, destroyer of evil and darkness, radiant illustrious, commander of the chariot of victory in the battles of rectitude.
